Time Published: Sunday, October 18, 2026, 22:35 [IST]

Punjab Sangrur Hit-and-Run: पंजाब के संगरूर जिले में रविवार, 18 अक्टूबर को एक दर्दनाक सड़क हादसे में आठ मजदूरों की मौत हो गई। इनमें सात महिलाएं शामिल हैं। हादसा लेहरागागा क्षेत्र में चोतियां गांव के पास जाखल रोड पर हुआ, जहां सड़क किनारे काम कर रहे मनरेगा मजदूरों के समूह में एक तेज रफ्तार कार जा घुसी। कई अन्य मजदूर घायल हुए हैं।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कार अनियंत्रित होकर 20 से अधिक मजदूरों की ओर बढ़ी और उन्हें टक्कर मार दी। हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो गया। जानकारी के अनुसार, कार शेवरले ऑप्ट्रा मैग्नम थी और उसके चालक की पहचान रायधराना गांव के निवासी परगत सिंह उर्फ काला के रूप में बताई गई है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कौन है आरोपी?

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कैसे हुआ हादसा?

यह दुर्घटना लेहरागागा इलाके में चोतियां गांव के पास जाखल रोड पर हुई। बताया गया कि करीब 23 मजदूर सड़क किनारे काम कर रहे थे। इनमें महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तेज रफ्तार कार अचानक मजदूरों के समूह की ओर मुड़ गई। चालक गाड़ी पर नियंत्रण कर पाता, उससे पहले ही कई मजदूर उसकी चपेट में आ गए। टक्कर इतनी गंभीर थी कि कुछ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास के लोग घायलों की मदद के लिए पहुंचे और उन्हें अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की।

मृतकों में कौन-कौन शामिल?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसे में जान गंवाने वाले आठ मजदूरों में छह महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। बताया गया है कि मृतकों में से सात अलीशेर गांव के रहने वाले थे।

  • महिला मजदूर: कर्मजीत कौर, निक्की, सरबजीत कौर, रणजीत कौर, कर्मजीत और रानी कौर।
  • पुरुष मजदूर: जीवन सिंह और देश राज।

मृतक के परिवार को 2-2 लाख रु का ऐलान

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने संगरूर के अलीशेर गांव में हुए भीषण सड़क हादसे की खबर दुख जताया है। कहा कि इस हादसे में मनरेगा (MGNREGA) कर्मियों समेत 8 लोगों की जान जाना एक बहुत बड़ा नुकसान है। सरकार मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये का मुआवजा देगी, और घायलों का पूरा इलाज भी पंजाब सरकार की ओर से बिल्कुल मुफ्त कराया जाएगा। फरार ड्राइवर को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कार चालक कौन है और क्या वह पकड़ा गया?

रिपोर्टों में कार चालक की पहचान रायधराना गांव के परगत सिंह उर्फ काला के रूप में बताई गई है। आरोप है कि मजदूरों को टक्कर मारने के बाद वह मौके से भाग गया। फिलहाल, उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, कार अनियंत्रित कैसे हुई और चालक के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।

'एंबुलेंस की देरी से हुई मौतें', प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या-क्या बताया?

पास की एक फैक्ट्री में काम करने वाले हरविंदर सिंह ने बताया कि हादसे की जानकारी मिलने पर वह घटनास्थल पर पहुंचे। उनके मुताबिक, वहां का दृश्य बेहद भयावह था और कई मजदूर गंभीर रूप से घायल थे। एक प्रत्यक्षदर्शी ने आरोप लगाया कि एंबुलेंस घटनास्थल पर पहुंचने में काफी देर हुई। एक अन्य गवाह ने भी चिकित्सा सहायता में देरी का दावा किया। प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर एंबुलेंस के पहुंचने में देरी और घायलों को समय पर इलाज मिलने से जुड़े सवाल उठे हैं।

अस्पताल में घायलों का इलाज

संगरूर के सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. विनोद कुमार के मुताबिक, हादसा दोपहर करीब 3:30 बजे हुआ। उन्होंने बताया कि अस्पताल में आठ लोगों को लाया गया था, जिनमें से एक व्यक्ति की अस्पताल पहुंचने तक मौत हो चुकी थी। डॉ. कुमार के अनुसार, पांच घायलों की हालत स्थिर थी, जबकि दो लोगों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल भेजा गया।

मजदूरों ने किया प्रदर्शन, मुआवजे की मांग

हादसे के बाद घटनास्थल पर मजदूरों और ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। पंजाब के कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक बरिंदर कुमार गोयल ने हादसे पर दुख जताया और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। पंजाब कांग्रेस के नेता अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी घटना को दिल दहला देने वाला बताया। उन्होंने प्रशासन से घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और मृतकों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की।

मनरेगा मजदूर कौन होते हैं?

मनरेगा यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने से जुड़ी योजना है। इसके तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को निर्धारित शर्तों के अनुसार अकुशल शारीरिक श्रम का रोजगार मांगने का अधिकार मिलता है। इस हादसे में सड़क किनारे काम कर रहे मजदूरों की मौत ने कार्यस्थल की सुरक्षा, सड़क पर काम के दौरान यातायात नियंत्रण और दुर्घटना के बाद समय पर चिकित्सा सहायता जैसे मुद्दों पर सवाल खड़े किए हैं।