गाजीपुर जिले की जहूराबाद विधानसभा सीट पूर्वांचल की उन चुनिंदा सीटों में है, जहां चुनाव केवल पार्टी के परंपरागत वोट बैंक से तय नहीं होता। Zahoorabad Assembly Caste Equations में राजभर और दलित मतदाता सबसे मजबूत सामाजिक समूहों में गिने जाते हैं, जबकि यादव, चौहान, मुस्लिम, राजपूत, ब्राह्मण, वैश्य और दूसरे पिछड़े समुदाय चुनावी मुकाबले की दिशा बदलने की क्षमता रखते हैं। यही वजह है कि पिछले तीन दशक में यहां बसपा, भाजपा, सपा और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी सभी जीत दर्ज कर चुकी हैं।
जहूराबाद विधानसभा सीट संख्या 377 है और यह गाजीपुर जिले में आती है। वर्तमान विधायक सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर हैं। उन्होंने 2017 और 2022 में लगातार इस सीट से जीत दर्ज की। जुलाई 2026 तक ओम प्रकाश राजभर उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और उनके पास पंचायती राज, अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज विभाग की जिम्मेदारी है। उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय की वर्तमान मंत्रिपरिषद सूची भी उनके इन विभागों की पुष्टि करती है।
ओम प्रकाश राजभर की विस्तृत जानकारी के लिए उनकी वर्तमान विधायक प्रोफाइल और राजनीतिक सफर एवं राजनीतिक जीवन परिचय भी पढ़ा जा सकता है।
जहूराबाद विधानसभा सीट एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विधानसभा सीट | जहूराबाद |
| विधानसभा संख्या | 377 |
| जिला | गाजीपुर |
| आरक्षण | सामान्य |
| लोकसभा क्षेत्र | बलिया |
| वर्तमान विधायक | ओम प्रकाश राजभर |
| वर्तमान विधायक की पार्टी | सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी |
| 2022 में कुल मतदाता | 4,07,091 |
| 2022 विजेता के वोट | 1,14,860 |
| 2022 जीत का अंतर | 45,632 |
| 2022 विजेता वोट शेयर | 46.45% |
| 2017 विजेता | ओम प्रकाश राजभर |
| 2012 विजेता | सैय्यदा शादाब फातिमा |
| 2007 विजेता | कालीचरण |
| 2002 विजेता | कालीचरण |
भारत निर्वाचन आयोग के 2022 चुनावी आंकड़ों के मुताबिक जहूराबाद में कुल 4,07,091 मतदाता दर्ज थे। इनमें 2,18,081 पुरुष, 1,88,996 महिला और 14 अन्य श्रेणी के मतदाता थे। 2022 विधानसभा चुनाव में ओम प्रकाश राजभर ने 1,14,860 वोट हासिल किए और भाजपा के कालीचरण को 45,632 मतों से हराया।
जहूराबाद वर्तमान में बलिया लोकसभा क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटों में शामिल है। परिसीमन के बाद इसे विधानसभा संख्या 377 मिली। बलिया लोकसभा क्षेत्र में जहूराबाद के साथ फेफना, बलिया नगर, बैरिया और मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र आते हैं।
जहूराबाद में किसी जाति की विधानसभा क्षेत्रवार आधिकारिक मतदाता संख्या चुनाव आयोग जारी नहीं करता। इसलिए जातिगत मतदाताओं के जो आंकड़े राजनीतिक दलों, चुनावी सर्वेक्षणों और मीडिया रिपोर्टों में सामने आते हैं, उन्हें अनुमानित आंकड़ा ही माना जाना चाहिए।
2022 विधानसभा चुनाव के दौरान सामने आए विभिन्न चुनावी अनुमानों में दलित और राजभर मतदाताओं को सीट के सबसे बड़े समूहों में माना गया था। एक चुनावी आकलन में दलित मतदाताओं की संख्या लगभग 75 हजार और राजभर मतदाताओं की संख्या करीब 66 से 70 हजार बताई गई। यादव मतदाता करीब 44-45 हजार, चौहान करीब 34-35 हजार और मुस्लिम मतदाता करीब 28-30 हजार बताए गए थे।
जहूराबाद विधानसभा का अनुमानित जातिगत समीकरण
| जाति/समुदाय | अनुमानित मतदाता |
| दलित/अनुसूचित जाति | करीब 75,000 |
| राजभर | करीब 66,000–70,000 |
| यादव | करीब 44,000–45,000 |
| चौहान | करीब 34,000–35,000 |
| मुस्लिम | करीब 28,000–30,000 |
| राजपूत/क्षत्रिय | करीब 30,000 तक के अनुमान |
| ब्राह्मण | अलग-अलग अनुमानों में करीब 15,000–25,000 |
| वैश्य | कुछ चुनावी अनुमानों में करीब 20,000 |
| अन्य OBC एवं अन्य समुदाय | महत्वपूर्ण संख्या |
राजभर वोट जहूराबाद में क्यों है सबसे महत्वपूर्ण?
