Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्रभु राम की पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यों को और अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया गया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर की पूरी धार्मिक व्यवस्था के संचालन के लिए 9 सदस्यीय विशेष संत समिति का गठन किया है. इस समिति को मंदिर की पूजा पद्धति, धार्मिक आयोजनों और पुजारियों के प्रशिक्षण से जुड़े पांच बड़े अधिकार सौंपे गए हैं. इस फैसले के बाद अब मंदिर की धर्म व्यवस्था में प्रशासनिक अधिकारियों के बजाय संतों की भूमिका सबसे मुख्य हो गई है.

संत समिति को मिले पांच बड़े और अहम अधिकार

इस नई व्यवस्था के तहत संत समिति को मंदिर से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम सौंपे गए हैं. सबसे पहला अधिकार यह है कि समिति मंदिर में नित्य पूजा और सभी धार्मिक अनुष्ठानों को वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुसार संचालित कराएगी और इसकी निगरानी करेगी. दूसरा अधिकार रामनवमी, सीता नवमी, विवाह पंचमी और झूलन उत्सव जैसे सभी वार्षिक पर्वों की सही तिथि का अंतिम निर्धारण करना और उनके आयोजन की रूपरेखा तैयार करना है.

बड़े धार्मिक कार्यक्रमों की बनेगी योजना

तीसरे अधिकार के रूप में समिति विशेष वैदिक अनुष्ठानों, महायज्ञों, रामार्चा पूजन और वेद पारायण जैसे बड़े धार्मिक कार्यक्रमों की योजना बनाएगी. चौथे अधिकार के तहत मंदिर के पुजारियों के प्रशिक्षण, नई नियुक्ति, उनके आचरण, ड्रेस कोड और पूजा पद्धति की निगरानी की जिम्मेदारी समिति को दी गई है. इसके लिए अयोध्या में एक स्थायी अर्चक प्रशिक्षण संस्थान भी स्थापित किया जाएगा. पांचवें अधिकार के तौर पर यह समिति अयोध्या के मठों, मंदिरों, संतों और गुरुकुलों के साथ नियमित संवाद बनाए रखेगी.

9 सदस्यीय समिति में अयोध्या के संतों का रहेगा बहुमत

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के लिए प्रशिक्षित और अनुशासित पुजारियों की स्थायी व्यवस्था बनाने का निर्णय लिया है. इस शक्तिशाली धार्मिक समिति की अध्यक्षता ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि करेंगे. इस समिति की सबसे खास बात यह है कि इसमें अयोध्या के पांच प्रमुख संतों को शामिल किया गया है, जिससे समिति में स्थानीय संत समाज का बहुमत रहेगा.

समिति में कौन-कौन शामिल

समिति में निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास, मणिराम दास छावनी के महंत कमलनयन दास, रामकथा कुंज के महंत डॉक्टर रामानंद दास, रामबल्लबा कुंज के अधिकारी राजकुमार दास और महंत मिथिलेशनांदिनी शरण शामिल हैं. इनके अलावा जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और जगद्गुरु स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ भी इस समिति में सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं देंगे.

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पूजन व्यवस्था में पहले क्या था और अब क्या बदलेगा

राम मंदिर की पूजन व्यवस्था में अब बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. पहले मंदिर की पूजा व्यवस्था की निगरानी मुख्य रूप से ट्रस्ट और प्रशासनिक स्तर पर होती थी, लेकिन अब धार्मिक समिति सीधे पूजा-पद्धति और सभी धार्मिक कामों की निगरानी करेगी. पहले पूजा शास्त्रीय नियमों से होती थी पर निगरानी के लिए कोई अलग समिति नहीं थी, जबकि अब नौ सदस्यीय समिति रामानंदी परंपरा का पालन पक्का कराएगी.

पर्वों की तिथि और आयोजन संत समिति करेगी तय

इसी तरह पहले त्योहारों की तिथियां ट्रस्ट तय करता था, लेकिन अब पर्वों की तिथि और आयोजन संत समिति तय करेगी. पुजारियों की कार्यप्रणाली पर पहले सामान्य नजर रखी जाती थी, मगर अब उनके ड्रेस कोड, पूजा-विधि और आचरण की नियमित समीक्षा होगी. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पहले अयोध्या के संतों की भूमिका सिर्फ सलाह देने तक सीमित मानी जाती थी, लेकिन अब अयोध्या के पांच संत बहुमत के साथ धर्म व्यवस्था की अगुवाई करेंगे और उनका निर्णय ही अंतिम माना जाएगा.

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