Time Published: Friday, August 7, 2026, 15:56 [IST]

NEET-UG पेपर लीक को लेकर जब जंतर-मंतर से लेकर पूरे देश की सड़कों पर छात्र हंगामा कर रहे थे, तब कई नेता उन पर उंगलियां उठा रहे थे। लेकिन इसी गहमागहमी के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत का एक ऐसा बयान आया, जिसने पूरी बहस की दिशा ही बदल दी।

संघ प्रमुख मोहन भागवत के इस रुख के बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के सुर भी बदलते दिखे। दीपके ने भागवत की बात के जरिए सीधे बीजेपी के उन नेताओं को आड़े हाथों लिया जो प्रदर्शनकारी छात्रों पर सवाल उठा रहे थे। सवाल उठने लगा कि जिन संगठनों और नेताओं के खिलाफ पहले तीखी नाराजगी दिखाई गई, उसी खेमे के एक बड़े चेहरे की बात पर अब दीपके ने समर्थन जैसा संकेत क्यों दिया।

Abhijit Dipke supports RSS chief Mohan Bhagwat

क्या बोले मोहन भागवत?

मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत ने आज की युवा पीढ़ी यानी Gen Z को लेकर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आज के युवा हर बात पर सवाल पूछते हैं और किसी भी बात को बिना तर्क के स्वीकार नहीं करते। यह बदलाव स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि अगर युवा किसी मुद्दे पर विरोध करते हैं तो सिर्फ इसी वजह से उन्हें देश-विरोधी नहीं कहा जा सकता। लोकतंत्र में विरोध भी संवाद का एक तरीका है। उनकी बात सुनना और उनके सवालों का जवाब देना जरूरी है। साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया।

मोहन भागवत ने कहा,

"आज के युवा पुरानी पीढ़ियों से काफी अलग हैं। हमारे दौर में बड़ों की बात बिना सवाल किए मान ली जाती थी, लेकिन आज का जेन जेड हर बात के पीछे ठोस तर्क मांगता है। ये बच्चे हमारे अपने हैं। अगर किसी मुद्दे पर अपनी बात रखने के लिए वे सड़कों पर उतरकर विरोध जताते हैं, तो उन्हें देश विरोधी कहना पूरी तरह गलत है। लोकतंत्र के अंदर विरोध भी बातचीत का ही एक जरिया है। विरोध करने में कोई बुराई नहीं है, बस इसका इस्तेमाल समाज को बांटने के लिए नहीं होना चाहिए। देश की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है और इसके लिए संवाद होना चाहिए।"

RSS प्रमुख की बात पर अभिजीत दीपके का तंज

मोहन भागवत के इस बयान वाला वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर सियासत तेज हो गई। CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने शुक्रवार (07 अगस्त) को मोहन भागवत के बयान वाली पोस्ट को शेयर करते हुए एक्स (X) पर लिखा- "जिन लोगों को इससे मतलब है, उनके लिए...।"

अभिजीत दीपके का यह छोटा सा बयान असल में उन सत्ताधारी नेताओं पर सीधा निशाना माना जा रहा है, जिन्होंने नीट परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे छात्रों को 'राष्ट्र-विरोधी' और 'विदेशी साजिश' से जुड़ा बता दिया था। भागवत के बयान को ढाल बनाकर दीपके ने उन नेताओं को आईना दिखाने की कोशिश की है जो जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन पर सवाल उठा रहे थे।

बीजेपी नेताओं के वे बयान जिन पर मचा बवाल

NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और सीजेपी के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान बीजेपी के कई बड़े चेहरों ने तल्ख रुख अपनाया था।

निशिकांत दुबे (बीजेपी सांसद): उन्होंने आरोप लगाया था कि देश-विरोधी ताकतें छात्रों के असंतोष को भुनाने की कोशिश कर रही हैं और इस आंदोलन के पीछे विदेशी शक्तियों का हाथ है।

नितिन नबीन (बीजेपी अध्यक्ष, तेलंगाना कार्यक्रम): उन्होंने जून में कहा था कि देश में कॉकरोच और वायरस जैसी पार्टियां आ गई हैं, जो व्यवस्था को भीतर से खोखला करना चाहती हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।

सुवेंदु अधिकारी (बीजेपी नेता, पश्चिम बंगाल): उन्होंने देशव्यापी छात्र विरोध प्रदर्शनों के समय दावा किया था कि देश को तोड़ने वाला गिरोह एक बार फिर माहौल बिगाड़ने में लग गया है।

अमित सातम (बीजेपी मुंबई अध्यक्ष): उन्होंने भी सीजेपी के विरोध प्रदर्शनों पर उंगली उठाते हुए इसमें देश-विरोधी तत्वों की मौजूदगी की बात कही थी और विपक्ष पर टुकड़े-टुकड़े गैंग के साथ सांठगांठ का आरोप लगाया था।

बदलते सियासी संकेत क्या कहते हैं?

मोहन भागवत का बयान सीधे तौर पर छात्र आंदोलनों और युवाओं के विरोध के अधिकार की बात करता है। दूसरी तरफ अभिजीत दीपके की पोस्ट यह दिखाती है कि उन्होंने इस बयान को अपने आंदोलन और छात्रों के पक्ष में मिले नैतिक समर्थन की तरह पेश करने की कोशिश की।

हालांकि दीपके ने यह नहीं कहा कि उनके और RSS के विचार एक जैसे हैं। लेकिन उनकी पोस्ट के बाद यह बहस जरूर शुरू हो गई कि छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक दलों और वैचारिक संगठनों के भीतर भी अलग-अलग राय मौजूद है।