जेन जी का सरकार के खिलाफ आंदोलन और जातीय समीकरण को भेद पाने की चुनौती के बीच बीजेपी ने एक महत्वपूर्ण फ़ैसला लिया है. ये फ़ैसला मास्टर स्ट्रोक भी साबित हो सकता है. यूपी में होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी संत शिरोमणि रविदास जी महाराज के 650 वीं जयंती पर पूरे देश में विशेष कार्यक्रम करने जा रही है. ये आयोजन उनकी जयंती से कई महीने पहले शुरू हो रहे है. 29 जुलाई यानी की गुरू पूर्णिमा से शुरू होकर 20 फरवरी यानी की माघी पूर्णिमा(संत रविदास जयंती) तक ये आयोजन चलेंगे.

भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग ने वाराणसी के सर्किट हाउस में जनप्रतिनिधियों तथा भाजपा के क्षेत्र, जिला और महानगर पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए दी. उन्होंने कहा कि संत शिरोमणि रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने बड़े उत्साह और भव्यता के साथ मनाने का निर्णय लिया है. संत रविदास का योगदान केवल वाराणसी तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने पूरे देश और दुनिया को सामाजिक समरसता, मानवता और समानता का संदेश दिया.उनका पूरा जीवन सामाजिक समरसता को मजबूत करने के लिए समर्पित रहा और वे सामाजिक समरसता के महानायक के रूप में सदैव स्मरण किए जाते रहेंगे.

अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाएगी मिट्टी

तरुण चुग ने बताया कि 28 जुलाई को 131 टोलियां देश के विभिन्न हिस्सों से संत रविदास जी की जन्मस्थली सीर-गोवर्धन पुर पहुंचेंगी. इन टोलियों के माध्यम से 131 कलशों में जन्मस्थली की पवित्र मिट्टी भरी जाएगी. 29 जुलाई को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संत समाज की उपस्थिति में कलश पूजन एवं आरती होगी. इसके अगले दिन 30 जुलाई को सभी 131 कलश वाहनों पर रखकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और देश के अन्य राज्यों के लिए रवाना किए जाएंगे.

इन 131 कलशों में उत्तर प्रदेश के 98 संगठनात्मक जिले, देश के 27 राज्य और छह जोन शामिल हैं. इसके माध्यम से संत रविदास की जन्मस्थली की मिट्टी देशभर के गांव-गांव और बस्ती-बस्ती तक पहुंचेगी तथा वहां उसका पूजन किया जाएगा.

बीजेपी के इस फैसले को राजनैतिक विश्लेषक दलित वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं. वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार कहते हैं कि “उत्तर प्रदेश की 403 सीटों में करीब 300 सीटें ऐसी हैं, जहां पर दलित समाज निर्णायक रोल में हैं, 20 जिलों में तो 25% से ज्यादा अनुसूचित जाति-जनजाति की आबादी है और यही वजह है कि सभी पार्टियों की नजर दलित समाज पर है”

‘बीजेपी एक बार फिर से उसी वोट को पाने की जुगत में’

राजेंद्र कुमार कहते हैं कि बीजेपी की नजर बसपा के वोट बैंक पर है और कुछ हद तक बीजेपी ने बसपा के वोटरों को साध भी लिया है लेकिन लोकसभा चुनाव के परिणाम ने बीजेपी की नींद उड़ा दी है. बीजेपी एक बार फिर से उसी वोट को पाने की जुगत में है और सारी रणनीति इसी बात को ध्यान में रख कर बनाई जा रही है. ना तो दलित समाज को संघ में और ना ही सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है. और ना ही बीजेपी में दलित नेता और मंत्री इस हैसियत में ही हैं कि वो दलित समाज को बीजेपी से जोड़ सकें. तो ऐसे में बीजेपी को संत रविदास की याद आ रही है इनका कोई ऐसा उद्देश्य नही है कि दलित समाज की बेहतरी हो या उनके लिए कोई काम किया जाए. ये मायावती के वोटबैंक में सेंध लगाने की एक राजनैतिक कोशिश है.

