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वाराणसी40 मिनट पहले
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यह तस्वीर जेन-जी कार्यक्रम की है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में 12 सितंबर को आयोजित आईसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा वोरा की ‘जेन-जी चौपाल’ को लेकर अब कार्यक्रम स्थल की अनुमति और बुकिंग प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। छात्र दिव्यांशु त्रिपाठी की ओर से मांगी गई सूचना के अधिकार (आरटीआई) के जवाब में विश्वविद्यालय के मंच कला संकाय की ओर से दी गई जानकारी में कहा गया है कि संबंधित प्रेक्षागृह में राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए सीधे तौर पर अनुमति नहीं दी जाती है। इसके बावजूद सभागार को चीफ प्रॉक्टर की संस्तुति के आधार पर आवंटित किया गया था।
आरटीआई में सामने आई जानकारी के अनुसार, आईसा की ओर से विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के लिए दिए गए आवेदन में इसे शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए ‘जेन-जी चौपाल’ बताया गया था। कार्यक्रम के लिए पहले मधुबन में स्थान तय किया गया था। हालांकि, उसी दिन वहां अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का भी कार्यक्रम प्रस्तावित था। ऐसे में दोनों छात्र संगठनों के कार्यक्रम एक ही स्थान पर होने से संभावित विवाद और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए कार्यक्रम स्थल बदल दिया गया।

यह है बीएचयू में सभागार बुक करने का नियम।
एक ही जगह दो कार्यक्रम होने से बदला गया स्थल
विश्वविद्यालय की ओर से आरटीआई में दिए गए जवाब में बताया गया कि एक ही परिसर अथवा स्थल पर दो अलग-अलग छात्र आयोजकों के कार्यक्रम प्रस्तावित थे। ऐसी स्थिति में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से चीफ प्रॉक्टर की संस्तुति पर मंच कला संकाय के प्रेक्षागृह का आवंटन किया गया।
इससे यह सवाल उठ रहा है कि जब संबंधित सभागार में राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए सामान्य तौर पर सीधी अनुमति नहीं है, तो विशेष परिस्थितियों में चीफ प्रॉक्टर की संस्तुति के आधार पर वहां कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति किस प्रक्रिया के तहत दी गई।
आरटीआई में मांगे गए थे कई बिंदुओं पर जवाब
बीएचयू के छात्र दिव्यांशु त्रिपाठी ने आरटीआई के माध्यम से जेन-जी चौपाल से संबंधित कई जानकारियां मांगी थीं। इसमें कार्यक्रम के लिए दिया गया आवेदन, अनुमति पत्र, सुरक्षा विभाग की अनापत्ति (एनओसी), सभागार की बुकिंग और जमा किए गए शुल्क समेत अन्य विवरण शामिल थे।
विश्वविद्यालय के जवाब में कार्यक्रम के आयोजन और स्थल आवंटन की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक, पहले प्रस्तावित स्थल पर उसी दिन दूसरे छात्र संगठन का कार्यक्रम होने के कारण दोनों आयोजनों को अलग-अलग स्थानों पर कराने का निर्णय लिया गया। इसी क्रम में चीफ प्रॉक्टर की संस्तुति के बाद मंच कला संकाय का प्रेक्षागृह आवंटित किया गया।

चीफ प्रॉक्टर के खिलाफ छात्रों ने शुरू किया विरोध।
30 से 50 हजार रुपये तक है सभागार का शुल्क
आरटीआई के जवाब में सभागार की बुकिंग और शुल्क से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है। विश्वविद्यालय के अनुसार, प्रेक्षागृह की बुकिंग के लिए सामान्य तौर पर 30 हजार से 50 हजार रुपये तक शुल्क निर्धारित है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में सक्षम प्राधिकारी की संस्तुति के आधार पर सभागार शुल्क में छूट अथवा नियमानुसार परिवर्तन का प्रावधान भी है।
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