झाबुआ जिले के कल्याणपुरा स्थित पूनय माता की डुंगरी पर सरकारी पट्टे की जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच हुए खूनी संघर्ष का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। बुधवार को इस मामले में सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार के नेतृत्व में आदिवासी समाज और विभिन्न संगठनों

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प्रदर्शनकारी अंबेडकर गार्डन पर इकट्ठा हुए और वहां से सीधे कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश करते वक्त स्थिति तब बेहद तनावपूर्ण हो गई, जब ग्रामीणों ने पुलिस द्वारा लगाए गए सुरक्षा बैरिकेड्स को जबरन धक्के मारकर हटा दिया। इस धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी के बीच मौके पर तैनात एसडीओपी कमलेश शर्मा के पैर में चोट लग गई।

कलेक्टर की गैरमौजूदगी पर भड़के विधायक

कलेक्ट्रेट में कलेक्टर डॉ. योगेश भरसट के मौजूद न होने पर विधायक कमलेश्वर डोडियार बेहद भड़क गए। उनकी एसडीएम महेश मंडलोई से तीखी नोकझोंक हुई।

विधायक ने नाराजगी जाहिर करते हुए सवाल उठाए कि कलेक्टर कहां हैं, जिस पर एसडीएम ने जवाब दिया कि बुधवार को ग्रामीण इलाकों में भ्रमण का शेड्यूल रहता है और कलेक्टर फिलहाल फील्ड में हैं।

इस जवाब पर विधायक ने एसडीएम से कलेक्टर के भ्रमण आदेश की कॉपी मांग ली।

विधायक ने क्या कहा?

सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने कहा कि झाबुआ आदिवासियों का जिला है, जो मामा बालेश्वर दयाल और दिलीप सिंह भूरिया जैसी महान शख्सियतों की कर्मभूमि रहा है। देश के संविधान में आदिवासी इलाकों के लिए विशेष प्रावधान दिए गए हैं और पांचवीं अनुसूची के तहत पेसा कानून (PESA Act) लागू किया गया है।

कानून में साफ प्रावधान है कि किसी भी स्थानीय समस्या का समाधान ग्रामवासी आपस में बैठकर ग्राम सभा के जरिए तय करेंगे।

विधायक ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर पक्षपात किया है। उन्होंने कल्याणपुरा सरपंच पति का जिक्र करते हुए कहा कि प्रशासन ने आदिवासियों को ऐसी जगह जमीन बांटी जहां लोग शौच के लिए जाते हैं, जबकि सड़क किनारे की कीमती जमीन गैर-आदिवासियों को दे दी गई।

उन्होंने पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि हाल ही में हुए विवाद के दौरान पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय उल्टा आदिवासियों को ही परेशान करने का काम किया है।

कलेक्ट्रेट में बैरिकेड्स हटाने और धक्का-मुक्की पर दिया बयान

कलेक्ट्रेट परिसर में बैरिकेड्स हटाकर जबरन अंदर घुसने के सवाल पर विधायक ने साफ कहा कि उनके साथ आए सभी लोग इस देश के असली मालिक हैं, लेकिन प्रशासन ने उन्हें कलेक्ट्रेट के बाहर सड़क पर खड़ा कर दिया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने ही ग्रामीणों और उनके साथ धक्का-मुक्की की, जिससे माहौल गरमाया।

ज्ञापन में रखी गईं ये मुख्य मांगें

प्रदर्शन के बाद सौंपे गए ज्ञापन में विधायक और आदिवासी संगठनों ने प्रशासन के सामने प्रमुख रूप से दो मांगें रखी हैं।

कल्याणपुरा मॉडल स्कूल के आसपास की जिस शासकीय जमीन पर गैर-आदिवासी लोगों ने अवैध कब्जे कर रखे हैं, वहां से तुरंत पूरा अतिक्रमण हटाया जाए।

हालिया विवाद के दौरान आदिवासी समाज के युवाओं पर जानलेवा हमला करने वाले सभी आरोपियों की निष्पक्ष जांच की जाए और उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं और एससी/एसटी एक्ट के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड्स गिर गए।

प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड्स गिर गए।

क्या था पूरा विवाद?

कल्याणपुरा में शनिवार को पूनय माता की डुंगरी पर पट्टे की जमीन को लेकर दो गुटों में मारपीट और पथराव हुआ था। वर्ष 2022-23 में मुख्यमंत्री भू-आवासीय अधिकार योजना के तहत करीब 302 ग्रामीणों को इस जमीन पर पट्टे जारी किए गए थे।

हाल ही में गणेश उत्सव के दस दिवसीय धार्मिक आयोजन के बाद यहां कब्जे की कोशिश को लेकर विवाद बढ़ गया और हिंसा हुई, जिससे गांव में तनाव फैल गया। इसके बाद पट्टाधारकों ने डीजीपी भोपाल, आईजी इंदौर, एसपी और कलेक्टर को ज्ञापन भेजकर निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की थी।