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'गंगा में चिकन खाना कोई अपराध नहीं', वाराणसी इफ्तार पार्टी मामले पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जवल भुइयां की टिप्पणी
- Edited by: मोनू झा
- Updated Jul 26, 2026, 06:38 PM IST
Supreme Court Justice Ujjwal Bhuyan: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने देश में असहमति के घटते स्थान पर चिंता जताई है। उन्होंने वाराणसी में गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार के दौरान चिकन बिरयानी खाने के मामले में युवकों को तीन महीने तक जमानत न मिलने पर सवाल उठाए।
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जस्टिस भुइयां का कड़ा रुख (Photo: Supreme Court)
Supreme Court Justice Ujjwal Bhuyan: वाराणसी में गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी के दौरान चिकन बिरयानी खाने (ganga boat iftar chicken biryani bail case) और हड्डियां फेंकने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने बेहद सख्त और महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने देश में घटती वैचारिक आजादी और असहमति व्यक्त करने के अधिकारों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। जस्टिस भुइयां ने कहा कि भारत में अलग-अलग विचारों को स्वीकार करने के लिए सार्वजनिक जगहें लगातार कम होती जा रही हैं।
शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और विरोध करने वाले छात्रों व नागरिकों को गिरफ्तार किया जा रहा है। जब उन्हें जमानत मिलती भी है, तो अदालतें ऐसी कठोर शर्तें लगा देती हैं, जो उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बुरी तरह सीमित कर देती हैं। लाइव लॉ की जानकारी के मुताबिक वाराणसी के गंगा नदी वाले मामले का विशेष रूप से जिक्र करते हुए जस्टिस भुइयां ने सवाल उठाया कि जिन युवाओं को इस घटना के लिए गिरफ्तार किया गया, उन्हें तीन महीने तक जेल में क्यों रहना पड़ा?
गंगा नदी के ऊपर चिकन खाने पर रोक लगाने वाला कोई कानून नहीं-सुप्रीम कोर्ट
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "मुझे पूरा यकीन है कि चिकन बिरयानी खाना कोई अपराध नहीं है। गंगा नदी के ऊपर चिकन खाने पर रोक लगाने वाला कोई कानून मौजूद नहीं है। क्या ऐसी किसी गतिविधि के लिए लोगों को गिरफ्तार करके महीनों तक जमानत से वंचित रखा जा सकता है? मैं खुद से यह सवाल पूछता हूं, और देश के नागरिक भी यह सब देख रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि बहस, चर्चा और असहमति ही किसी भी जीवंत लोकतंत्र की पहचान होती है। दुर्भाग्य से अब सामान्य नागरिक गतिविधियों और पर्यावरण जैसे गंभीर मुद्दों पर आवाज उठाने वाले लोगों को भी अपराधियों की तरह देखा जाने लगा है। उन्होंने अदालतों द्वारा जमानत पर लगाई जा रही अत्यधिक सख्त शर्तों पर भी पुनर्विचार करने की जरूरत जताई।
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मोनू झाauthor
मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।
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