जहूराबाद की पहचान पिछले एक दशक में ओम प्रकाश राजभर और राजभर राजनीति के मजबूत केंद्र के रूप में बनी है। हालांकि यह मान लेना सही नहीं होगा कि राजभर मतदाता अकेले किसी उम्मीदवार को सीट जिता सकते हैं। चुनावी आंकड़े बताते हैं कि जीत के लिए राजभर वोट के साथ अन्य पिछड़ी जातियों, दलितों, यादवों, मुस्लिमों अथवा सवर्ण मतदाताओं के एक हिस्से का समर्थन जरूरी रहा है।
2012 में ओम प्रकाश राजभर जहूराबाद से चुनाव लड़े थे, लेकिन जीत सपा की सैय्यदा शादाब फातिमा को मिली। उस चुनाव में शादाब फातिमा को 67,012 वोट मिले थे, कालीचरण को 56,534 और ओम प्रकाश राजभर को 48,865 वोट मिले थे। यानी उस समय भी राजभर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत बन चुके थे, लेकिन उनका सामाजिक आधार जीत के लिए पर्याप्त नहीं था।
2017 में तस्वीर बदल गई। भाजपा और सुभासपा का गठबंधन था और ओम प्रकाश राजभर ने 86,583 वोट लेकर बसपा के कालीचरण को 18,081 मतों से हराया। कालीचरण को 68,502 और सपा प्रत्याशी महेंद्र को 64,574 वोट मिले थे। तीन बड़े उम्मीदवारों के बीच यह मुकाबला दिखाता है कि जातीय वोटों के विभाजन ने परिणाम पर सीधा असर डाला।
दलित मतदाता: संख्या बड़ी, लेकिन वोट की दिशा सबसे अहम
अनुमानों के अनुसार जहूराबाद में दलित मतदाता लगभग 75 हजार तक माने जाते रहे हैं। यह संख्या राजभर मतदाताओं के बराबर या उनसे कुछ अधिक बैठती है। इसी वजह से बसपा लंबे समय तक इस सीट पर मजबूत रही।
कालीचरण ने 2002 और 2007 दोनों विधानसभा चुनाव बसपा उम्मीदवार के रूप में जीते। 1993 में भी बसपा के इस्तेयाक अंसारी ने यहां जीत हासिल की थी। इससे साफ है कि दलित आधार के साथ यदि बसपा को किसी दूसरे सामाजिक समूह का समर्थन मिला तो पार्टी यहां प्रभावी मुकाबला खड़ा करने में सफल रही।
2022 में बसपा की सैय्यदा शादाब फातिमा को 53,144 वोट यानी 21.49 प्रतिशत मत मिले थे। बसपा चुनाव नहीं जीत सकी, लेकिन पांचवें हिस्से से अधिक वोट लेकर उसने यह जरूर दिखाया कि जहूराबाद में उसका सामाजिक आधार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
2027 के चुनाव में दलित मतदाता किस दिशा में जाते हैं, इसका असर भाजपा-सुभासपा गठबंधन और सपा दोनों की रणनीति पर पड़ेगा।
यादव और मुस्लिम वोट: सपा के लिए महत्वपूर्ण आधार
जहूराबाद में यादव मतदाता करीब 44 से 45 हजार और मुस्लिम मतदाता लगभग 28 से 30 हजार तक माने जाते हैं। संख्या जोड़ें तो दोनों समुदाय मिलकर एक बड़ा चुनावी ब्लॉक बनाते हैं।
2012 में सपा की सैय्यदा शादाब फातिमा की जीत इसी सामाजिक गणित की राजनीतिक ताकत का उदाहरण थी। उन्हें 67,012 वोट मिले और उन्होंने बसपा के कालीचरण को 10,478 मतों से हराया था।
