सामंथा रुथ प्रभु की गोद भराई की खूबसूरत तस्वीरें सामने आई हैं। एक्ट्रेस ने इस खास अनुभव का मतलब भी बताया।
सामंथा रुथ प्रभु
- Published: 15 Sep 2026, 11:35 AM IST
- Last Updated: 15 Sep 2026, 11:35 AM IST
Samantha Ruth Prabhu: एक्ट्रेस सामंथा रुथ प्रभु जल्द मां बनने वाली हैं। उन्होंने अपनी गोद भराई की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं। इन तस्वीरों में वह पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच नजर आ रही हैं। इस खास मौके पर उनके पति और फिल्ममेकर राज निदिमोरु भी उनके साथ मौजूद रहे।
पारंपरिक तरीके से हुई रस्म

सामंथा की गोद भराई की रस्म दक्षिण भारतीय परंपराओं के अनुसार हुई। समारोह में महिलाएं पारंपरिक साड़ियों में नजर आईं और सामंथा पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाई गईं। कार्यक्रम की सजावट भी पारंपरिक तरीके से की गई थी। केले के पत्तों के साथ गेंदे और चमेली के फूलों से जगह को सजाया गया था। एक तस्वीर में सामंथा रंगोली के बीच बैठी नजर आईं, जहां आसपास दीये जल रहे थे।
राज ने भी निभाई रस्म
इस खास मौके पर राज निदिमोरु अपनी पत्नी के साथ नजर आए। एक तस्वीर में वह सामंथा के पास खड़े होकर उन्हें देखते हुए दिखाई दिए। वहीं, एक अन्य तस्वीर में राज सामंथा पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाते नजर आए। एक तस्वीर में वह प्यार से सामंथा की ठोड़ी पकड़कर कैमरे की ओर देखते हुए भी नजर आए। दोनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर फैंस का ध्यान खींच रही हैं।
सामंथा का पारंपरिक लुक
समारोह के दौरान सामंथा ने सुनहरे रंग की रेशमी साड़ी पहनी। उन्होंने बालों में गजरा लगाया और पारंपरिक गहनों के साथ अपना लुक पूरा किया। तस्वीरों में सामंथा काफी खुश नजर आ रही हैं। उनके चेहरे की मुस्कान ने भी फैंस का ध्यान खींचा।
रस्म का मतलब भी बताया
सामंथा ने तस्वीरें शेयर करने के साथ इस खास रस्म का मतलब भी समझाया। उन्होंने बताया कि वह हमेशा से अपनी परंपराओं का सम्मान करती रही हैं, लेकिन इस बार उन्हें कई मंत्रों और रस्मों के पीछे का अर्थ समझने का मौका मिला। उन्होंने बताया कि पंडित ने उन्हें पूजा के दौरान हर रस्म के बारे में विस्तार से समझाया। इससे उन्हें इस पूरी रस्म की आध्यात्मिक अहमियत समझने में मदद मिली।
मां को देवी का रूप माना गया

सामंथा ने बताया कि कला आवरण श्रीविद्या की एक खास रस्म है। इसमें होने वाली मां को देवी के रूप में सम्मान दिया जाता है। साथ ही गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी आशीर्वाद मांगा जाता है। उन्होंने बताया कि इस रस्म में देवी की 94 कलाओं का सम्मान किया जाता है। पूजा के दौरान मंत्रों का जाप भी हुआ। मान्यता के अनुसार, यह मां और बच्चे के लिए सुरक्षा और आशीर्वाद की कामना से जुड़ा है।
मेरे लिए बेहद खास अनुभव था
सामंथा ने लिखा कि वह इस रस्म के बारे में ज्यादा जानकारी के बिना इसमें शामिल हुई थीं। लेकिन जब उन्होंने हर रस्म का मतलब समझा तो उनका अनुभव और भी खास हो गया। उन्होंने कहा कि वहां बैठकर यह महसूस करना कि उनके और उनके बच्चे के लिए क्या किया जा रहा है, उनके लिए बेहद शक्तिशाली अनुभव था। सामंथा ने इस पूरी रस्म के बाद खुद को बेहद धन्य महसूस किया।
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