अंकित शर्मा मर्डर केस: दोषियों के लिए फांसी की मांग, जानिए कोर्ट में क्या-क्या दलीलें दी गईं

आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा और ताहिर हुसैन

साल 2020 के फरवरी महीने में दिल्ली में हुए दंगे के दौरान आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी. इसी मर्डर के मामले में दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में दोषी आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व निगम पार्षद और राजनेता ताहिर हुसैन समेत अन्य दोषियों की सजा पर बहस हुई हुई. इस दौरान दिल्ली पुलिस में अन्य दोषियों को सजा-ए-मौत देने की मांग की गई है. इस मामले में अदालत 31 जुलाई को फैसला सुनाएगी.

दिल्ली पुलिस ने कहा कि अंकित शर्मा की हत्या बेहद योजनाबद्ध, निर्मम और कोल्ड-ब्लडेड तरीके से की गई. ये लोग अपराध के समय कसाई बन गए थे. दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कहा कि यह एक ऐसा केस है जहां अपराधी जानवर बन गए थे. अंकित के मरने के बाद भी उसको मारा गया. उनके शरीर पर नेकर के सिवा कोई कपड़ा नहीं था. इस अपराध को माफ नहीं किया जा सकता है. सभी दोषियों को सजा-ए-मौत का फैसला सुनाना चाहिए.

ताहिर हुसैन के वकील ने मौत की सजा का विरोध किया

दिल्ली पुलिस ने कहा कि अंकित शर्मा को बुरी तरह प्रताड़ित किया गया. उनके शरीर पर 51 जख्म थे. 7 जख्म ऐसे थे जिनसे मौत हो सकती थी, 16 जख्म धारदार हथियार से किए गए थे. हथियारों का इस्तेमाल अपराध की क्रूरता को दर्शाता है. वहीं, ताहिर हुसैन के वकील ने दिल्ली पुलिस द्वारा मौत की सज़ा देने की मांग का विरोध किया है. ताहिर हुसैन ने के वकील ने बहस के दौरान कहा कि हर केस में मौत की सज़ा देना का प्रावधान नहीं है. 91 गवाहों के बयान कोर्ट ने दर्ज किए. इसके बाद 11 में से सिर्फ 6 लोगों को कोर्ट ने दोषी करार दिया गया.

अदालत ने 13 जुलाई को ताहिर समेत 6 लोगों को ठहराया था दोषी

बता दें कि साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा की हत्या मामले में अदालत ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन समेत 6 लोगों को हत्या का दोषी ठहराया था. अपने फैसले में अदालत ने कहा कि था ताहिर हुसैन हथियारों से लैस उस भीड़ का हिस्सा था जो हिंदुओं के प्रति नफरत की भावना के साथ दंगा, आगजनी और लूटपाट को अंजाम दे रही थी. इसी दौरान उसने और उसके साथियों ने अंकित शर्मा की बर्बर तरीके से हत्या कर दी.

इन धाराओं में ताहिर हुसैन को ठहराया गया दोषी

अदालत ताहिर हुसैन को IPC की धारा 302, 365 के तहत दोषी ठहराया था. इसमें किसी व्यक्ति को सीक्रेट रूप से और गलत तरीके से कैद करने के इरादे से अपहरण या अगवा करना शामिल है. वहीं, उसपर धारा 147 यानी दंगा करने की धारा, इसके अलावा धारा 148 यानी घातक हथियार से लैस होकर दंगा करने मामले में भी उसे दोषी ठहराया गया.153A दुश्मनी को बढ़ावा देने और 188 के तहत इस मामले में भी दोषी ठहराया गया. साथ ही धारा 149 के तहत यानी गैर-कानूनी भीड़ लाने के लिए भी ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया गया था.

जीतेन्द्र भाटी

जीतेन्द्र भाटी

करीब डेढ़ दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पॉलिटिक्स, क्राइम, सामाजिक और मानवीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग. BAG Films की नर्सरी से IBN7, आज़ाद न्यूज़, प्रज्ञा TV, 4 रियल न्यूज, Focus News और न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया होते हुए देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में खबरों के बीच सफर जारी.

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