2022 का चुनाव हालांकि अलग था। सपा और सुभासपा गठबंधन में थे और ओम प्रकाश राजभर गठबंधन उम्मीदवार थे। ऐसे में सपा का परंपरागत यादव-मुस्लिम आधार, राजभर वोट और गठबंधन के अन्य समर्थक वर्ग एक ही उम्मीदवार के पक्ष में आए। परिणामस्वरूप राजभर का वोट प्रतिशत 2017 के करीब 37.6 प्रतिशत से बढ़कर 46.45 प्रतिशत हो गया।
यही अंतर 2027 के लिए सबसे बड़ा सवाल बनाता है। 2022 का सपा-सुभासपा गठबंधन अब मौजूद नहीं है और ओम प्रकाश राजभर NDA के साथ हैं। इसलिए पिछले चुनाव का सामाजिक गठबंधन इस बार उसी रूप में दोहराया नहीं जा सकता।
चौहान और अन्य गैर-यादव OBC मतदाता भी निर्णायक
जहूराबाद में चौहान मतदाताओं की संख्या करीब 34 से 35 हजार बताई जाती है। इनके अलावा निषाद, बिंद, कुशवाहा, मौर्य, प्रजापति और दूसरे पिछड़े समुदायों की भी अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूदगी है।
पूर्वांचल में गैर-यादव OBC मतदाताओं को लेकर भाजपा और उसके सहयोगी दल लंबे समय से विशेष रणनीति अपनाते रहे हैं। वहीं सपा अपनी PDA यानी पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक रणनीति के जरिए इन्हीं वर्गों में विस्तार की कोशिश कर रही है।
जहूराबाद जैसी सीट पर यही छोटे और मध्यम आकार के सामाजिक समूह तब निर्णायक हो जाते हैं, जब राजभर, दलित और यादव-मुस्लिम वोट अलग-अलग राजनीतिक खेमों में बंट जाएं।
सवर्ण मतदाता किसे देते हैं बढ़त?
जहूराबाद में राजपूत, ब्राह्मण और वैश्य मतदाता भी महत्वपूर्ण हैं। चुनावी अनुमानों में राजपूत मतदाताओं की संख्या करीब 30 हजार, ब्राह्मणों की 15 से 25 हजार और वैश्य मतदाताओं की लगभग 20 हजार तक बताई गई है। आंकड़ों में स्रोत के हिसाब से अंतर है, इसलिए इन्हें सटीक संख्या के बजाय राजनीतिक आकलन के तौर पर देखना चाहिए।
1996 में भाजपा के गणेश ने जहूराबाद सीट जीती थी। यह अब तक भाजपा के लिए इस सीट की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जीत रही है। 2017 में भाजपा ने सीट सहयोगी सुभासपा के लिए छोड़ी और गठबंधन उम्मीदवार ओम प्रकाश राजभर जीते।
2022 में भाजपा ने कालीचरण को उम्मीदवार बनाया, जिन्हें 69,228 वोट मिले। हालांकि सपा-सुभासपा गठबंधन के सामने उन्हें 45,632 मतों से हार मिली।
अब राजभर फिर NDA में हैं। इसलिए 2027 में सवर्ण, राजभर और दूसरे गैर-यादव OBC वोटों का एक साथ आना NDA के लिए सबसे मजबूत चुनावी मॉडल हो सकता है। दूसरी ओर सपा की रणनीति इस सामाजिक गठजोड़ में सेंध लगाने पर निर्भर करेगी।
जहूराबाद विधानसभा चुनाव 2022 का पूरा गणित
2022 विधानसभा चुनाव में जहूराबाद में 4.07 लाख से अधिक मतदाता थे। ओम प्रकाश राजभर ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की।
| उम्मीदवार | पार्टी | कुल वोट | वोट प्रतिशत |
| ओम प्रकाश राजभर | सुभासपा | 1,14,860 | 46.45% |
| कालीचरण | भाजपा | 69,228 | 28.00% |
