Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि का त्रिरात्र व्रत क्या है? जिसमें 3 दिन उपवास से मिलता है 9 दिन के व्रत का फल!

शारदीय नवरात्रि 2026Image Credit source: pexels

Triratra Vrat kya hai: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का पर्व मां भगवती की उपासना का सबसे पावन और ऊर्जावान समय माना जाता है. पूरे नौ दिनों तक भक्त कलश स्थापना कर व्रत रखते हैं, कन्या पूजन करते हैं और मां के नौ स्वरूपों की आराधना में लीन रहते हैं. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होने जा रही है. आमतौर पर मान्यता यही है कि नवरात्रि का फल पाने के लिए पूरे नौ दिनों तक अन्न त्यागकर उपवास करना चाहिए. लेकिन हर किसी के लिए नौ दिनों का कठोर व्रत रख पाना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में साधकों के लिए त्रिरात्र व्रत रखना सबसे सही माना जाता है.

नवरात्रि में कब है त्रिरात्र व्रत?

पंचांग के अनुसार, साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होगी. त्रिरात्र व्रत नवरात्रि की अंतिम तीन तिथियों यानी सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दौरान रखा जाएगा.

त्रिरात्र व्रत क्या है?

त्रिरात्र व्रत नवरात्रि के अंतिम तीन दिनों में किया जाने वाला उपवास है. इसमें सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथियां शामिल होती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन तीन दिनों में भक्त मां दुर्गा की विशेष आराधना करते हैं और व्रत के नियमों का पालन करते हैं. इस दौरान साधक को दिन में एक बार सात्विक भोजन या फलाहार करने की परंपरा देखने को मिलती है. इसलिए जिस परंपरा के अनुसार साधक व्रत रखता है, उसी के नियमों का पालन करना उचित माना जाता है.

3 दिन के व्रत से 9 दिन के व्रत का फल कैसे?

त्रिरात्र व्रत को लेकर सबसे ज्यादा बात इसी की होती है कि आखिर तीन दिन का उपवास नौ दिन के व्रत के समान कैसे माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के अंतिम तीन दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं. सप्तमी, अष्टमी और नवमी को देवी की उपासना, हवन, पूजा और कन्या पूजन जैसी परंपराएं भी कई स्थानों पर की जाती हैं. इसी वजह से इन तीन दिनों को नवरात्रि साधना का विशेष चरण माना गया है. मान्यता है कि यदि कोई भक्त पूरे नौ दिनों तक व्रत नहीं रख सकता और वह इन तीन दिनों में पूरी श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ त्रिरात्र व्रत करता है, तो उसे नवरात्रि व्रत के समान पुण्य फल प्राप्त हो सकता है.

त्रिरात्र व्रत में किन देवियों की पूजा होती है?

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. त्रिरात्र व्रत के दौरान भी देवी के इन स्वरूपों की आराधना की जाती है. इसके साथ शक्ति के तीन प्रमुख स्वरूपों महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की पूजा का भी विशेष महत्व बताया जाता है. महाकाली को शक्ति और नकारात्मकता के नाश से, महालक्ष्मी को धन, सुख और समृद्धि से तथा महासरस्वती को ज्ञान और विद्या से जोड़कर देखा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन तीनों शक्ति स्वरूपों की आराधना करने से जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में देवी की कृपा प्राप्त होती है.

त्रिरात्र व्रत में सप्तमी का महत्व

नवरात्रि की सप्तमी तिथि से त्रिरात्र व्रत की शुरुआत मानी जाती है. इस दिन देवी की विशेष पूजा की जाती है और साधक व्रत का संकल्प लेकर संयम का पालन करता है. मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की आराधना का भी नवरात्रि में विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय और संकट से बचाती हैं. इसलिए सप्तमी के दिन देवी की पूजा करते समय श्रद्धालु अपनी परेशानियों और बाधाओं से मुक्ति की कामना करते हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान

वरुण चौहान

इलेक्‍ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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