By Oneindia Staff
Updated: Wednesday, July 29, 2026, 10:50 [IST]
अदानी पोर्टफोलियो (Adani Portfolio) का हिस्सा और दुनिया की नौवीं सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी, अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड (Ambuja Cements Limited) ने 30 जून, 2026 को समाप्त हुई पहली तिमाही के लिए मजबूत वित्तीय नतीजों की घोषणा की है। कंपनी का ऑपरेटिंग EBITDA (Operating EBITDA) प्रति टन तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर 27% की बढ़त के साथ ₹931 हो गया है।
कंपनी ने इस तिमाही में 17.1 मिलियन टन की बिक्री दर्ज की। इसमें ट्रेड शेयर (trade share) सालाना आधार पर 4 प्रतिशत अंक बढ़कर 78% हो गया, जबकि प्रीमियम उत्पादों की हिस्सेदारी 1 प्रतिशत अंक बढ़कर 34% पहुँच गई। पहली तिमाही में कंपनी का राजस्व (Quarterly revenue) ₹9,500 करोड़ रहा, जबकि ऑपरेटिंग EBITDA ₹1,589 करोड़ रहा। इस दौरान EBITDA मार्जिन क्रमिक (sequential) आधार पर 3.3 प्रतिशत अंक बढ़कर 16.7% दर्ज किया गया।
क्लिंकर फैक्टर (clinker factor) में सालाना आधार पर 2.1 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ और यह 63.7% पर आ गया। समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी का कर-पश्चात लाभ (PAT) ₹660 करोड़ रहा, जबकि प्रति शेयर आय (Diluted EPS) ₹2.32 रही।
सफलता वैल्यू-लेड ग्रोथ के बल पर - अंबुजा प्रबंधन
अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड के होल-टाइम डायरेक्टर और सीईओ विनोद बाहेती (Vinod Bahety) ने कहा कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY'27) की शुरुआत मजबूत गति के साथ की है। यह सफलता वैल्यू-लेड ग्रोथ (value-led growth), प्रीमियम उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करने और अनुशासित क्रियान्वयन के बल पर हासिल हुई है। उन्होंने कहा कि ट्रेड सेल्स में बढ़ोतरी और प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती हिस्सेदारी ने कंपनी के मार्केट मिक्स को मजबूत किया है, जिससे मुनाफा और आय की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
बाहेती ने बताया कि पश्चिम एशिया (West Asia) में भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न अस्थायी चुनौतियों के बावजूद, कंपनी ने बेहतर परिचालन दक्षता (operational excellence), ऊर्जा दक्षता में सुधार, कम क्लिंकर फैक्टर और अनुशासित लागत प्रबंधन के जरिए लागत में प्रति टन ₹206 की कमी हासिल की है। इसके परिणामस्वरूप EBITDA मार्जिन में तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 331 बेसिस पॉइंट्स का विस्तार देखने को मिला।
भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कंपनी FY'27 के अंत तक अपनी क्षमता बढ़ाकर 119 MTPA करने के लक्ष्य पर तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके तहत दहेज (Dahej), सलाई बनवा (Salai Banwa), भटिंडा (Bathinda), जोधपुर (Jodhpur), कलंबोली (Kalamboli) और वारिसलीगंज (Warisaliganj) में नई इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। कंपनी चालू वित्त वर्ष के अंत तक ₹4,250 प्रति टन के लक्षित लागत आंकड़े को हासिल करने के लिए प्रति टन लगभग ₹250 की अतिरिक्त लागत कटौती का लक्ष्य रख रही है।
कंपनी करेगी क्षमता विस्तार
30 जून, 2026 तक अंबुजा सीमेंट्स की कुल सीमेंट क्षमता 109 MTPA थी। वर्तमान में दहेज (1.2 MTPA), सलाई बनवा (2.4 MTPA), भटिंडा (1.2 MTPA) और जोधपुर (2 MTPA) में ट्रायल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है, जबकि कलंबोली (1 MTPA) और वारिसलीगंज (2.4 MTPA) में दूसरी तिमाही के दौरान ट्रायल शुरू होगा। इसके अलावा, मराठा क्लिंकर लाइन (4 MTPA) के 2027 में चालू होने की उम्मीद है।
बैलेंस शीट और क्रेडिट रेटिंग दमदार
कंपनी ने अपनी कर्ज-मुक्त (debt-free) बैलेंस शीट को बनाए रखा है। वर्तमान में कंपनी की नेटवर्थ ₹71,954 करोड़ है और उसके पास ₹844 करोड़ का कैश एवं कैश इक्विवेलेंट मौजूद है। रेटिंग एजेंसियों CRISIL और CARE की ओर से कंपनी को सर्वोच्च 'AAA' और 'A1+' क्रेडिट रेटिंग प्राप्त है।
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सस्टेनेबिलिटी और ESG पहल
अंबुजा सीमेंट्स ने इस तिमाही के दौरान अपनी अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) क्षमता में 75 MW की बढ़ोतरी की, जिससे कुल क्षमता बढ़कर 973 MW हो गई है। इसके साथ ही हरित ऊर्जा (green power) की हिस्सेदारी बढ़कर 34% हो गई है। कंपनी ने कम कार्बन वाले सीमेंट उत्पादन के लिए यूके स्थित लीलाकि लिमिटेड (Leilac Limited) के साथ साझेदारी की है, जो विज्ञान-आधारित लक्ष्य पहल (SBTi) के तहत वर्ष 2050 तक नेट-ज़ीरो (Net Zero) लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा।
इसके अलावा, अंबुजा सीमेंट्स और एसीसी (ACC) को उनके ब्लेंडेड सीमेंट पोर्टफोलियो के लिए CII द्वारा GreenPro प्रमाणन प्रदान किया गया है। साथ ही, नए लॉन्च किए गए 'Buildcem' और 'Buildcem Pro' उत्पादों सहित पूरी ब्लेंडेड सीमेंट रेंज को GRIHA प्रमाणन प्राप्त हुआ है। कंपनी ने इस तिमाही में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपनी डिजिटल BRSR रिपोर्ट भी जारी की है।
उद्योग जगत का परिदृश्य
कंपनी ने उल्लेख किया कि आयातित ईंधन जैसे पेटकोक और थर्मल कोयले की ऊंची कीमतों के साथ-साथ पश्चिम एशिया संकट के कारण माल भाड़े और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत की वजह से भारतीय सीमेंट क्षेत्र को इस तिमाही में लागत के दबाव का सामना करना पड़ा है। 60-90 दिनों के ईंधन इन्वेंट्री चक्र को देखते हुए, चरम ईंधन लागत मुद्रास्फीति (peak fuel cost inflation) का प्रभाव दूसरी तिमाही (Q2) में देखने को मिल सकता है, जो मौसमी रूप से सुस्त तिमाही मानी जाती है।
हालाँकि, भारत के आर्थिक बुनियादी ढाँचे मजबूत बने हुए हैं, जहाँ FY'26 में जीडीपी विकास दर 7.7% रही है। वहीं FY'27 में सीमेंट मांग लगभग 5% के आसपास रहने की संभावना है। कंपनी का मानना है कि अपने मजबूत ब्रांड पोर्टफोलियो, रेडी-मिक्स कंक्रीट के विस्तार, प्रीमियम रणनीति और लागत नेतृत्व के बल पर वह उद्योग की औसत वृद्धि दर से बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह तैयार है।