Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का त्योहार हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाया जाता है. इस त्योहार को भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व माना जाता है. पर क्या आप जानते हैं रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है और इसका धार्मिक महत्व क्या है?
Published byNamrata Mohanty
Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का त्योहार हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाया जाता है. इस त्योहार को भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व माना जाता है. पर क्या आप जानते हैं रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है और इसका धार्मिक महत्व क्या है?
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Raksha Bandhan 2026 ( Photograph: (AI GENERATED)
Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन सनातन धर्म का प्रमुख त्योहार है. हिंदू धर्म में रक्षा और रक्षासूत्र को खास महत्व होता है. यह त्योहार भी रक्षा से ही जुड़ा हुआ है. इसमें बहन अपने भाई की कलाई में राखी बांधती है और उसकी लंबी आयु और अच्छे जीवन की कामना करती है. वहीं, भाई अपनी बहन को जीवनभर रक्षा करने का वरदान देता है. इस साल 28 अगस्त 2026 को शुक्रवार के दिन रक्षाबंधन मनाया जाएगा. पौराणिक कथाओं के अनुसार, रक्षासूत्र एक धागा होता है, जो सुरक्षा और प्रेम का प्रतीक माना जाता है. इस त्योहार की अपनी मूल जड़े हैं, जो पौराणिक और धार्मिक मानी जाती है.
रक्षाबंधन का अर्थ क्या है?
'रक्षाबंधन' इस शब्द का अर्थ दो शब्दों से मिलकर बनता है रक्षा और बंधन. इसलिए, इसका मतलब होता है ऐसा बंधन जो रक्षा और सुरक्षा का भाव दें. पंचांग के अनुसार, रक्षाबंधन का त्योहार सावन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. इस वजह से इसे कई जगह इसे राखी पूर्णिमा भी कहते हैं. इस दिन राखी बांधने के साथ बहने भाई को तिलक भी करती है. हालांकि, आज के समय में रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहनों का प्रमुख त्योहार बन गया है लेकिन कई धार्मिक परंपरां में रक्षा सूत्र का महत्व अलग भी है.
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रक्षाबंधन की शुरुआत कैसे हुई थी?
रक्षाबंधन की शुरुआत को लेकर कोई निश्चित तारीख या घटना नहीं बताई गई है. इसके पीछे कई धार्मिक कथाएं और लोक कथाएं हैं. इन कथाओं ने समय के साथ इस त्योहार को मजबूती प्रदान की है. इनमें भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कथा भी काफी प्रसिद्ध मानी जाती है. इस कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण की उंगली में चोट लगी थी. इस वजह से खून बहना लगा था, इस रक्त रिसाव को रोकने के लिए द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर श्रीकृष्ण के हाथों में बांधी थी. द्रौपदी के इस स्नेह और समर्पण से भगवान कृष्ण भावुक हो गए. मान्यता है कि उन्होंने द्रौपदी की रक्षा करने का वचन दिया. बाद में जब महाभारत में द्रौपदी का चीरहरण हुआ, तब भगवान कृष्ण ने उनकी लाज बचाई. इस कथा को भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के भाव से जोड़कर देखा जाता है.
रक्षाबंधन से जुड़ी प्रचलित कथाएं
रक्षाबंधन की कथाओं में यम और यमुना की कथा भी प्रसिद्ध है. मान्यता है कि सावन पूर्णिमा के दिन यमुना ने यमराज को राखी बांधी थी. इससे प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें अमरता का वरदान दिया था. वहीं, एक अन्य कथा में बताया जात है कि विष्णु जी को पुन: प्राप्त करने के लिए माता लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांधी थी. सत्युग की एक कथा है, जिसमें इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने देवताओ की रक्षा के लिए देवराज इंद्र को राखी बांधी थी.
रक्षाबंधन का ऐतिहासिक संबंध
रानी कर्णावती ने हुमायू को राखी भेजी थी. ऐतिहासिक कथाओं में बताया जाता है कि चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने संकट के समय में मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजकर रक्षा के लिए गुहार लगाई थी. वहीं, एक कथा के अनुसार, वर्णन मिलता है कि राजा पोरस के साथ युद्ध के दौरान सिकंदर की पत्नी ने उन्हें राखी बांध भाई बनाया था.
राखी का महत्व
धार्मिक दृष्टि से रक्षा सूत्र को सकारात्मक ऊर्जा और मंगल का प्रतीक माना जाता है. राखी बांधते समय बहन अपने भाई के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है. वहीं, भाई बहन के सम्मान और सुरक्षा का संकल्प लेते हैं. इसलिए, रक्षाबंधन को सिर्फ राखी बांधने का त्योहार नहीं बल्कि रिश्तों को मजबूत करने और परिवार में प्रेम एवं विश्वास बढ़ाने वाले पर्व के रूप में मनाया जाता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)