Published: Friday, September 4, 2026, 15:49 [IST]
Shruti Lakhotia Viral Video: सोशल मीडिया पर इन दिनों लाइफ और इंटिमेसी कोच श्रुति लखोटिया का एक पुराना इंटरव्यू चर्चा का विषय बना हुआ है। Zee Switch के साथ हुए उनके इंटरव्यू की एक क्लिप करीब एक महीने बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। वायरल क्लिप में श्रुति लखोटिया कथित तौर पर पुरुषों को लेकर एक ऐसा कमेंट करती नजर आती हैं, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर लोगों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है।
इंटिमेसी कोच श्रुति लखोटिया का वीडियो वायरल
वीडियो सामने आने के बाद जहां कुछ यूजर्स ने श्रुति के बयान को सेक्सिस्ट और पुरुषों के प्रति एकतरफा सोच वाला बताया, वहीं कुछ लोगों ने इस बहस को जेंडर इक्वालिटी के बड़े मुद्दे से जोड़ दिया। सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगा कि अगर महिलाओं या पुरुषों में से किसी एक जेंडर को लेकर इस तरह की सामान्यीकृत टिप्पणी की जाए, तो क्या दोनों के लिए एक जैसे मानदंड होने चाहिए?
क्या है वायरल वीडियो का मामला?
-वायरल हो रही क्लिप श्रुति लखोटिया के Zee Switch के साथ हुए इंटरव्यू की बताई जा रही है। उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्ट्स में उन्हें लाइफ, इंटिमेसी और सेल्फ-लव कोच के तौर पर पेश किया गया है। इंटरव्यू में आधुनिक रिश्तों, डेटिंग और इंटिमेसी जैसे विषयों पर बातचीत की गई थी।
-इसी बातचीत का एक हिस्सा अब सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। वायरल क्लिप में कथित तौर पर श्रुति पुरुषों की जरूरत को सिर्फ सेक्स से जोड़ती हुई नजर आती हैं। यही टिप्पणी इंटरनेट यूजर्स के बीच बहस की सबसे बड़ी वजह बनी हुई है।
-हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल किसी छोटी क्लिप को पूरे इंटरव्यू का संदर्भ मान लेना सही नहीं होगा। इसलिए बयान को लेकर प्रतिक्रिया देते समय ये ध्यान रखना जरूरी है कि वायरल वीडियो बातचीत का सिर्फ एक हिस्सा हो सकता है और पूरे संदर्भ से अलग देखने पर उसका अर्थ अलग निकल सकता है।
'पुरुषों की जरूरत सिर्फ सेक्स के लिए' वाले कमेंट पर क्यों भड़के लोग?
-क्लिप वायरल होने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाया कि किसी भी पूरे जेंडर को उसकी सेक्सुअल जरूरत तक सीमित करना क्या सही है? आलोचकों का कहना है कि जिस तरह महिलाओं को सिर्फ उनकी शारीरिक खूबसूरती या सेक्सुअलिटी के आधार पर आंकना गलत माना जाता है, उसी तरह पुरुषों को भी केवल सेक्स से जोड़कर देखना उचित नहीं है। पुरुष भी इमोशनल कनेक्शन, प्यार, सुरक्षा, सम्मान और साथी की जरूरत महसूस करते हैं।
-कुछ यूजर्स ने इसे डबल स्टैंडर्ड का मामला बताया। उनका सवाल था कि अगर कोई पुरुष महिलाओं के बारे में यही तरह का सामान्यीकृत बयान देता, तो क्या सोशल मीडिया पर उसे भी उतनी ही आलोचना का सामना करना पड़ता? इसी सवाल ने वायरल वीडियो की चर्चा को महज एक बयान से आगे बढ़ाकर जेंडर इक्वालिटी की बहस में बदल दिया है।
क्या पुरुषों को सिर्फ सेक्स से जोड़ना सेक्सिस्ट सोच है?
