Monsoon Gardening Tips: मानसून का मौसम सिर्फ मौसम बदलने का संकेत नहीं है, बल्कि गार्डनिंग के लिए साल का सबसे सुनहरा समय भी माना जाता है। इस दौरान बारिश का प्राकृतिक पानी, वातावरण में बढ़ी नमी और अनुकूल तापमान पौधों की बढ़वार को तेज़ कर देते हैं। यही वजह है कि अनुभवी माली नए पौधे लगाने, पुराने पौधों की रीपॉटिंग और बगीचे को नया रूप देने के लिए मानसून का इंतज़ार करते हैं। हालांकि, केवल बारिश का पानी ही काफी नहीं होता। यदि कुछ आसान बातों का ध्यान रखा जाए, तो पौधे पहले से कहीं अधिक तेजी से बढ़ सकते हैं।
बारिश का पानी पौधों के लिए फायदेमंद
बारिश का पानी नल के पानी की तुलना में अधिक स्वच्छ और मुलायम माना जाता है। इसमें क्लोरीन जैसे रसायन नहीं होते, इसलिए पौधों की जड़ें मिट्टी से पोषक तत्व आसानी से ग्रहण कर पाती हैं। बारिश के साथ वातावरण की नाइट्रोजन भी मिट्टी में मिलती है, जो पत्तियों को हरा-भरा बनाने और नई शाखाओं के विकास में मदद करती है। यही कारण है कि मानसून में अधिकांश पौधों में तेजी से नई पत्तियाँ और कोपलें निकलती हैं।
जलभराव से बचाना भी जरूरी है
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बारिश पौधों के लिए लाभदायक है, लेकिन गमले या क्यारी में पानी का लगातार जमा रहना जड़ों को नुकसान पहुँचा सकता है। अधिक नमी से जड़ें सड़ने लगती हैं और पौधा धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है। इसलिए हर गमले में जल निकासी का उचित छेद होना चाहिए, ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके। लगातार बारिश होने पर नाजुक इनडोर पौधों और सक्यूलेंट्स को ऐसी जगह रखें, जहाँ उन पर सीधे पानी की मार न पड़े।
सही समय पर खाद देने से बढ़ेगी ग्रोथ
मानसून में पौधों की वृद्धि तेज होती है, इसलिए उन्हें पर्याप्त पोषण भी चाहिए। इस मौसम में रासायनिक खाद की बजाय वर्मीकम्पोस्ट, सड़ी गोबर की खाद या नीम खली जैसी जैविक खाद का उपयोग अधिक लाभदायक रहता है। ये मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ जड़ों को भी मजबूत बनाते हैं। ध्यान रखें कि तेज बारिश से ठीक पहले खाद न डालें, क्योंकि पोषक तत्व पानी के साथ बह सकते हैं। महीने में एक बार हल्की मात्रा में खाद देना पर्याप्त होता है।
छंटाई और सफाई से आएगी नई जान
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मानसून पौधों की कटाई-छंटाई के लिए भी उपयुक्त समय है। सूखी, पीली और रोगग्रस्त पत्तियों को हटाने से पौधा अपनी ऊर्जा नई शाखाओं और पत्तियों के विकास में लगाता है। साथ ही गमले में गिरे सूखे पत्ते और खरपतवार नियमित रूप से हटाते रहें। इससे फफूंद और कीटों का खतरा कम होता है तथा पौधों को पर्याप्त हवा भी मिलती रहती है।
धूप और कीट नियंत्रण पर भी दें ध्यान
बरसात में धूप कम मिलने से कुछ पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। ऐसे पौधों को दिन में कुछ समय ऐसी जगह रखें, जहाँ अच्छी प्राकृतिक रोशनी मिलती हो। अधिक नमी के कारण घोंघे, फफूंद और छोटे कीट भी सक्रिय हो जाते हैं। सप्ताह में एक बार पौधों की जांच करें और जरूरत पड़ने पर नीम के तेल का छिड़काव करें। यह पौधों को नुकसान पहुँचाने वाले कीटों से प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता है।
सही जल निकासी, संतुलित खाद, नियमित छंटाई और थोड़ी-सी देखभाल के साथ मानसून आपके पौधों के लिए किसी प्राकृतिक टॉनिक से कम नहीं है। इन आसान उपायों को अपनाकर आप अपने बालकनी गार्डन, टैरेस गार्डन या घर के छोटे से गार्डन को पूरे मौसम हरा-भरा, स्वस्थ और तेजी से बढ़ता हुआ देख सकते हैं।
FAQ
Q.
क्या बारिश का पानी सभी पौधों के लिए सुरक्षित है?
A.
जी हाँ, बारिश का पानी सभी पौधों के लिए बेस्ट है। लेकिन सकुलेंट्स और कैक्टस जैसे पौधों को ज़्यादा पानी से बचाना चाहिए।
Q.
मानसून में पौधों को कितनी बार पानी देना चाहिए?
A.
अगर पौधे खुले में हैं और बारिश हो रही है, तो अलग से पानी न दें। मिट्टी को छूकर देखें, अगर वह सूखी लगे तभी पानी दें।
Q.
बरसात में पौधों में फंगस लगने पर क्या करें?
A.
फंगस से बचने के लिए मिट्टी की गुड़ाई करें और 1 लीटर पानी में 5ml नीम का तेल मिलाकर पत्तियों पर स्प्रे करें।
Q.
क्या मानसून में नए पौधे लगा सकते हैं?
A.
बिल्कुल! मानसून का मौसम नए पौधे लगाने और उनकी रिपॉटिंग करने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है।
Q.
गमले में पानी जमा होने से कैसे रोकें?
A.
गमले का ड्रेनेज होल चेक करें, उसे ठीक करें और मिट्टी में थोड़ी रेत (sand) मिलाएं ताकि पानी आसानी से छन जाए।
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