बिलासपुर17 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

हाईकोर्ट ने आरटीआई के तहत व्यक्तिगत जानकारी मांगने को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस सचिन सिंह राजपूत ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 और निजता को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी जैसे मैरिज रजिस्ट्रेशन आवेदन, जन्मतिथि, पहचान पत्र या निजी दस्तावेज आरटीआई के के तहत किसी तीसरे पक्ष को नहीं दी जा सकती, जब तक कि इसमें कोई बड़ा जनहित न जुड़ा हो।
दरअसल, अंबिकापुर निवासी डीके सोनी ने हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थी। जिसमें सूरजपुर जिले के अपर कलेक्टर और विशेष विवाह अधिकारी के सामने कपिल देव पैकरा और लवकेश कुमार पैकरा द्वारा प्रस्तुत विवाह पंजीयन आवेदनों, संलग्न दस्तावेजों, आदेश और इश्तहार की प्रमाणित प्रतियां आरटीआई के तहत मांगी थीं।
जन सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी, सूरजपुर ने यह कहते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया था कि मामला विचाराधीन न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और आवेदक थर्ड पार्टी है, इसलिए नियमों के तहत यह जानकारी नहीं दी जा सकती।
अपील खारिज होने पर हाईकोर्ट में लगाई याचिका
इसके बाद मामला राज्य सूचना आयोग रायपुर पहुंचा। आयोग ने 10 अक्टूबर 2019 को द्वितीय अपील खारिज करते हुए जन सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी के फैसले को सही ठहराया था। इसके खिलाफ सोनी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। जिस पर आयोग ने अपने जवाब में कहा कि विचाराधीन मामले में थर्ड पार्टी को जानकारी देने का प्रावधान नहीं है।
निजता पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं
इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि, आरटीआई अधिनियम का मुख्य उद्देश्य पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन बनाना है, लेकिन धारा 8(1)(जे) के तहत व्यक्तिगत निजता की रक्षा का भी स्पष्ट प्रावधान है। विवाह पंजीयन के लिए दिए गए आवेदन में नाम, पता, फोटो, जन्मतिथि और पहचान पत्र जैसे गोपनीय डेटा होते हैं।
यदि याचिकाकर्ता कोई व्यापक जनहित जैसे भ्रष्टाचार उजागर करना या पद का दुरुपयोग साबित नहीं करता, तो ऐसी जानकारी देना व्यक्ति की निजता पर अनावश्यक हमला होगा। इस आधार पर कोर्ट ने दो याचिकाओं को खारिज कर दिया।
सूचना आयोग को फटकार- कहा- प्रशिक्षण की सलाह देना अपील का निपटारा नहीं
याचिका में सोनी ने डीपीएस. तिवारी के खिलाफ हुई शिकायत, जांच रिपोर्ट और गवाहों के बयानों की प्रतियां मांगी थीं। जनसूचना अधिकारी ने जांच लंबित होने का हवाला देकर मना कर दिया था। इस मामले में राज्य सूचना आयोग ने प्रथम अपीलीय अधिकारी को समय सीमा में काम करने की सलाह दी और सरगुजा यूनिवर्सिटी और संबंधित अधिकारियों को ट्रेनिंग देने के निर्देश देकर अपील बंद कर दी थी।
हाईकोर्ट ने इस रवैये पर भारी नाराजगी जताते हुए कहा कि सूचना आयोग राज्य की अंतिम अपीलीय संस्था है। आयोग का दायित्व केवल प्रक्रियात्मक कमियों पर टिप्पणी करना या ट्रेनिंग की बात कहना नहीं है, बल्कि यह तय करना है कि मांगी गई जानकारी कानूनन दी जा सकती है या धारा 8 के तहत छूट प्राप्त है। कोर्ट ने आयोग के आदेश को निरस्त करते हुए मामले को वापस कर दिया है। निर्देश दिया कि 90 दिनों के भीतर दोनों पक्षों को सुनकर आदेश पारित करें।
.
खबरें और भी हैं...
यात्री को 3 लाख की सोने की अंगूठी लौटाई: बिलासपुर-बीकानेर एक्सप्रेस के लैवेटरी में गिरी थी, चलती ट्रेन में शिकायत पर हुई कार्रवाई
1:17- कॉपी लिंक
शेयर
बिलासपुर में करंट लगने से 2 मजदूरों की मौत, VIDEO: 11KV हाईटेंशन लाइन से चिपके, निर्माणाधीन मकान में दीवार जोड़ते समय हुआ हादसा
0:42- कॉपी लिंक
शेयर
हाईकोर्ट की सुरक्षा में लगे फायर-फाइटर्स की छंटनी: मजदूरों ने सुरक्षा और श्रम-कानून पर उठाए सवाल, कहा-जरूरत 28 की,8 लोगों के भरोसे चल रहा काम

- कॉपी लिंक
शेयर
बिलासपुर में भूसे से भरे ट्रक ने बाइक को रौंदा: 25 मीटर तक घिसटती रही महिला, मौके पर मौत, बाइक चालक गंभीर घायल,आरोपी ड्राइवर गिरफ्तार
1:10- कॉपी लिंक
शेयर