आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर 26 जुलाई 2026 को रवि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।

Ravi Pradosh Vrat 2026

Ravi Pradosh Vrat 2026

  • Published: 17 Jul 2026, 10:42 AM IST
  • Last Updated: 17 Jul 2026, 10:42 AM IST

हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और प्रदोष काल में शिव पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। जुलाई 2026 में पहला प्रदोष व्रत 12 जुलाई को पड़ा था, जबकि दूसरा प्रदोष व्रत 26 जुलाई को रखा जाएगा। चूंकि यह व्रत रविवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा।

धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने और श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की पूजा करने से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है। साथ ही महादेव की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है।

रवि प्रदोष व्रत 2026 तिथि और समय
द्रिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 26 जुलाई 2026 को दोपहर 1 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगी और 27 जुलाई को शाम 4 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी। प्रदोष व्रत में प्रदोष काल का विशेष महत्व होता है। इसलिए 26 जुलाई को ही रवि प्रदोष व्रत रखा जाएगा।

शिव पूजा का शुभ मुहूर्त
रवि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल का शुभ समय:
तारीख: 26 जुलाई 2026
प्रदोष काल प्रारंभ: शाम 7:16 बजे
प्रदोष काल समाप्त: रात 9:21 बजे
कुल अवधि: 2 घंटे 5 मिनट
इस दौरान शिव पूजा, मंत्र जाप और आरती करना अत्यंत शुभ माना गया है।

रवि प्रदोष व्रत पूजा विधि
रवि प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। दिनभर उपवास रखते हुए भगवान शिव का ध्यान करें।

पूजा के समय:

  • शिवलिंग पर शुद्ध जल और गंगाजल अर्पित करें।
  • दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा, आक का फूल, चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
  • भगवान शिव को फल और मिठाई का भोग लगाएं।
  • धूप और दीप प्रज्वलित करें।
  • शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र या "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।
  • अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।

प्रदोष व्रत का महत्व
शास्त्रों में प्रदोष व्रत को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने का विशेष अवसर माना गया है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।