लेकिन देश के जाने-माने राजनैतिक विश्लेषक और दलित समाज को करीब से समझने वाले प्रोफेसर बद्री नारायण ऐसा नही मानते. प्रोफेसर बद्री नारायण कहते हैं कि सामाजिक समरसता की कोई भी कोशिश स्वागत योग्य होनी चाहिए भले उसका कोई राजनैतिक एजेंडा ही क्यूं ना हो. पॉलिटिकल पार्टीज कोई भी कार्यक्रम करती हैं तो उसका राजनैतिक मतलब तो होता ही है. जहां तक संत शिरोमणि रविदास जी के नाम पर कार्यक्रम करने या उनके दर्शन पूजन करने की बात है तो इसमें सभी शामिल हैं.

बीजेपी और कांग्रेस सहित सभी दल संत रविदास की शरण में जाते रहे हैं ये कोई नई बात नहीं है. जहां तक बसपा के वोट बैंक में सेंध लगाने वाली बात है तो बीजेपी उसमें काफी हद तक सफल हो चुकी है. इसलिए ये कहना कि बीजेपी बसपा का वोटबैंक हासिल करने की कोशिश में है पूरी तरह से ठीक नहीं है. बीजेपी ने यूपी में पहले भी दलित समाज में सहभोज और सामाजिक समरसता पर काम किया है और उसको सफलता भी मिली है.

रिटायर्ड प्रोफेसर सदानंद ने क्या कहा?

संत रविदास पर लम्बे समय तक काम करने वाले बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग से रिटायर्ड प्रोफेसर सदानंद शही कहते हैं कि कोई भी नेता या राजनैतिक दल बिना किसी स्वार्थ के किसी संत के पास नहीं जाता. बीजेपी के इस कार्यक्रम की टाइमिंग स्वतः बता रही है कि बीजेपी को संत शिरोमणि की याद क्यूं आ रही है.

संत शिरोमणि की जयंती पर प्रधानमंत्री 2016 और 2024 में जबकि मुख्यमंत्री 2022 और 2023 में आ चुके हैं. और करोड़ों की सौगात भी दिए हैं. बावजूद इसके इनके भी दर्शन करने की पॉलिटिकल टाइमिंग अपने आप में बहुत कुछ कहती हैं.

प्रोफेसर सदानंद शाही कहते हैं कि संत शिरोमणि ने भी पीएम मोदी की ही तरह संत शिरोमणि भी अपने सपनों का स्मार्ट सिटी बनता देखना चाहते थे ‘बेगम पुरा शहर कौ नांउ, दुखू अंदोह नहीं तिहिं ठांउ नां तसवीस खिराजु न मालु, खउफु न खता न तरसु जवालु’॥ संत शिरोमणि कहते हैं कि मैं बेग़मपुरा शहर को नमन करता हूं जहां कोई दुःख या चिंता नहीं है. वहां अपने माल पर कोई अतिरिक्त कर देने की परेशानी नहीं है. वहां पाप−कर्म नहीं है और पाप−कर्म न होने के कारण किसी का चरित्र नहीं गिरता है. सब बेकसूर हैं. रहने के लिए मुझे इस शहर में सुंदर स्थान मिल गया है. वहां सदा अमन−चैन है. वहां आत्मिक अवस्था की बादशाहत सदैव रहती है; किसी में दूसरे−तीसरे का भेद नहीं है, सब एक समान हैं.

अमित कुमार सिंह

अमित कुमार सिंह

पिछले 15 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय, 2008 सितम्बर में नई दुनियां अख़बार दिल्ली से पत्रकारिता शुरू की. अप्रैल 2009 में ज़ी मीडिया जॉइन किया. दिसंबर 2018 तक ज़ी मीडिया में बतौर ब्यूरो चीफ बनारस रहा. जनवरी 2019 से जनतंत्र टीवी में गए और 2021 तक जिम्मेदारी निभाई. रोमिंग जर्नलिस्ट के तौर पर जनतंत्र टीवी के लिए स्पेशल करेस्पोंडेंट की हैसियत से दिल्ली, बिहार-झारखंड और लखनऊ में अपनी सेवाएं दीं. टीवी 9 यूपी का हिस्सा बनने से पहले न्यूज़ नेशन गोरखपुर में बतौर ब्यूरो चीफ़ की भूमिका में रहे. फिलहाल टीवी 9 यूपी (डिजिटल) के लिए बनारस से सेवाएं दे रहे हैं.

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