Raipur Liquor Coal levy Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी, कस्टम मिलिंग और शराब घोटाले के आरोपी रामगोपाल अग्रवाल को कोर्ट से राहत नहीं मिली है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की मांग पर विशेष अदालत ने रामगोपाल की रिमांड 22 जुलाई तक बढ़ा दी है। मामले में शुक्रवार को कोर्ट में सुनवाई हुई।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को रायपुर की विशेष अदालत में रामगोपाल अग्रवाल की पेशी हुई। इस दौरान EOW ने पूछताछ के लिए पांच दिन की अतिरिक्त पुलिस रिमांड के लिए आवेदन किया, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। यानी अब 22 जुलाई को फिर कोर्ट में पेश किया जाएगा।
हवाला के जरिए रकम दिल्ली भेजी जाती थी
EOW का यह भी दावा है कि इस फंड की एंट्री और उसका मैनेजमेंट रामगोपाल अग्रवाल के द्वारा किया जाता था। एजेंसी के मुताबिक, यह राशि बोरी और कार्टन में भरकर कांग्रेस भवन लाई जाती थी, जिसके बाद हवाला नेटवर्क के जरिए दिल्ली भेजी जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि रामगोपाल अग्रवाल तीन साल तक फरार रहे। इस दौरान वे ओडिशा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना समेत 8 राज्यों में रहे। इस दौरान उन्होंने पुरी, वाराणसी और प्रयागराज जैसे धार्मिक स्थलों पर दर्शन किए और विशेष पूजा भी कराई।
कांग्रेस भवन पहुंचती थी घोटाले की राशि
EOW ने कोर्ट में पेश दस्तावेजों में बताया कि कांग्रेस के अकाउंटेंट और रामगोपाल अग्रवाल के निजी सहायक देवेंद्र डड़सेना ने अपने बयान में कहा कि कथित कोल-लेवी घोटाले की राशि कांग्रेस भवन पहुंचती थी। वहां पर इस राशि का नियंत्रण रामगोपाल अग्रवाल के पास रहता था।
52 करोड़ से ज्यादा सीधे रामगोपाल के पास पहुंचे
जांच एजेंसी के अनुसार, कोल लेवी से 52 करोड़ 62 लाख 20 हजार रुपए सीधे रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचे। EOW का दावा है कि इस राशि को लेने, संभालने और इस्तेमाल करने का काम रामगोपाल अग्रवाल ने किया।
कारोबारियों ने पैसा देने की बात स्वीकारी
जांच एजेंसी के मुताबिक, भिलाई के बिजनेसमैन लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू ने बयान में कहा कि दीपेन चावड़ा के माध्यम से लगभग 800 करोड़ रुपए कांग्रेस भवन भेजे गए। वहीं, निखिल चंद्राकर ने भी अपने बयान में कोल लेवी की राशि रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचने की बात स्वीकार की है।
तीन साल रामगोपाल 8 राज्यों में रहे, मंदिरों में की पूजा
शुरुआती पूछताछ में रामगोपाल अग्रवाल ने बताया कि रायपुर छोड़ने के बाद वे ओडिशा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, मध्यप्रदेश और दिल्ली समेत 8 राज्यों में रहे।
इस दौरान रामगोपाल ने पुरी, वाराणसी और प्रयागराज जैसे धार्मिक स्थलों पर दर्शन किए और विशेष पूजा भी कराई। जांच एजेंसी का कहना है कि तीन साल फरारी के दौरान भी वे परिवार, कुछ नेताओं और कारोबारियों के संपर्क में लगातार बने रहे।
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कैसे खुला मामला ?
EOW के अनुसार, 30 जून 2022 को कोल कारोबारी सूर्यकांत तिवारी और उसके सिंडिकेट पर आयकर विभाग की छापेमारी से मामले का खुलासा हुआ है। बताते हैं एजेंसी को छापेमारी में मिली डायरी और दस्तावेजों से अवैध कोल लेवी के लेन-देन की डिटेल हाथ लगी।
इन्हीं दस्तावेजों में रामगोपाल अग्रवाल का नाम सामने आया। बाद में ED की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने एफआईआर कर जांच शुरू की। तीन साल तक गायब रहने के बाद रामगोपाल ने 8 जुलाई 2026 को सरेंडर कर दिया। 9 जुलाई को उन्हें स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया।
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