Indian Cricket Team: भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं है, यह एक ऐसा धर्म है जिसे करोड़ों लोग पूरी शिद्दत से मानते हैं. जब टीम इंडिया नीली जर्सी पहनकर मैदान पर उतरती है, तो देश के ना-जाने कितने घरों में अलग ही दर्जे की ऊर्जा दौड़ जाती है. हां मैं पेशे से पत्रकार हूं लेकिन उससे पहले एक भारतीय हूं. यानी करोड़ों भारतीय क्रिकेट फैंस की तरह हमारी टीम की जीत में मुझे भी अपनी जीत दिखती है. दूसरी तरफ उनकी हार से मेरा भी दिल टूट जाता है. इसीलिए मैंने ये ओपिनियन पीस आज किसी पत्रकार के तौर पर नहीं बल्कि एक आम क्रिकेट फैन के तौर पर लिखने का फैसला किया है.

दरअसल, आयरलैंड और इंग्लैड दौरा खत्म होने के बाद जब मैं अपनी टीम इंडिया की मौजूदा हालत देख रहा हूं तो मन में सिर्फ निराशा, गुस्सा और एक गहरा दुख है. कोई बताए कि सिर्फ कुछ वक्त पहले तक जिस भारतीय टीम का डंका पूरी दुनिया में बज रहा था, जो टीम अपनी हार न मानने वाली जिद के लिए जानी जाती थी आज वही दिशाहीनता, मनमानी और शर्मनाक प्रदर्शन के एक ऐसे अंधेरे कुएं में कैसे गिर चुकी है?

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इंग्लिश दौरे ने खोली ‘कुप्रबंधन’ की पोल

आईपीएल के तुरंत बाद हुए आयरलैंड दौरे पर जब टीम इंडिया को 0-2 से शर्मनाक हार मिली थी तो भारतीय मैनेजमेंट ने एक दलील दी थी. बताया गया था कि, ‘आयरलैंड की कंडीशंस से रूबरू होने का सही मौका नहीं मिला. टीम में नए कप्तान के साथ ही कई नए खिलाड़ी भी थे. लिहाज़ा तैयारियों का भी सही से मौका नहीं मिल पाया.’ लेकिन ऐसा लगने लगा है कि पहले आयरलैंड और अब इंग्लैंड दौरे की हार ने हमारी क्रिकेट व्यवस्था के उस कड़वे सच को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है, जिसे अब तक बड़ी चालाकी से छुपाया जा रहा था.

खासतौर से टीम इंडिया का इंग्लैंड दौरा भारतीय क्रिकेट के इतिहास के सबसे बुरे अध्यायों में से एक के रूप में याद रखा जाएगा. क्या आप यकीन कर सकते हैं कि हमारी मेन्स टीम ने खेले पिछले नौ में से आठ मैच गंवा दिए? बर्मिंघम में मिली एकमात्र जीत के अलावा पूरी सीरीज में हमारी टीम पूरी तरह से असहाय और दिशाहीन नजर आई.

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INDIA IN THIS UK TOUR:

– Lost the T20I series vs IRE ❌
– Lost the ODI series vs ENG ❌
– Lost the T20I series vs ENG ❌

One of lowest point in Indian White ball Cricket. pic.twitter.com/Ugfh6nS534

— Johns. (@CricCrazyJohns) July 19, 2026

हार की ज़िम्मेदारी लेंगे गंभीर और अगरकर?

इसी साल 2026 में भारतीय टीम ने टी20 वर्ल्ड कप में चैंपियन का खिताब डिफेंड किया था. जिसके बाद टीम ने पहली सीरीज़ आयरलैंड के खिलाफ खेली और अपना हमेशा से बरकरार ‘अजेय’ रहने का रिकॉर्ड मिट्टी में मिला दिया. बारी आई इंग्लैंड में टी20 सीरीज़ की, तो यहां भी 0-4 से हार का स्वाद चखा. दौरे के आखिर में 3 मैच की वनडे सीरीज हुई. जहां सीनियर क्रिकेटर्स की वापसी से कुछ बदलाव की उम्मीद थी लेकिन यहां भी हमें 1-2 से हार का मुंह देखना पड़ा. आज हर सच्चे क्रिकेट प्रेमी के मन में यह सवाल खौल रहा है कि आखिर इस भयानक दुर्दशा का असली ज़िम्मेदार कौन है? जब जीत का श्रेय कप्तान, कोच और सिलेक्टर्स को मिलता है तो हार का ठीकरा भी कप्तान तक क्यों सीमित रखा जाए.

एक और मुद्दा है कि टीम के हेड कोच गौतम गंभीर और चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर इस खराब प्रदर्शन से लिए क्या ज़िम्मेदारी उठाएंगे ? दोनों की ‘भविष्य की टीम’ बनाने और ‘बदलाव’ के नाम पर अजीबोगरीब फैसले लेने की ‘ज़िद रूपी सोच’ टीम का वर्तमान बर्बाद कर रही है. कल के नाम पर टीम का आज कुर्बान किया जा रहा है. क्या दोनों ने ठान लिया है कि जो भी स्थापित और अनुभवी खिलाड़ी है, उसे किसी न किसी बहाने बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए. फिर चाहे टीम को इसकी कितनी भी बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े?

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चैंपियन खिलाड़ियों के साथ अन्याय क्यों?