| सैय्यदा शादाब फातिमा | बसपा | 53,144 | 21.49% |
| NOTA | — | 1,834 | 0.74% |
| ज्ञान प्रकाश उर्फ मुन्ना | कांग्रेस | 1,559 | 0.63% |
| शौकत अली | AIMIM | 1,525 | 0.62% |
| अरविंद वर्मा | जदयू | 1,322 | 0.53% |
ओम प्रकाश राजभर ने कालीचरण को 45,632 मतों से हराया था। चुनाव आयोग के आधिकारिक सांख्यिकीय रिकॉर्ड में उनका वोट शेयर 46.45 प्रतिशत दर्ज है।
जहूराबाद विधानसभा चुनाव 2022 के विस्तृत नतीजे उपलब्ध हैं।
2012 से 2022 तक कैसे बदला जहूराबाद का चुनाव?
| वर्ष | विजेता | पार्टी | वोट | जीत का अंतर |
| 2022 | ओम प्रकाश राजभर | सुभासपा | 1,14,860 | 45,632 |
| 2017 | ओम प्रकाश राजभर | सुभासपा | 86,583 | 18,081 |
| 2012 | सैय्यदा शादाब फातिमा | सपा | 67,012 | 10,478 |
| 2007 | कालीचरण | बसपा | 42,654 | 17,100 |
| 2002 | कालीचरण | बसपा | 56,504 | 6,223 |
2002 और 2007 में बसपा मजबूत थी। 2012 में सपा जीती और इसके बाद 2017 से सुभासपा के ओम प्रकाश राजभर लगातार दो चुनाव जीत चुके हैं।
यानी जहूराबाद को किसी एक पार्टी की सुरक्षित सीट मानना इसके चुनावी इतिहास के साथ न्याय नहीं होगा। यहां सामाजिक समीकरण और गठबंधन बदलते ही परिणाम भी बदलता रहा है।
जहूराबाद विधानसभा सीट का इतिहास
जहूराबाद का चुनावी इतिहास छह दशक से अधिक पुराना है। 1962 में यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के रघुबीर ने जीत दर्ज की थी। बाद के परिसीमन में सीट सामान्य श्रेणी में आ गई।
1970 और 1980 के दशक में यहां वामपंथ, भारतीय क्रांति दल और कांग्रेस का असर दिखाई देता है। 1990 के दशक में मंडल और बहुजन राजनीति मजबूत होने के साथ जनता दल, बसपा और भाजपा ने जगह बनाई। 2000 के दशक की शुरुआत में बसपा का प्रभाव रहा, जबकि पिछले एक दशक में सुभासपा ने इसे अपने प्रमुख राजनीतिक गढ़ों में बदल दिया।
जहूराबाद के प्रमुख विधानसभा चुनावों का इतिहास
| वर्ष | विधायक | पार्टी |
| 1962 | रघुबीर | भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी |
| 1974 | रघुबीर | भारतीय क्रांति दल |
| 1977 | जयराम | भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी |
| 1980 | सुरेंद्र सिंह | कांग्रेस (I) |
| 1985 | सुरेंद्र | कांग्रेस |
| 1989 | वीरेंद्र सिंह | कांग्रेस |
| 1991 | सुरेंद्र सिंह | जनता दल |
| 1993 | इस्तेयाक अंसारी | बसपा |
| 1996 | गणेश | भाजपा |
| 2002 | कालीचरण | बसपा |
| 2007 | कालीचरण | बसपा |
| 2012 | सैय्यदा शादाब फातिमा | सपा |
| 2017 | ओम प्रकाश राजभर | सुभासपा |
| 2022 | ओम प्रकाश राजभर | सुभासपा |
