Updated On: Jul 26, 2026 | 09:12 AM IST

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सार

Railway Bedsheet: भारतीय रेलवे ने एसी कोच में यात्रियों को साफ चादरें देने के लिए नया पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। अब रेलवे की लॉन्ड्री में एआई कैमरा चादरों और तकियों के दाग पहचानेगा।

Railway Bedsheet: Indian Railways Starts AI Camera Pilot For Clean Bedsheets In Three Divisions 

स्लीपर कोच (सोर्स-सोशल मीडिया)

विस्तार

Indian Railways Starts AI Camera Pilot For Clean Railway Bedsheet: भारतीय रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों को अक्सर ट्रेनों में गंदे और दागदार बेडरोल मिलने की काफी शिकायतें रहती हैं। रेल मंत्रालय ने यात्रियों की इस बड़ी परेशानी को दूर करने और उन्हें हमेशा साफ लिनन देने के लिए एक नया पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। रेलवे ने एसी कोच में सफर करने वाले पैसेंजर्स को दिए जाने वाले बेड लिनन की क्वालिटी और स्वच्छता बेहतर बनाने के लिए यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित आधुनिक तकनीक पेश की है।

फिलहाल यह खास और बेहतरीन सुविधा सिर्फ तीन रेल डिवीजनों में ही शुरू की गई है, जिसके पूरी तरह सफल होने पर इसे बहुत जल्द देश के अन्य सभी डिवीजनों में भी लागू किया जाएगा। इस शानदार पहल को सेंट्रल रेलवे के पुणे डिवीजन और नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे के जयपुर और जोधपुर डिवीजन की मशीनीकृत रेलवे लॉन्ड्री में सबसे पहले शुरू किया गया है। देश के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद को बताया कि इस खास प्रोग्राम में AI इनेबल्ड कैमरा सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है।

ये स्मार्ट कैमरे धुले हुए बेड लिनन पर लगे छोटे से छोटे दागों की खुद-ब-खुद बहुत आसानी से पहचान कर लेते हैं जिससे जांच की प्रक्रिया काफी तेज होती है। रेलवे को पूरी उम्मीद है कि इस नई टेक्नोलॉजी से क्वालिटी की जांच ज्यादा सटीक होगी और कर्मचारियों पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी।

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AI कैमरा कैसे करेगा काम

AI सिस्टम धुले हुए सामान को पैक करने और मुसाफिरों के इस्तेमाल के लिए भेजने से ठीक पहले बहुत ही बारीकी से स्कैन करता है। दाग वाले या मशीन से ठीक से साफ न हुए लिनन की पहचान करके यह आधुनिक तकनीक सुनिश्चित करती है कि एसी कोच के यात्रियों तक सिर्फ एकदम साफ और हाइजीनिक बेडरोल ही पहुंचे। इस नई एआई आधारित तकनीक से हजारों यात्रियों का सफर हर दिन अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और पहले से काफी ज्यादा आरामदायक हो सकेगा।

AC बेडरोल और लॉन्ड्री प्रक्रिया

भारतीय रेलवे की तरफ से AC कोच में दिए जाने वाले हर स्टैंडर्ड बेडरोल में मुख्य रूप से 2 बेड शीट, एक तकिए का कवर और एक हाथ पोंछने वाला साफ तौलिया होता है। एक चादर को कंबल के बिल्कुल नीचे बिछाई जाती है ताकि पैसेंजर्स और कंबल के बीच साफ-सफाई की एक एडिशनल लेयर हमेशा बरकरार रहे। रेलवे अपनी मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री में धुले हुए लिनन की सफाई की बारीकी से जांच के लिए आधुनिक ‘व्हाइटनेस मीटर’ का भी पूरा इस्तेमाल करता है। इसके अलावा लॉन्ड्री में लगाए गए बेहतरीन सीसीटीवी कैमरे धुलाई और हैंडलिंग के सभी कामों पर लगातार चौबीसों घंटे अपनी पैनी नजर रखते हैं।

कब बदले जाते हैं पुराने लिनन

भारतीय रेलवे का विशाल नेटवर्क लिनन को समय पर बदलने की अपनी एक तय पॉलिसी का भी बहुत ही सख्ती के साथ हर हाल में पालन करता है। तकिए के कवर और हाथ पोंछने वाले छोटे तौलिये आमतौर पर 9 महीने के लगातार इस्तेमाल के बाद पूरी तरह से बदल दिए जाते हैं और उनकी जगह नए दिए जाते हैं। वहीं यात्रियों को दी जाने वाली बेड शीट उनके कपड़े के टाइप और वर्तमान हालत के आधार पर 12 से 24 महीने तक ही इस्तेमाल की जाती हैं। रेलवे के कड़े मेंटेनेंस स्टैंडर्ड को सही से फॉलो करने और यात्रियों को बेहतरीन सेवा देने के लिए यह प्रक्रिया अपनाना बहुत जरूरी है।

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स्टेशनों पर सीसीटीवी और सुरक्षा

इस AI पहल के अलावा रेलवे ने कामाख्या और हावड़ा के बीच चलने वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में एसी यात्रियों के लिए विशेष कंबल कवर का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। इसके साथ ही भारत सरकार ने देश भर के 3,215 बड़े और छोटे रेलवे स्टेशनों पर आधुनिक सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम लगाने का एक बहुत बड़ा ऐलान किया है।

इसके अलावा यात्रियों की पूरी सुरक्षा पुख्ता करने के लिए 13,409 पैसेंजर कोच में भी उच्च स्तर की सिक्योरिटी व्यवस्था को काफी ज्यादा टाइट किया जा रहा है। यह ऑटोमेटेड इंस्पेक्शन तकनीक आने वाले समय में लाखों पैसेंजर्स के लिए रेल ट्रैवल की क्वालिटी को बहुत ही ज्यादा बेहतर और सुरक्षित बनाएगी।

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