सुप्रीम कोर्ट ने नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के खिलाफ हुए देशव्यापी छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिसिया कार्रवाई और हिंसा के आरोपों की व्यापक जांच के लिए एक हाई पावर्ड कमेटी गठित करने का फैसला किया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस तीन सदस्यीय न्यायिक कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और एक सेवानिवृत्त डीजीपी स्तर के अधिकारी शामिल होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कमेटी प्रदर्शनों के दौरान उपजे सभी विवादों की विस्तृत पड़ताल करेगी।
- Published: 18 Aug 2026, 03:58 PM IST
- Last Updated: 18 Aug 2026, 03:58 PM IST
नीट पेपर लीक विवाद और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में हुए छात्र आंदोलनों पर पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत में छात्रों की ओर से पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग, पैलेट गन और लाठीचार्ज के आरोप लगाए गए थे, जबकि सरकार और पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था की स्थिति और सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की बात रखी गई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने पूरे मामले की स्वतंत्र और तटस्थ जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाने का निर्णय लिया है।
पूर्व जज और रिटायर्ड डीजीपी होंगे कमेटी के सदस्य
सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने बताया कि इस प्रस्तावित कमेटी में न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन के प्रतिष्ठित पूर्व अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। पीठ ने कहा कि समिति में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश, हाईकोर्ट के एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश और पुलिस महानिदेशक रैंक से सेवानिवृत्त एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
इसके लिए उन अधिकारियों की सहमति ली जा रही है जिनका संबंधित राज्यों या विवाद से कोई सीधा संबंध न रहा हो, ताकि जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।
लाठीचार्ज, यौन उत्पीड़न और हिंसा के हर पहलू की होगी पड़ताल
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कमेटी प्रदर्शनों के दौरान उपजे सभी विवादों की विस्तृत पड़ताल करेगी। इसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिसिया बल प्रयोग, महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए छेड़छाड़ व दुर्व्यवहार के आरोप, इंटरनेट पर उत्पीड़न और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को लगी चोटों जैसे सभी मुद्दों की समीक्षा की जाएगी।
सीजेआई ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जो भी दोषी होगा, उसके कृत्य को उचित नहीं ठहराया जा सकता और पूरे मामले को उसके तार्किक अंत तक पहुंचाया जाएगा।
पीड़ितों को सीधे मिलेगा सुनवाई का मौका, अंतरिम रिपोर्ट भी दे सकेगी कमेटी
अदालत ने कहा कि इस उच्चाधिकार प्राप्त समिति को सभी आवश्यक प्रशासनिक व बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी ताकि कोई भी पीड़ित छात्र या नागरिक सीधे कमेटी के सामने अपनी बात रख सके। पीठ ने यह भी छूट दी है कि समिति को अपनी अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी, वह जरूरी मामलों में समय-समय पर अंतरिम रिपोर्ट भी अदालत को सौंप सकती है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सर्विलांस, फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक और अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार जैसे संवैधानिक मुद्दों पर अदालत स्वयं विचार करती रहेगी।