उपलब्ध निर्वाचन रिकॉर्ड में 1962 के बाद 1974 से निरंतर चुनावी परिणाम दर्ज हैं। 1974 में रघुबीर भारतीय क्रांति दल से जीते, 1977 में CPI के जयराम और इसके बाद 1980 तथा 1985 में कांग्रेस ने सीट जीती। 1993 में बसपा के इस्तेयाक अंसारी की जीत ने जहूराबाद में बहुजन राजनीति का नया दौर शुरू किया।
ओम प्रकाश राजभर के उदय ने बदल दी सीट की राजनीति
ओम प्रकाश राजभर की राजनीतिक यात्रा जहूराबाद के जातिगत समीकरण को समझने के लिए जरूरी है। UttarPradesh.org पर उपलब्ध उनके राजनीतिक जीवन परिचय के मुताबिक वे कांशीराम से प्रभावित होकर राजनीति में सक्रिय हुए और बसपा संगठन में काम किया। 1996 में उन्हें बसपा का गाजीपुर जिलाध्यक्ष बनाया गया। बाद में बसपा से अलग होकर 27 अक्टूबर 2002 को उन्होंने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की स्थापना की।
2017 में भाजपा-सुभासपा गठबंधन ने उनकी राजनीति को बड़ा चुनावी मंच दिया। सुभासपा को मिली सीटों में से चार पर जीत हुई और ओम प्रकाश राजभर जहूराबाद से पहली बार विधायक बने। योगी आदित्यनाथ सरकार में उन्हें पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांगजन कल्याण सहित विभागों का मंत्री बनाया गया। 2019 में भाजपा से संबंध टूटने के बाद उन्होंने 2022 चुनाव में सपा के साथ गठबंधन किया और दोबारा जहूराबाद जीता।
बाद में राजभर फिर NDA में लौटे और मार्च 2024 में योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। वर्तमान सरकारी सूची में उनके पास पंचायती राज के साथ अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज विभाग हैं।
प्रदेश के सभी मौजूदा विधायकों की जानकारी यूपी विधानसभा के वर्तमान विधायकों की सूची पर और विधायकों की राजनीतिक पृष्ठभूमि यूपी विधायकों का राजनीतिक सफर पर देखी जा सकती है।
2024 लोकसभा चुनाव ने दिया अलग राजनीतिक संकेत
जहूराबाद भले ही ओम प्रकाश राजभर की विधानसभा सीट है, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सनातन पांडेय ने भाजपा के नीरज शेखर पर बढ़त बनाई।
जहूराबाद विधानसभा क्षेत्र में सनातन पांडेय को 1,05,618 वोट मिले, जबकि नीरज शेखर को 91,431 वोट मिले। यानी सपा उम्मीदवार यहां करीब 14,187 मतों से आगे रहे। बसपा उम्मीदवार लल्लन सिंह यादव को 33,667 वोट मिले।
| 2024 लोकसभा चुनाव: जहूराबाद से वोट | पार्टी | वोट |
| सनातन पांडेय | सपा | 1,05,618 |
| नीरज शेखर | भाजपा | 91,431 |
| लल्लन सिंह यादव | बसपा | 33,667 |
| सपा की बढ़त | — | 14,187 |
यह परिणाम 2027 के लिए महत्वपूर्ण है। 2022 में जिस विधानसभा क्षेत्र में ओम प्रकाश राजभर 45 हजार से अधिक वोटों से जीते थे, उसी क्षेत्र से दो साल बाद सपा के लोकसभा उम्मीदवार ने बढ़त हासिल की।
हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव की परिस्थितियां अलग होती हैं। उम्मीदवार, गठबंधन, स्थानीय मुद्दे और मतदान का व्यवहार बदल सकता है। इसलिए 2024 की बढ़त को सीधे 2027 का परिणाम नहीं माना जा सकता, लेकिन यह जरूर बताती है कि जहूराबाद में मुकाबला खुला हुआ है।
