Updated: Monday, August 3, 2026, 21:49 [IST]
Prashant Kishor Wife: बिहार की सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट पर जन सुराज पार्टी (JSP) संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने जीत हासिल कर ली है। उपचुनाव की मतगणना में तीन अगस्त को प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को 19 हजार से अधिक वोटों से हराकर परचम लहरा दिया। 31 साल पुराना भाजपा का किला ढहा दिया।
राजनीति में जितनी चर्चा उनकी रणनीति की होती है, उतनी ही जिज्ञासा उनकी निजी जिंदगी को लेकर भी रहती है। प्रशांत किशोर अपनी पर्सनल लाइफ को हमेशा सार्वजनिक मंचों से दूर रखते हैं। हालांकि, समय-समय पर उन्होंने स्वीकार किया है कि उनकी इस राजनीतिक यात्रा में उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास की भूमिका बेहद अहम रही है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कौन हैं उनकी पत्नी? किस जाति से हैं?
Who Is Dr. Jahnavi Das: कौन हैं डॉ. जाह्नवी दास?
प्रशांत किशोर की पत्नी डॉ. जाह्नवी दास पेशे से एमबीबीएस डॉक्टर हैं। उनका संबंध मूल रूप से असम के गुवाहाटी से है। ब्राहम्ण प्रशांत किशोर की पत्नी कायस्थ जाति से हैं। आपको बता दें कि 'दास' उपनाम असम में कई समुदायों, जैसे कायस्थ, कलिता और केवट समुदाय के लोगों द्वारा भी इस्तेमाल किया जाता है। केवल उपनाम के आधार पर किसी व्यक्ति की जाति तय नहीं की जा सकती। चुनावी शपथपत्र के अनुसार, डॉ. जाह्नवी दास नई दिल्ली स्थित अपोलो इंद्रप्रस्थ हॉस्पिटल में सीनियर एडवाइजर के पद से जुड़ी रही हैं।

Prashant Kishor Jahnavi Das Love Story: कैसे हुई पहली मुलाकात?
प्रशांत किशोर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी मुलाकात जाह्नवी दास से उस समय हुई थी, जब वे संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के एक स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े हुए थे। उस समय दोनों एक UN समर्थित पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम में काम कर रहे थे। शुरुआती बातचीत पूरी तरह कामकाज तक सीमित थी। दोनों सार्वजनिक स्वास्थ्य परियोजनाओं पर चर्चा करते थे। धीरे-धीरे यह पेशेवर रिश्ता दोस्ती में बदला और फिर दोनों एक-दूसरे के करीब आने लगे।

Prashant Kishor Jahnavi Das Marriage: प्रोफेशनल रिश्ता कैसे बना जीवनसाथी का रिश्ता?
प्रशांत किशोर के अनुसार, शुरुआत में दोनों के बीच केवल काम की बातें होती थीं। समय के साथ बातचीत का दायरा बढ़ा और दोनों ने महसूस किया कि वे जीवन भर साथ रह सकते हैं। इसके बाद प्रशांत किशोर ने अपने परिवार से इस रिश्ते की चर्चा की। परिवार की सहमति मिलने के बाद दोनों ने शादी कर ली। उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि यह शादी पूरी तरह परिवारों की सहमति से हुई थी।

Who Is Prashant Kishor Son Daibik: कौन है बेटा? परिवार को राजनीति से क्यों रखते हैं दूर?
प्रशांत किशोर हमेशा अपनी पत्नी और बेटे को सार्वजनिक जीवन से दूर रखते आए हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह जानबूझकर परिवार के बारे में ज्यादा बात नहीं करते, क्योंकि वे चाहते हैं कि राजनीति का असर उनके निजी जीवन पर न पड़े। उनका मानना है कि राजनीतिक जीवन और पारिवारिक जीवन को अलग-अलग रखना बेहतर होता है। प्रशांत किशोर और डॉ. जाह्नवी दास का एक बेटा है, जिसका नाम दैबिक (Daibik) है।

बांकेपुर जीत में पत्नी का क्या रोल?
प्रशांत किशोर कई बार सार्वजनिक मंचों पर अपनी पत्नी के योगदान की चर्चा कर चुके हैं। उनका कहना है कि अगर उनकी पत्नी घर और परिवार की जिम्मेदारियां नहीं संभालतीं, तो शायद वह राजनीति में इतना समय नहीं दे पाते। कई बार प्रशांत ने यह भी कहा है कि आज मैं राजनीति कर पा रहा हूं तो इसके पीछे मेरी पत्नी का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने मुझे घर-परिवार की हर जिम्मेदारी से मुक्त रखा। कभी समय न देने की शिकायत नहीं की।
पहली बार जनता के सामने कब आईं?
आपको बता दें कि, 25 अगस्त 2024 को पटना में आयोजित एक महिला सम्मेलन के दौरान प्रशांत किशोर ने पहली बार अपनी पत्नी को सार्वजनिक मंच पर लोगों से परिचित कराया। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी ने परिवार को प्राथमिकता दी और उनके राजनीतिक जीवन को आसान बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी कहा कि घर की पूरी जिम्मेदारी जाह्नवी ने संभाली, जिससे वह लगातार बिहार में जन सुराज अभियान चला सके।
अब बात करते हैं कि बांकीपुर में प्रशांत की जीत में पत्नी की जाति का क्या रोल?
बांकीपुर विधानसभा सीट को बिहार की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में गिना जाता है। यहां लगभग 14 प्रतिशत कायस्थ मतदाता हैं, जो सबसे बड़ा सामाजिक समूह माना जाता है। चूंकि, प्रशांत की पत्नी डॉ. जाह्नवी दास गुवाहटी के कायस्थ जाति से हैं, तो माना जा सकता है कि पत्नी के गोल्डन चाम ने बांकीपुर की जीत को मुक्कमल कराया।
बांकीपुर में जाति समीकरण समझें...
- कायस्थ: लगभग 14%
- मुस्लिम : लगभग 14%
- यादव : लगभग 12%
- वैश्य : लगभग 9%
- चंद्रवंशी : लगभग 9%
- दलित-महादलित : लगभग 8%
- भूमिहार : लगभग 8%
- ब्राह्मण : लगभग 7%
- राजपूत : लगभग 7%
- कुर्मी : लगभग 5%
- कुशवाहा : लगभग 3%
इन्हीं सामाजिक समीकरणों के कारण यह सीट वर्षों तक भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही। लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को यहां 58 प्रतिशत से अधिक वोट मिले थे। हालांकि, इस उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने अपनी राजनीतिक रणनीति, जनसंपर्क और स्थानीय मुद्दों के सहारे भाजपा की परंपरागत बढ़त को चुनौती दी और 31 वर्षों का चुनावी इतिहास बदल दिया।