मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में झारखंड के पांच शहरी विधानसभा क्षेत्रों की तस्वीर सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाली है। इन्यूमरेशन फॉर्म के वितरण और उसे भरकर जमा कराने की मौजूदा रफ्तार बताती है कि रांची, हटिया, झरिया, बोकारो और धनबाद विधान

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इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाता बीएलओ को नहीं मिल रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह मतदाताओं की मृत्यु, स्थायी पलायन, पता बदल जाना या एक से अधिक जगह नाम दर्ज होना है। कई अनमैप्ड वोटर भी सामने आए हैं।

राज्य में एसआईआर अभियान 30 जून से चल रहा है और 29 जुलाई को पूरा होना है। इसका अंतिम प्रकाशन 7 अक्टूबर 2026 को होगा। इस बीच राज्य अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष शमशेर आलम और सदस्य वारिश कुरैशी ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मिलकर एसआईआर अभियान की अवधि 29 जुलाई से बढ़ाकर 15 अगस्त तक करने की मांग की। उनका कहना है कि मौजूदा रफ्तार से तय समय सीमा में अभियान पूरा होना मुश्किल दिख रहा है। हालांकि निर्वाचन आयोग ने कहा है कि अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 7 अक्टूबर 2026 को ही होगा। रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि एक भी पात्र मतदाता नहीं छूटेगा।

झारखंड में 47.35 लाख मतदाता अब भी अनमैप्ड... राज्य में अभी 17.89% यानी 47.35 लाख मतदाता अनमैप्ड हैं। रांची, हटिया, झरिया, बोकारो और धनबाद जैसे शहरी विधानसभा क्षेत्रों में यह अनुपात करीब 25% तक पहुंच गया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि इन मतदाताओं के नाम कट जाएंगे, लेकिन बीएलओ इन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे मामलों में निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया के तहत पहले जांच होगी, फिर नोटिस जारी किए जाएंगे। मतदाता को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा। हालांकि, मौजूदा स्थिति को देखते हुए संभावना जताई जा रही है कि इन 5 विस क्षेत्रों में अंतिम मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या करीब 20% तक कम हो सकती है।

इन 5 विस क्षेत्रों में सबसे धीमी प्रगति

विसवोटरफॉर्म बंटेजमा
रांची3,94,77355.10%14.39%
हटिया5,49,97562.24%20.39%
झरिया3,04,80566.60%16.73%
बोकारो5,97,43967.70%29.28%
धनबाद4,76,29771.72%12.19%

झारखंड (81 सीटें) में कुल 2,64,63,236 मतदाता है। 89.99% गणना प्रपत्र का वितरण हुआ, 30.26% जमा हो चुका है

6 विधानसभा क्षेत्रों की रिपोर्ट 100 प्रतिशत: चतरा, मझगांव, मनोहरपुर, चक्रधरपुर, गुमला और लोहरदगा विधानसभा क्षेत्रों में बीएलओ 100% मतदाताओं तक इन्यूमरेशन फॉर्म पहुंचा चुके हैं।

5 क्षेत्रों में स्थिति खराब क्यों... रांची में राज्य के अलग-अलग जिलों के अलावा दूसरे राज्यों के लोग भी रहते हैं। इनमें से कई अपने पैतृक गांव के अलावा यहां भी मतदाता बने हुए हैं। छह महीने से अधिक रहने पर लोग मतदाता बन जाते हैं। स्थानांतरण या सेवानिवृत्ति के बाद अन्य शहर चले जाते हैं, पर नाम नहीं हटवाते। जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनके नाम भी दर्ज हैं। बड़ी संख्या में लोग मकान बदल चुके हैं या दूसरे इलाके में शिफ्ट हो गए हैं। पर पुराने मतदान केंद्र की सूची में भी उनका नाम बना हुआ है। ऐसी स्थिति दो जगह नाम दर्ज होने मामले भी सामने आ रहे हैं।

अनमैप्ड होने पर मिलेगा नोटिस निर्वाचन आयोग ने कहा है कि ‘अनमैप्ड’ होने के आधार पर वोटर का नाम नहीं हटाया जाएगा। यदि मैपिंग के दौरान मतदाता नहीं मिलता है तो संबंधित निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ) पहले नोटिस जारी करेंगे। मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर देंगे। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। फॉर्म भरना क्यों जरूरी: BLO इन्यूमरेशन फॉर्म दे रहे हैं, उसमें वोटर का नाम, पता और एपिक नंबर है। यदि मतदाता फॉर्म भरकर हस्ताक्षर नहीं करता, तो उसे ‘नॉन-रेसिडेंट’ श्रेणी में रखा जा सकता है। आयोग ने जल्द फॉर्म भरकर BLO को देने को कहा है।