Ram Mandir Donation Case: राम मंदिर चंदा मामले में SC ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए. कोर्ट ने यूपी सरकार को वरिष्ठ अधिकारियों वाली SIT बनाने को कहा है.

Written By : निपुण सहगल |  Updated at : 20 Jul 2026 04:59 PM (IST)

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Ram Mandir Donation Case Supreme Court Says issue should not be politicized next hearing until July 27th ann राम जन्मभूमि में कथित चंदा चोरी का मामला: SC ने यूपी सरकार से नए सिरे से SIT के गठन को कहा, 27 जुलाई को आदेश जारी करेगा कोर्ट

राम मंदिर चंदा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से अयोध्या के राम जन्मभूमि चंदा चोरी मामले की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एसआईटी बनाने के लिए कहा है. कोर्ट ने ऐसा तब कहा जब उसे जानकारी दी गई कि मामले में शुरू में गठित की गई एसआईटी अपना काम पूरा कर चुकी है और अब मामले की जांच पुलिस कर रही है.

इस मामले में दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 13 जुलाई को नोटिस जारी किया था और उत्तर प्रदेश सरकार से जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था. सोमवार, 20 जुलाई को हुई सुनवाई में राज्य सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को दी जा चुकी है. इस पर जजों ने कहा कि उन्हें रिपोर्ट को पढ़ने के लिए कुछ समय चाहिए. वह कुछ दिन बाद सुनवाई करेंगे.

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पुलिस कर रही है जांच

चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने इसके बाद सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि मामले की जांच कौन कर रहा है? सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि अब यह जांच पुलिस कर रही है. शुरू में जिस एसआईटी का गठन किया गया था, उसको आरोपों की शुरुआती जांच का जिम्मा सौंपा गया था. उसकी तरफ से आरोपों की पुष्टि के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और आगे की जांच कर रही है.

दोबारा बने एसआईटी

चीफ जस्टिस ने कहा कि पुरानी एसआईटी में कुछ अच्छे अधिकारी थे. उन्हें विषय की पूरी जानकारी भी हो चुकी है. बेहतर होगा कि एक नई एसआईटी बनाई जाए. उसमें पहले जांच कर चुके अधिकारियों के अलावा और भी वरिष्ठ अधिकारियों को रखा जाए. इस पर मेहता ने कहा कि इस आदेश का पालन किया जाएगा.

27 जुलाई को आदेश

इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी बात रखने की कोशिश की. वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कहा कि मंदिर निर्माण के समय बहुत सारे लोगों ने पैसे और सोना-चांदी का योगदान दिया था. इसका ब्यौरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए. एक और वकील ने कहा कि अभी तक एफआईआर की कॉपी सार्वजनिक नहीं की गई है. कोर्ट इसका आदेश दे. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, "हम मामले पर विचार कर सोमवार, 27 जुलाई को ज़रूरी आदेश जारी करेंगे."

राजनीति न करें-सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान जजों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर संज्ञान ले लिया है. यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति अब इस पर याचिका दाखिल करता रहे. इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए. कोर्ट राजनीति का मंच नहीं है. यह एक अपराध का मामला है. इसे उसी तरह से देखा जाएगा.

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करीब 2 दशक से सुप्रीम कोर्ट के गलियारों का एक जाना-पहचाना चेहरा. पत्रकारिता में बिताया समय उससे भी अधिक. कानूनी ख़बरों की जटिलता को सरलता में बदलने का कौशल. खाली समय में सिनेमा, संगीत और इतिहास में रुचि.

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Published at : 20 Jul 2026 04:59 PM (IST)

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