नवभारत संपादकीय: ट्रंप की नीति पर सवाल, क्या अमेरिका-ईरान में फिर होगा संघर्ष विराम ?

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    अंकिता पटेल

Updated On: Jul 23, 2026 | 09:02 AM IST

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सार

US Iran Conflict: ट्रंप की ईरान नीति पर सवाल उठ रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, अमेरिकी ठिकानों पर हमलों और हाउथी विद्रोहियों की सक्रियता ने क्षेत्रीय संकट को और गहरा कर दिया है।

Navbharat Editorial: Questions over Trump's policy—will there be a ceasefire between the US and Iran again?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)

विस्तार

US Iran Military Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इस गलतफहमी में थे कि जिस अ तरह उन्होंने वेनेजुएला पर कार्रवाई कर उसे देखते ही देखते घुटनों पर ला दिया, वैसा ही ईरान के साथ करने में भी वह कामयाब हो जाएंगे। ट्रंप ने इजराइल का साथ देकर ईरान से लड़ाई शुरू की और बुरी तरह फंस गए। खाड़ी देशों में अमेरिका के सैनिक अड्डों को ईरान लगातार तबाह करता चला जा रहा है।

ईरानी मिसाइल व ड्रोन ने खाड़ी देशों में अमेरिका के एयरबेस के रनवे, टैक्सी वे और हैंगर को निशाना बनाकर विमानों के उड़ान भरने व लैंडिंग के आधार को ही खत्म करना शुरू कर दिया है। ट्रंप ने ईरान के हमले में मारे गए अमेरिकी फौजियों का बदला लेने की धमकी दी है। उधर यमन में हाउथी विद्रोहियों ने सऊदी जहाजों की घेराबंदी की घोषणा की है।

तेल संकट के बीच फिर बढ़ी युद्धविराम की उम्मीद

ऐसा होने पर पश्चिम एशिया का तेल फारस की खाड़ी व लाल सागर से होकर नहीं आ सकेगा। अमेरिका व ईरान के बीच संघर्षविराम समझौता टूटने की दोनों पक्षों ने पहले ही घोषणा कर दी थी, लेकिन अब फिर से 10 दिनों का संघर्ष विराम करने के आसार नजर आते हैं।

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क्योंकि तेल महंगा हो रहा है और अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है। अमेरिका में पेट्रोल के दाम 4 डॉलर प्रति गैलन तक जा पहुंचे हैं तथा मध्यावधि चुनाव के पहले रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ असंतोष बढ़ने लगा है। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि युद्ध में रणनीतिक लाभके बाद संघर्षविराम के लिए चर्चा की जा सकती है। अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने भी कहा कि अमेरिका ने कूटनीति के रास्ते बंद नहीं किए हैं।

युद्धविराम पर टिकी तेल बाजार की नजर

खबर है कि पाकिस्तान, मिस्र, कतर तथा अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थों ने अमेरिका व ईरान के सामने 10 दिनों तक अपने हमले रोक देने का प्रस्ताव रखा है तथा इस दौरान बातचीत पर जोर दिया है, ताकि जहाजों की सामान्य आवाजाही सुनिश्चित हो सके, ईरान के एक मंत्री ने भी इस्लामाबाद जाकर बातचीत की है कि युद्धविराम का रास्ता खोजा जाए।

यदि कूटनीति विफल रहती है तो कच्चे तेल के दाम और ऊपर जाएंगे। गोल्डमैन साक के अनुसार युद्ध जल्दी खत्म नहीं हुआ तो तेल के दाम फिर बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच जाएंगे। इसके विपरीत यदि शांति स्थापित हुई तो इस वर्ष के अंत तक यह दाम 70 डॉलर प्रति बैरल पर आ सकते हैं।

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अमेरिका यदि संघर्ष जारी रखता है तो उसकी घरेलू राजनीति व जनमत पर इसका विपरीत असर पड़ेगा। इजराइल या दूर के अड्डों से ईरान पर हमला जारी रखने पर युद्ध की लागत बढ़ जाएगी। दूसरी ओर ईरान सस्ते मिसाइल व ड्रोन से खाड़ी देशों में अमेरिकी फौजी अड्डों को नष्ट कर रहा है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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