चंद्रशेखर आजाद पर आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला: हाईकोर्ट ने खारिज की आरोपी की अपील, जारी रहेगा ट्रायल
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सार
Allahabad High Court: हाईकोर्ट ने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ आपत्तिजनक फेसबुक टिप्पणी मामले में आरोपी की आपराधिक अपील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि निचली अदालत में मुकदमे की सुनवाई जारी रहेगी।

चंद्रशेखर आजाद पर आपत्तिजनक टिप्पणी (सोर्स- सोशल मीडिया)
विस्तार
High Court Decision For Facebook Post Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ के खिलाफ फेसबुक पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने अधीनस्थ अदालत द्वारा डिस्चार्ज अर्जी खारिज किए जाने के आदेश को सही ठहराते हुए आरोपी की आपराधिक अपील निरस्त कर दी।
अदालत ने खारिज की आरोपी की डिस्चार्ज अर्जी
यह आदेश न्यायमूर्ति संतोष राय की एकलपीठ ने हमीरपुर निवासी चंद्र प्रकाश सिंह उर्फ गोली ठाकुर की ओर से दाखिल आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए पारित किया। अपील में 24 जून 2026 को अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट), हमीरपुर द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें आरोपी की डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी गई थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोप तय करने के चरण पर अदालत का दायित्व केवल यह देखना होता है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं। इस स्तर पर उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण या उनकी सत्यता का अंतिम मूल्यांकन नहीं किया जाता। इसी आधार पर अदालत ने निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
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हमीरपुर जिले के सुमेरपुर थाने में दर्ज है मामला
बता दें कि यह मामला हमीरपुर जिले के सुमेरपुर थाने में दर्ज है। आरोपी के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप है कि सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी।
सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से दलील दी गई कि एफआईआर घटना के लगभग सात दिन बाद दर्ज कराई गई और उसमें किसी विशेष जातिसूचक शब्द का उल्लेख नहीं है। हालांकि हाईकोर्ट ने इन दलीलों को इस चरण में पर्याप्त आधार नहीं माना और कहा कि इन पहलुओं पर विचार मुकदमे की सुनवाई के दौरान किया जाएगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब आरोपी के खिलाफ निचली अदालत में मुकदमे की कार्यवाही पूर्ववत जारी रहेगी।
