हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने चौपाल विधानसभा क्षेत्र के अपने आधिकारिक दौरे के दौरान लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। विकास कार्यों के निरीक्षण के समय संबंधित अधिकार

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फोन पर मिला असंतोषजनक जवाब, अब देना होगा लिखित स्पष्टीकरण

जानकारी के अनुसार, जब कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह चौपाल क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों का धरातल पर निरीक्षण कर रहे थे, तब संबंधित PWD अधिकारी वहां मौजूद नहीं थे। मंत्री ने इस लापरवाही पर तुरंत संज्ञान लिया और मौके से ही फोन कर अधिकारी से फील्ड में गैरहाजिर रहने का कारण पूछा।

सूत्रों के मुताबिक, फोन पर अधिकारी द्वारा दिया गया तर्क मंत्री को बिल्कुल रास नहीं आया और वे उसके जवाब से असंतुष्ट दिखे। इसके तुरंत बाद उन्होंने लोक निर्माण विभाग के उच्च अधिकारियों को आदेश जारी किए कि संबंधित अधिकारी से इस लापरवाही के लिए लिखित स्पष्टीकरण (शो-कॉज नोटिस) लिया जाए। अधिकारी को अब आधिकारिक तौर पर यह लिखित जवाब देना होगा कि मंत्री के तय निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान वह ड्यूटी से क्यों अनुपस्थित थे।

"लापरवाही बर्दाश्त नहीं, तय होगी जिम्मेदारी"

मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने इस घटना के बाद अपनी और सरकार की प्राथमिकता साफ करते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि जनहित और जनभावनाओं से जुड़े विकास कार्यों के निरीक्षण के समय संबंधित फील्ड अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित होना बेहद जरूरी है। सरकारी कार्यों और जनता की योजनाओं में किसी भी तरह की ढिलाई, लापरवाही या उदासीनता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी अधिकारियों को अपने तय दायित्वों का पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ पालन करना होगा।"

हो सकती है विभागीय कार्रवाई, फील्ड स्टाफ में हड़कंप

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विभाग को जैसे ही अधिकारी का लिखित स्पष्टीकरण प्राप्त होगा, उसकी उच्च स्तर पर समीक्षा की जाएगी। यदि अधिकारी का जवाब संतोषजनक और ठोस नहीं पाया गया, तो सेवा नियमों (Service Rules) के तहत उसके खिलाफ सख्त विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।

इस घटना के बाद लोक निर्माण विभाग के भीतर हड़कंप मच गया है। आने वाले दिनों में वीआईपी दौरों, सरकारी दौरों और फील्ड निरीक्षण के दौरान अधिकारियों व कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए नियमों को और अधिक सख्ती से लागू किए जाने की संभावना है।