गाजीपुर Voter List 2026 से जहूराबाद को मिला नया वोटर फैक्टर
2026 की विशेष मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया ने गाजीपुर जिले के चुनावी गणित में नया तत्व जोड़ा है। अंतिम सूची के मुताबिक जिले में कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर 26,30,012 हो गई। इनमें 14,29,806 पुरुष, 12,00,171 महिला और 35 थर्ड जेंडर मतदाता हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जहूराबाद विधानसभा में 15,617 नए मतदाता जुड़े। इनमें 7,789 पुरुष और 7,828 महिला मतदाता हैं।
| जहूराबाद में 2026 में जुड़े नए मतदाता | संख्या |
| कुल नए मतदाता | 15,617 |
| पुरुष | 7,789 |
| महिला | 7,828 |
यानी नए मतदाताओं में महिलाओं की संख्या पुरुषों से 39 अधिक है। यह अंतर छोटा है, लेकिन महिलाओं और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं की बढ़ती हिस्सेदारी चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण हो सकती है।
यहां एक सावधानी जरूरी है। उपलब्ध 2026 डेटा जहूराबाद में जुड़े नए मतदाताओं की संख्या देता है, लेकिन इसी डेटा से विधानसभा क्षेत्र का अंतिम कुल मतदाता आंकड़ा निकालना संभव नहीं है, क्योंकि विधानसभा क्षेत्रवार हटाए गए नामों का आंकड़ा साथ उपलब्ध नहीं है।
गाजीपुर समेत प्रदेश की मतदाता सूचियों से जुड़े अपडेट UP Voter List 2026 सेक्शन पर देखे जा सकते हैं।
2027 में जहूराबाद का संभावित चुनावी गणित
जहूराबाद विधानसभा चुनाव 2027 का सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि 2022 में बने सामाजिक गठबंधन का कितना हिस्सा ओम प्रकाश राजभर अपने साथ NDA में ला पाते हैं।
2022 में वह सपा गठबंधन का हिस्सा थे। उस चुनाव में राजभर वोट के साथ यादव-मुस्लिम और सपा समर्थक दूसरे समुदायों का लाभ भी उन्हें मिला। 2027 में सुभासपा NDA के साथ है, इसलिए राजनीतिक समीकरण उलट चुका है।
NDA के लिए संभावित मजबूत समीकरण राजभर वोट के साथ भाजपा के सवर्ण आधार, गैर-यादव OBC, चौहान और दलित मतदाताओं के हिस्से को जोड़ना होगा।
दूसरी तरफ सपा यादव और मुस्लिम आधार के साथ PDA रणनीति के तहत दलित, राजभर और अन्य पिछड़े समुदायों में सेंध लगाने की कोशिश करेगी। 2024 लोकसभा चुनाव में जहूराबाद क्षेत्र से मिली बढ़त सपा को इसी रणनीति पर आगे बढ़ने का आधार देती है।
बसपा के लिए दलित मतदाता सबसे महत्वपूर्ण रहेंगे। यदि पार्टी अपने पुराने दलित आधार के साथ मुस्लिम या किसी प्रभावी OBC समुदाय का समर्थन जोड़ पाती है तो जहूराबाद में मुकाबला फिर त्रिकोणीय हो सकता है।
क्या केवल जातिगत समीकरण से तय होगी जहूराबाद की सीट?
