Explainer: ट्रंप की धमकियों के बावजूद अमेरिका ने क्यों रोक दिए ईरान पर हमले?
Jul 27, 2026 08:24 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान
इस फैसले का सबसे मुख्य मोड़ अमरीकी सेंट्रल कमान (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर की वो गोपनीय रिपोर्ट थी, जो उन्होंने व्हाइट हाउस और रक्षा मंत्रालय को सौंपी।

ट्रंप की धमकियों के बावजूद अमेरिका ने क्यों रोक दिया ईरान पर हमला
फारस की खाड़ी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास लगातार दो हफ्तों तक चले भीषण हवाई हमलों के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को अचानक रोक दिया है। व्हाइट हाउस और पेंटागन के सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला किसी राजनयिक समझौते से ज्यादा अमेरिकी सेना और रक्षा विशेषज्ञों के आंतरिक समीक्षा के बाद लिया गया है।
खबरों के मुताबिक, इस फैसले का सबसे मुख्य मोड़ अमरीकी सेंट्रल कमान (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर की वो गोपनीय रिपोर्ट थी, जो उन्होंने व्हाइट हाउस और रक्षा मंत्रालय को सौंपी।
कूपर ने अपनी समीक्षा में स्पष्ट कहा कि दो हफ्तों की बमबारी ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर ईरानी खतरों को काफी हद तक बेअसर कर दिया है।
तय किए गए सैन्य ठिकानों की लिस्ट लगभग खत्म हो चुकी है। अब मौजूदा पैटर्न में हमले जारी रखने का कोई रणनीतिक लाभ नहीं बचा है।
एडमिरल कूपर के अनुसार, अब आगे बमबारी जारी रखने का मतलब 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत फिर से बड़े पैमाने पर पूर्ण युद्ध शुरू करना होगा, जिसकी अभी जरूरत नहीं है।
गिरता एयर-डिफेंस स्टॉक: पेंटागन की गुप्त चेतावनी
सैन्य अभियानों को रोकने के पीछे एक और बड़ी और गंभीर वजह अमेरिका के पास कम होते इंटरसेप्टर मिसाइलों के भंडार को बताया जा रहा है।
जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और राष्ट्रपति ट्रंप को निजी तौर पर चेतावनी दी थी कि अगर यह संघर्ष और ज्यादा फैला, तो एयर-डिफेंस इंटरसेप्टर्स की घटती संख्या के कारण अमेरिकी सेना और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
"शांति के बदले शांति": कूटनीति को मिला नया मौका
शुक्रवार को हुई इस सैन्य रोक के बाद दोनों देशों के बीच फिलहाल "शांति के बदले शांति" का चरण शुरू हो गया है, यानी दोनों ही पक्ष फिलहाल एक-दूसरे पर कोई नया हमला नहीं कर रहे हैं।
ईरान और ओमान के बीच लगातार बातचीत चल रही है, ताकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही फिर से बहाल की जा सके।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने NBC के शो 'मीट द प्रेस' में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कूटनीतिक बातचीत को मौका देने के लिए यह कदम उठाया है, हालांकि उनके पास "सभी विकल्प अभी भी खुले हैं।"