-सोशल मीडिया पर लोग इसे लेकर कई तरह की बातें करते नजर आ रहे हैं। लोगों की मानें तो जेंडर को लेकर किसी भी तरह की बातचीत में सबसे अहम बात ये समझना है कि किसी एक व्यक्ति के अनुभव को पूरे जेंडर पर लागू नहीं किया जा सकता। हर पुरुष की प्राथमिकताएं अलग हो सकती हैं। किसी के लिए रिश्ते में सेक्स जरूरी हो सकता है, तो किसी के लिए इमोशनल बॉन्डिंग, भरोसा, दोस्ती या परिवार ज्यादा मायने रख सकता है।
-इसी तरह महिलाओं की भी जरूरतें एक जैसी नहीं होतीं। इसलिए पूरे पुरुष वर्ग को सिर्फ सेक्स की जरूरत वाला बताना उतना ही सामान्यीकरण हो सकता है, जितना महिलाओं के बारे में कोई एक धारणा बनाना।
रिश्तों में शारीरिक संबंध जरूरी है लेकिन सिर्फ सेक्स ही सबकुछ नहीं
-सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि आधुनिक रिश्तों को समझने के लिए सेक्स और इंटिमेसी के बीच अंतर समझना भी जरूरी है। सेक्स किसी रिश्ते का एक हिस्सा हो सकता है लेकिन इंटिमेसी सिर्फ शारीरिक संबंधों तक सीमित नहीं होती। इमोशनल इंटिमेसी यानी अपनी भावनाओं, डर, परेशानियों और कमजोरियों को पार्टनर के साथ शेयर करना भी किसी रिश्ते का अहमहिस्सा है।
-इसके अलावा भरोसा, सम्मान, कम्युनिकेशन, साथ और एक-दूसरे की जरूरतों को समझना भी मजबूत रिश्ते की नींव बनाते हैं। यही वजह है कि किसी भी जेंडर को केवल उसकी शारीरिक या सेक्सुअल जरूरतों से परिभाषित करना रिश्तों की जटिलता को बहुत छोटा कर देता है।
जेंडर इक्वालिटी की बहस में आया 'डबल स्टैंडर्ड' का मुद्दा
-वायरल वीडियो के बाद सबसे दिलचस्प बहस जेंडर इक्वालिटी और डबल स्टैंडर्ड को लेकर देखने को मिली। सोशल मीडिया पर एक वर्ग का तर्क है कि सेक्सिज्म को जेंडर के आधार पर अलग-अलग तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए। अगर किसी पुरुष की महिलाओं के बारे में अपमानजनक या सामान्यीकृत टिप्पणी को सेक्सिस्ट कहा जाता है, तो महिलाओं की पुरुषों के बारे में उसी तरह की टिप्पणी को भी उसी पैमाने पर परखा जाना चाहिए।
-दूसरी ओर कुछ लोग यह भी तर्क दे रहे हैं कि ऐसे बयानों को उनके संदर्भ, बातचीत के पूरे हिस्से और वक्ता के वास्तविक आशय के साथ समझना चाहिए। सिर्फ कुछ सेकंड की वायरल क्लिप के आधार पर किसी व्यक्ति की पूरी सोच तय करना उचित नहीं है।
सोशल मीडिया पर बयान वायरल होने के बाद बढ़ती जिम्मेदारी
आज के दौर में सोशल मीडिया पर किसी इंटरव्यू का कुछ सेकंड का हिस्सा भी कुछ ही घंटों में लाखों लोगों तक पहुंच सकता है। इसके बाद लोग अक्सर बिना पूरा वीडियो देखे अपनी राय बना लेते हैं। यही वजह है कि किसी वायरल क्लिप को शेयर करते समय उसके मूल संदर्भ को देखना जरूरी है। खासकर जब मामला जेंडर, रिश्तों या सेक्स जैसे संवेदनशील विषय से जुड़ा हो, तब अधूरी जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति या पूरे समुदाय के बारे में निष्कर्ष निकालना विवाद को और बढ़ा सकता है।
क्या है इस पूरे विवाद का बड़ा सवाल?
-श्रुति लखोटिया की वायरल क्लिप को लेकर चल रही बहस असल में सिर्फ एक कमेंट तक सीमित नहीं है। ये सवाल उठाती है कि लोग, पुरुषों और महिलाओं के बारे में अपनी धारणाओं को किस नजरिए से देखते हैं। क्या पुरुषों को हमेशा मजबूत, भावनाहीन और सिर्फ शारीरिक जरूरतों वाला समझना सही है?
-क्या महिलाओं को हमेशा भावनात्मक और पुरुषों को हमेशा शारीरिक जरूरतों से जोड़ना एक पुरानी जेंडर स्टीरियोटाइपिंग नहीं है? असल में स्वस्थ रिश्ते इन तयशुदा जेंडर रोल्स से कहीं आगे होते हैं। किसी भी रिश्ते में दोनों पार्टनर्स की भावनाएं, इच्छाएं, सीमाएं और जरूरतें महत्वपूर्ण होती हैं।
-श्रुति लखोटिया के वायरल इंटरव्यू क्लिप ने सोशल मीडिया पर भले ही जेंडर रोल्स और सेक्स को लेकर बहस शुरू कर दी हो लेकिन इस चर्चा से एक बड़ा सवाल जरूर सामने आता है, क्या किसी भी जेंडर को एक ही तरह की पहचान या जरूरत में सीमित करना सही है? रिश्ते सिर्फ सेक्स पर नहीं टिकते और न ही सिर्फ भावनाओं पर। एक मजबूत रिश्ते के लिए प्यार, सम्मान, भरोसा, बातचीत, इमोशनल कनेक्शन और शारीरिक समझ, सभी की अपनी जगह होती है।
-इसलिए जेंडर इक्वालिटी का मतलब केवल महिलाओं या पुरुषों के पक्ष में खड़ा होना नहीं बल्कि दोनों के लिए समान मानदंड और सम्मान की बात करना है। किसी भी बयान को उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए, चाहे उसे कहने वाला पुरुष हो या महिला।