नई दिल्ली(उत्तम हिन्दू न्यूज): किसी दिव्यांगजन को नौकरी की जरूरत हो, व्हीलचेयर की तलाश हो, कौशल प्रशिक्षण चाहिए या किसी सरकारी योजना और सेवा तक पहुँच बनानी हो—और दूसरी ओर उसी क्षेत्र में कोई संस्था वह अवसर या सहायता उपलब्ध करा रही हो—तो दोनों के बीच जुड़ाव का अभाव अब बाधा नहीं बनेगा। इसी सोच को साकार करने की दिशा में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD), सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, आर्टिफिशियल लिम्ब्स मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (ALIMCO) और EkStep Foundation, बेंगलुरु ने आज नई दिल्ली में Purple Dots – UBI (Unified Benefits Interface) Initiative के डिजाइन, विकास, क्रियान्वयन और विस्तार के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

DEPwD द्वारा परिकल्पित Purple Dots पहल का उद्देश्य दिव्यांगता समावेशन की एक महत्वपूर्ण चुनौती का समाधान करना है—केवल सेवाओं, योजनाओं और अवसरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना ही पर्याप्त नहीं है; यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि जरूरतमंद व्यक्ति को सही समय पर, सही स्थान पर और अपनी जरूरत के अनुरूप उपलब्ध अवसर या सहायता की जानकारी मिल सके। इसी उद्देश्य से ‘Purple Dot’ एक सरल डिजिटल प्रोफाइल के रूप में काम करेगा, जिसके माध्यम से कोई दिव्यांगजन अपने बारे में और अपनी जरूरतों के बारे में जानकारी साझा कर सकेगा—चाहे उसे रोजगार, व्हीलचेयर जैसी सहायक तकनीक, कौशल विकास, प्रशिक्षण अथवा किसी अन्य सहायता की आवश्यकता हो। इसी प्रकार नियोक्ता, सेवा प्रदाता, गैर-सरकारी संगठन (NGOs), परोपकारी संस्थाएं और अन्य संस्थान अपने ‘Dots’ के माध्यम से उपलब्ध रोजगार, सेवाओं, संसाधनों और अवसरों की जानकारी साझा कर सकेंगे।

इन दोनों प्रकार के ‘Dots’ को एक खुले और इंटरऑपरेबल डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर से जोड़कर Purple Dots एक ऐसा जीवंत डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करने की परिकल्पना करता है, जहाँ जरूरत और अवसर एक-दूसरे को स्थानीय स्तर पर खोज सकें और आपस में जुड़ सकें। ओपन डिजिटल प्रोटोकॉल के माध्यम से संबंधित संस्थाएं चिन्हित जरूरतों पर वास्तविक समय में प्रतिक्रिया भी दे सकेंगी। इससे दिव्यांगजनों के लिए सेवाओं और अवसरों तक पहुँच को बिखरी हुई और कठिन प्रक्रिया से निकालकर अधिक सहज, त्वरित और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

MoU Purple Dots – UBI Initiative को अवधारणा से क्रियान्वयन और व्यापक स्तर पर विस्तार तक ले जाने के लिए एक संस्थागत सहयोगात्मक ढांचा प्रदान करता है। इसके माध्यम से दिव्यांगजन सरकारी योजनाओं एवं पात्रताओं, सेवाओं, रोजगार के अवसरों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सहायक उपकरणों और अन्य सहायता प्रणालियों से जुड़ सकेंगे। साथ ही सरकारी विभागों, निजी क्षेत्र, सिविल सोसाइटी संगठनों, NGOs, परोपकारी संस्थाओं और अन्य हितधारकों के लिए भी दिव्यांगजनों तक अपनी सेवाओं और अवसरों को अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचाने का माध्यम तैयार होगा।

यह पहल डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से पहुंच और समावेशन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अलग-अलग योजनाओं या संस्थाओं के लिए अलग-अलग डिजिटल प्रणालियां बनाने के बजाय Purple Dots एक ऐसे इंटरऑपरेबल ढांचे की परिकल्पना करता है, जिसमें दिव्यांगता क्षेत्र के विभिन्न हितधारक एक-दूसरे से जुड़ सकें और पहले से उपलब्ध सेवाओं एवं अवसरों की दृश्यता तथा पहुँच को बेहतर बनाया जा सके।

बड़े पैमाने पर सामाजिक परिवर्तन के लिए Digital Public Infrastructure और Digital Public Goods की संकल्पना एवं संरचना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली EkStep Foundation, DEPwD और ALIMCO के साथ मिलकर इस अनुभव को दिव्यांगता क्षेत्र में ला रही है। यह साझेदारी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सेवाओं, संस्थाओं और सहायता प्रणालियों को आपस में जोड़ने तथा दिव्यांगजनों को उनके लिए प्रासंगिक अवसरों और सेवाओं से जोड़ने की क्षमता को मजबूत करने का प्रयास है।

यह सहयोग DEPwD के नीतिगत दायित्व और देशव्यापी पहुँच, ALIMCO के दिव्यांगता क्षेत्र में अनुभव एवं क्षमताओं तथा EkStep Foundation की बड़े पैमाने पर खुले और सहयोगात्मक डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करने की विशेषज्ञता को एक मंच पर लाता है। इसका साझा उद्देश्य देश के विभिन्न जिलों में दिव्यांगजनों के लिए सहायता, सेवाओं और अवसरों को अधिक सुलभ, अधिक दृश्यमान, अधिक स्थानीय और बेहतर तरीके से आपस में जुड़ा हुआ बनाना है।

MoU हस्ताक्षर समारोह में DEPwD की अपर सचिव सुश्री मनमीत कौर नंदा, निदेशक श्री आशीष ठाकरे, निदेशक श्री प्रदीप ए. तथा अवर सचिव श्री संदीप कुमार उपस्थित रहे। ALIMCO की ओर से सहायक प्रबंधक श्री पंकज द्विवेदी तथा सहायक प्रबंधक सुश्री प्रिया ग्रोवर उपस्थित थीं। EkStep Foundation, बेंगलुरु की ओर से निदेशक श्री इकप्रीत सिंह, श्री गौरव गुप्ता उपस्थित रहे।

Purple Dots Initiative एक ऐसे समावेशी डिजिटल भविष्य की दिशा में कदम है, जहाँ किसी दिव्यांगजन की जरूरत अनदेखी न रहे और कोई उपलब्ध अवसर अनजाना न रह जाए। इसका लक्ष्य केवल लोगों को डिजिटल रूप से जोड़ना नहीं, बल्कि जरूरत को अवसर से और अवसर को जरूरतमंद व्यक्ति से जोड़कर उसे स्थानीय स्तर तक पहुँचाना है—ताकि समावेशन का लाभ कागज पर नहीं, बल्कि व्यक्ति के जीवन में दिखाई दे।

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