
रील्स के चंगूल में जेन-जी
Reels Effect On Gen-Z: एक दौर था जब देश के नौजवान और जेन-जी किसी वैज्ञानिक, किसी महान लेखक, किसी खिलाड़ी या फिर बड़े फिल्मी सितारे के अभिनय और उनकी मेहनत से प्रेरणा लेते थे. लेकिन अब ज्यादातर Gen-Z के स्मार्टफोन पर एक बार नज़र डालकर देखिए, वहां आपको कला, पढ़ाई, मेहनत या समझदारी का दूर-दूर तक कोई निशान नहीं मिलेगा. स्क्रीन पर स्क्रॉल होते ही सामने आएंगे 15 से 30 सेकेंड के वो रील्स, जहां कोई कैमरे के सामने चिल्ला रहा है, कोई सड़क पर गाड़ी रोक कर बेतुका डांस कर रहा है, तो कोई सिर्फ गाली-गलौच और फूहड़ता परोसकर खुद को ‘स्टार’ समझ रहा है.
अजीब त्रासदी ये है कि आज की युवा पीढ़ी इन सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के इंस्टाग्राम रील्स में इस कदर उलझ चुकी है कि उन्हें असल जिंदगी और इस नकली ‘वर्चुअल फेम’ का अंतर समझ ही नहीं आ रहा. लेकिन सवाल ये है कि 15 सेकेंड के इस रील्स में जो दुनिया दिख रही है, वो हमारे युवाओं का वक्त और दिमाग किस हद तक बर्बाद कर रही है?
Insta Reels के जरिए करोड़ों व्यूज बटोरते इन्फ्लुएंसर्स
आज के दौर में अगर आपको लाखों-करोड़ों फॉलोअर्स चाहिए, तो आपको किसी डिग्री, तमीज या गहरी समझ की कोई जरूरत नहीं. ऐसे कई क्रिएटर हैं, जो कंटेंट के नाम पर रील्स में कुछ भी परोस रहे हैं, और उस पर लाखों-करोड़ों व्यूज मिल रहे हैं. उदाहरण के तौर पर बात की जाए तो ‘डेनी पंडित’ के वायरल वीडियो को ही देख लीजिए, जहां लड़कों के सिर पर लंबे बालों की विग लगाकर और लड़कियों के कपड़े पहनकर बेतुका डांस कर रहे हैं, और बिना किसी तुक या टैलेंट वाले इस रील्स पर 84.2 मिलियन (8 करोड़ से भी ज्यादा) व्यूज हैं. हद तो तब हो जाती है जब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अदनान शेख सिर पर दुपट्टा ओढ़कर, औरत का गेटअप लेकर किचन में पति-पत्नी वाले घिसे-पिटे चुटकुलों पर कुकिंग करने का नाटक करते हैं, और इस रील्स को भी 28 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल जाते हैं.
वहीं, किसी रैंडम रील्स में कोई महिला बस घर के कमरे में साड़ी पहनकर सामान्य सा डांस कर दे, तो उस रील्स पर भी 14.8 मिलियन व्यूज बहुत आसानी से आ जाते हैं. रील्स युवाओं का समय कैसे बर्बाद कर रहा है, उसके ये चंद उदाहरण हैं. इंस्टा रील्स की दुनिया में ऐसे लाखों करोड़ों रील्स हैं, जिन पर युवा अपना कीमती वक्त बर्बाद कर रहे हैं और उन्हें इसका एहसास भी नहीं हो रहा.
घटता अटेंशन स्पैन और घटती समझ
साइकोलॉजी के नजरिए से देखें तो ये कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि एक धीमा जहर है. रील्स और शॉर्ट्स के फॉर्मेट इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि वो आपके दिमाग में तुरंत ‘डोपामाइन’ रिलीज करते हैं. हर स्क्रॉल के साथ युवा को एक नया शॉक या नया मसाला मिलता है. इसका सीधा असर उनके ‘अटेंशन स्पैन’ (ध्यान केंद्रित करने की क्षमता) पर पड़ रहा है. यही वजह है कि आज का अधिकतर युवा 2 मिनट की कोई गंभीर वीडियो या किताब का एक पन्ना शांति से नहीं पढ़ सकता. उसे हर 10 सेकेंड में कुछ अतरंगी चाहिए. नतीजा? पढ़ाई-लिखाई का महत्व खत्म हो रहा है, डिग्रियां सिर्फ कागज का टुकड़ा लग रही हैं और क्रिएटिविटी के नाम पर सिर्फ दूसरों के गानों पर होंठ हिलाना (लिप-सिंक) ही हुनर मान लिया गया है.
