नई दिल्ली। हाल के स्वास्थ्य आंकड़ों और स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार, भारत में 5 से 12 वर्ष के बच्चों में मोटापा (Obesity) और मधुमेह (diabetes) की समस्या बेहद तेजी से बढ़ रही है। वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस और स्वास्थ्य संगठनों की रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत अब दुनिया में सबसे ज्यादा ओवरवेट और मोटापे से ग्रस्त बच्चों के मामले में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। जो बीमारियां पहले केवल वयस्कों या बुजुर्गों में देखी जाती थीं, वे अब प्राइमरी और मिडिल स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को अपनी चपेट में ले रही हैं।

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बच्चों में बढ़ती इन बीमारियों के मुख्य कारण

अस्वास्थ्यकर खान-पान (Unhealthy Diet)

आजकल बच्चों के भोजन में हरी सब्जियों और फलों की जगह जंक फूड, प्रोसेस्ड स्नैक्स, चिप्स, बर्गर और शुगर-स्वीटेंड ड्रिंक्स (कोल्ड ड्रिंक्स, डिब्बाबंद जूस) ने ले ली है। इनमें अत्यधिक कैलोरी, फैट और शक्कर होती है, जो वजन बढ़ाने का काम करती है। वीडियो गेम, टीवी और स्मार्टफोन का इस्तेमाल बढ़ने के कारण बच्चों का स्क्रीन टाइम अत्यधिक बढ़ गया है। पार्क में जाकर खेलने या मैदान में दौड़-भाग करने के बजाय बच्चे घंटों एक ही जगह बैठकर बिताते हैं। पढ़ाई का अत्यधिक बोझ, प्रतियोगिता का दबाव और अनियमित दिनचर्या बच्चों के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ रही है, जिससे उनके मेटाबॉलिज्म पर बुरा असर पड़ता है।

टाइप-2 डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस

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अत्यधिक वजन बढ़ने के कारण 8 से 12 साल के बच्चों में इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या पैदा हो रही है। इसके चलते छोटी उम्र में ही बच्चों को टाइप-2 डायबिटीज अपना शिकार बना रही है। अधिक वजन होने के बावजूद बच्चों का शरीर पोषण से वंचित रह जाता है, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। वे बार-बार बीमार (Unwell) पड़ने लगते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापे से ग्रस्त बच्चों में कम उम्र में ही हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर (MASLD) जैसी गंभीर स्थितियां विकसित हो रही हैं।
मोटापे से पीड़ित बच्चे अक्सर सहपाठियों के बीच बुलिंग (चिढ़ाने) का शिकार होते हैं, जिससे उनमें आत्महीनता, तनाव और अवसाद की भावना घर कर जाती है।

बच्चों में मोटापा और डायबिटीज केवल एक शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह उनके पूरे भविष्य को खतरे में डालती है। माता-पिता और डॉक्टरों को मिलकर शुरुआत से ही बच्चों की जीवनशैली में सुधार लाने की जरूरत है। यदि बच्चों को बचपन से ही सही खान-पान और खेल-कूद की आदत डाली जाए, तो उन्हें इन क्रोनिक बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सकता है।

रिपोर्ट: दीपां​जली मिश्रा