जहूराबाद में जाति चुनाव का बड़ा कारक है, लेकिन अकेला कारक नहीं है। उम्मीदवार का स्थानीय प्रभाव, गठबंधन, सरकार के प्रति मतदाताओं का रुख, विकास कार्य, बेरोजगारी, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों की समस्याएं और स्थानीय संगठन की ताकत भी परिणाम बदल सकती है।
ओम प्रकाश राजभर की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत उनका अपना संगठित सामाजिक आधार और सुभासपा का पूर्वांचल में नेटवर्क है। उनके सामने चुनौती यह होगी कि राजभर वोट से आगे कितने समुदायों को वह अपने गठबंधन के पक्ष में ला पाते हैं।
2024 लोकसभा चुनाव ने यह भी बता दिया है कि वर्तमान विधायक की व्यक्तिगत ताकत और विधानसभा क्षेत्र में संसदीय चुनाव का मतदान व्यवहार अलग-अलग हो सकता है।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले टिकट वितरण सबसे महत्वपूर्ण चरण होगा। NDA, सपा और बसपा किन उम्मीदवारों पर दांव लगाते हैं, उसके बाद ही जातीय समीकरण की वास्तविक दिशा ज्यादा साफ होगी।
जहूराबाद का जातीय समीकरण: कौन सा वोट किसके लिए महत्वपूर्ण?
| वोट समूह | चुनावी महत्व |
| राजभर | सुभासपा की सबसे बड़ी ताकत, लेकिन भाजपा और अन्य दल भी सेंध लगाने की कोशिश करेंगे |
| दलित | संख्या के लिहाज से सबसे बड़े समूहों में, बसपा के साथ भाजपा-सपा की नजर |
| यादव | सपा का महत्वपूर्ण आधार |
| मुस्लिम | सपा के लिए महत्वपूर्ण, उम्मीदवार के आधार पर बसपा/AIMIM का असर संभव |
| चौहान | NDA और विपक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण गैर-यादव OBC वोट |
| राजपूत | भाजपा/NDA के लिए महत्वपूर्ण, स्थानीय उम्मीदवार का असर |
| ब्राह्मण | भाजपा का मजबूत आधार माना जाता है, लेकिन उम्मीदवार और स्थानीय समीकरण अहम |
| वैश्य | भाजपा की परंपरागत ताकत माने जाने वाले समूहों में |
| अन्य OBC | बेहद महत्वपूर्ण; करीबी चुनाव में निर्णायक भूमिका |
जहूराबाद में गठबंधन ही रहा है जीत का सबसे बड़ा फॉर्मूला
पिछले तीन चुनाव देखें तो जहूराबाद की राजनीति में जाति के साथ गठबंधन की भूमिका सबसे स्पष्ट दिखाई देती है।
2012 में सपा उम्मीदवार शादाब फातिमा ने यादव-मुस्लिम आधार और दूसरे समर्थक समूहों के सहारे जीत दर्ज की। 2017 में भाजपा और सुभासपा साथ आए तो ओम प्रकाश राजभर जीते। 2022 में सपा-सुभासपा गठबंधन बना तो राजभर की जीत का अंतर बढ़कर 45,632 पहुंच गया।
अब 2027 में सुभासपा और भाजपा एक साथ हैं, जबकि सपा अलग खेमे में है।
इसी वजह से जहूराबाद विधानसभा जातिगत समीकरण का असली सवाल केवल यह नहीं है कि किस जाति के कितने वोट हैं। बड़ा सवाल यह होगा कि कौन सा राजनीतिक गठबंधन कितने सामाजिक समूहों को एक उम्मीदवार के पीछे जोड़ पाता है।
राजभर और दलित इस सीट के दो सबसे बड़े अनुमानित सामाजिक समूह हैं। यादव-मुस्लिम वोट विपक्ष के लिए मजबूत आधार बना सकता है, जबकि चौहान, राजपूत, ब्राह्मण, वैश्य और दूसरे OBC समूह किसी भी मुकाबले में निर्णायक अंतर पैदा कर सकते हैं।
जहूराबाद की छह दशक की चुनावी यात्रा यही बताती है कि यहां मतदाता किसी एक पार्टी के साथ स्थायी रूप से नहीं बंधा है। कांग्रेस से CPI, जनता दल, बसपा, भाजपा, सपा और फिर सुभासपा तक अलग-अलग राजनीतिक धाराओं को यहां मौका मिला है। 2027 में भी उम्मीदवार, गठबंधन और जातीय गोलबंदी का सही मेल ही तय करेगा कि जहूराबाद की राजनीतिक जमीन पर किसका दावा सबसे मजबूत बनता है।
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