‘विवाद बेचो और वायरल हो जाओ’ का गलत ट्रेंड
आज की पीढ़ी के सामने जो सबसे खतरनाक उदाहरण सेट हो रहा है, वो है- ‘विवाद ही सफलता की चाबी है.’ सही-गलत का फर्क खत्म हो चुका है. कोई सड़क पर राहगीरों को परेशान करके रील्स बना रहा है, तो कोई गाली देकर. जब तक मामला पुलिस थाने तक या विवादों तक नहीं पहुंचता, तब तक कंटेंट ही पूरा नहीं माना जाता. Gen-Z इस अंधी दीवानगी के पीछे भाग रही है. उन्हें लगता है कि एक बार रील्स वायरल हो गई, तो ज़िंदगी सेट है. लेकिन वो ये भूल रहे हैं कि रील्स का ये फेम पानी के बुलबुले जैसा है, जो एक दिन फूटेगा और पीछे सिर्फ खालीपन छोड़ जाएगा.
वक्त आ गया है खुद से ये सवाल पूछने का
एंटरटेनमेंट गलत नहीं, लेकिन जब एंटरटेनमेंट के नाम पर फूहड़ता को ‘आइकॉन’ मान लिया जाए और नई पीढ़ी पढ़ाई-लिखाई छोड़कर सड़क पर रील्स बनाने को ही अपना करियर समझ ले, तो समझ जाइए कि खतरे की घंटी बज चुकी है. Gen-Z को ये समझना होगा कि 15 सेकेंड की रील्स कभी आपकी असली जिंदगी का सच नहीं हो सकती. वक्त रहते अगर फोन का डेटा बंद करके दिमाग का डेटा ऑन नहीं किया गया, तो आने वाला कल रील्स की दुनिया में डूब जाएगा.

सोनाली नाईक
सोनाली करीब 15 सालों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रहार न्यूज पेपर से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी. इस न्यूज पेपर में बतौर रिपोर्टर काम करते हुए सोनाली ने एंटरटेनमेंट बीट के साथ-साथ सीसीडी (कॉलेज कैंपस और ड्रीम्स) जैसे नए पेज पर काम किया. उन्होंने वहां 'फैशनेरिया' नाम का कॉलम भी लिखा. इस दौरान एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की, लेकिन पत्रकारिता के जुनून की वजह से इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के इरादे से 2017 में टीवी9 से सीनियर कोरेस्पोंडेंट के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की. टीवी9 गुजराती चैनल में 3 साल तक एंटरटेनमेंट शो की जिम्मेदारी संभालने के बाद सोनाली 2020 में टीवी9 हिंदी डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम में शामिल हुईं. सोनाली ने टीवी9 के इस सफर में कई ब्रेकिंग, एक्सक्लूसिव न्यूज और ऑन ग्राउंड कवरेज पर काम किया है. हिंदी के साथ-साथ गुजराती, मराठी, इंग्लिश भाषा की जानकारी होने के कारण डिजिटल के साथ-साथ तीनों चैनल के लिए भी उनका योगदान रहा है. रियलिटी शोज और ग्लोबल कंटेंट देखना सोनाली को पसंद है. नई भाषाएं सीखना पसंद है. संस्कृत भाषा के प्रति खास प्यार है. नुक्कड़ नाटक के लिए स्क्रिप्ट लिखना पसंद है. सोनाली के लिखे हुए स्ट्रीट प्लेज 'पानी', 'मेड इन चाइना' की रीडिंग 'आल इंडिया रेडियो' पर सोशल अवेयरनेस के तौर पर की जा चुकी है.
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