कौन सोच सकता था कि जिस सूर्यकुमार यादव ने अपनी शानदार कप्तानी से भारत को टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब जिताया, गंभीर और अगरकर की ये जोड़ी उन्हें ही टीम से बाहर कर देगी. सिर्फ SKY नहीं आजकल तो दूसरे मैच-विनर्स को भी टीम से ज़बरदस्ती ड्रॉप करने का अजीब खेल खेला जा रहा है. क्या अनुभव और हालिया फॉर्म की टीम में कोई कीमत नहीं बची है? अपने पसंदीदा खिलाड़ियों की खातिर प्लेइंग इलेवन बदल देना, फॉर्म में चल रहे खिलाड़ियों को बेंच पर बिठाना और बिना किसी ठोस रणनीति के प्रयोग करना. क्या गंभीर और अगरकर के दौर में यही टीम इंडिया का मास्टर प्लान है.

अब ज़रा इन कड़वे आंकड़ों पर नज़र डालिए, जो चीख-चीख कर उस अन्याय की गवाही दे रहे हैं जो हमारे बेहतरीन गेंदबाजों के साथ किया जा रहा है. मोहम्मद शमी को ही ले लीजिए, 108 वनडे मैचों में 206 विकेट लेने वाले दुनिया के सबसे घातक तेज गेंदबाजों में से एक, शमी को मार्च 2025 में हमारी विजयी चैंपियंस ट्रॉफी मुहिम के बाद से पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है. इसके अलावा 50 वनडे मैचों में 76 विकेट लेने वाले मोहम्मद सिराज ‘इन एंड आउट’ की नीति से संघर्ष करते दिख रहे हैं. कुलदीप यादव का दर्द तो और भी शर्मनाक है.

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121 वनडे मैचों में 194 विकेट चटकाने वाला यह गेंदबाज लगातार दूसरे साल इंग्लैंड के दौरे पर सिर्फ एक ‘ट्रैवलिंग पैसेंजर’ बनकर रह गया. वो तो रोहित शर्मा ने लॉर्ड्स वन-डे में शतक बना दिया नहीं तो टीम से बाहर होने वाले क्रिकेटर्स की फेहरिस्त में कौन जाने अगला नाम उन्हीं का होता!

India's Last 2 Tours in England

2022
India Won T20I Series (Under Rohit)
India Won ODI Series (Under Rohit)

2026
India Lost T20I Series (Under Shreyas)
India Lost ODI Series (Under Gill) pic.twitter.com/U1ucxWRVpL

— 𝑺𝒉𝒆𝒃𝒂𝒔 (@Shebas_10dulkar) July 19, 2026

लॉर्ड्स में पेस अटैक की रणनीतिक विफलता

इसमें कोई शक नहीं कि भारतीय टीम में आज भी बड़ी-बड़ी टीमों को दुनिया के किसी भी मैदान पर धूल चटाने की क्षमता है. लेकिन उसके लिए सिलेक्शन से लेकर सही प्लेइंग-11 तय करना और फिर मैच के लिए बनने वाली रणनीति का रोल होता है. इंग्लिश कंडीशंस में होने वाली क्रिकेट को बारीकी से देखने वाले ये बात बखूबी जानते हैं कि लॉर्ड्स के आउटफील्ड पर एक खास ढलान मौजूद है. ये ढलान किसी भी मैच के नतीजे तक को प्रभावित करती है.

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फिर भी कोच गौतम गंभीर ने लॉर्ड्स वन-डे में चार-चार अनुभवहीन तेज गेंदबाजों को प्लेइंग-11 में उतारने का फैसला लिया. जहां कलाई के स्पिनर मिडिल ओवरों में गेम चेंजर साबित हो सकते थे वहां कुलदीप को डगआउट में बिठाकर रखना समझदारी नहीं बल्कि एक रणनीतिक आत्महत्या थी. इससे पहले टी20 सीरीज़ में भी हर गेंद को मैदान के बाहर हिट करने की ज़िद भी पूरी तरह से बेनकाब हुई थी. शॉर्ट बॉल के सामने हमारे बल्लेबाजों की लाचारी देखकर एक फैन के तौर पर शर्म आ रही थी.

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जब दांव पर साख तो तय हो जवाबदेही!

अब वक्त आ गया है कि इस बर्बादी पर लगाम लगाई जाए और कुछ गंभीर सवाल भी पूछे जाएं. आगे का रास्ता मुश्किल और चुनौतियों से भरा है. 2026 एशियन गेम्स में होने वाली टी20 फॉर्मेट की लड़ाई, अगले साल होने वाले WTC फाइनल में क्वॉलिफाई करने की जंग और फिर 2027 का वनडे वर्ल्ड कप जैसे बड़े इवेंट्स दांव पर लगे हैं. अब गंभीर राज में टीम को हासिल हुई सफलताओं को भुलाने और नाकामियों को याद करने का वक्त है. घर पर न्यूज़ीलैंड-साउथ अफ्रीका से टेस्ट सीरीज़ हारने के बाद अब मिशन श्रीलंका हमारा इंतज़ार कर रहा है. जिसके बाद न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज़ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में हमारा भविष्य तय करेंगी.

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रही बात वन-डे और टी20 फॉर्मेट की तो बीसीसीआई को भी समझना चाहिए कि यह देश की साख का सवाल है, करोड़ों फैंस की भावनाओं का सवाल है. यानी अब क्रिकेट के रहनुमाओं को मूकदर्शक बनकर बैठने के बजाय जवाबदेही तय करनी चाहिए. हम सुनहरा भविष्य ज़रूर चाहते हैं लेकिन अपने गौरवशाली वर्तमान को राख में मिलाकर नहीं. अगर बेतुके एक्सपेरिमेंट्स को नहीं रोका गया तो कल की तलाश में भारतीय क्रिकेट का आज दर्दनाक इतिहास बन जाएगा.

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