पंजाब में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम नहीं है. उनका नाम ASDD (Absent, Shifted, Deceased and Duplicate) सूची में रखा गया है और कारण Shifted बताया गया है. चड्ढा ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है. उन्होंने कहा कि उनका वोटर आईडी मोहाली में दर्ज है और वे पंजाब से ही राज्यसभा सांसद हैं. यह मामला इसलिए ज्यादा अहम है क्योंकि चड्ढा अप्रैल 2026 में आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे. उनके साथ AAP के छह अन्य राज्यसभा सांसद भी बीजेपी में गए थे.
चड्ढा का आरोप है कि AAP छोड़ने के बाद उनके खिलाफ राजनीतिक बदले की कार्रवाई की जा रही है. हालांकि AAP ने आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि SIR चुनाव आयोग की प्रक्रिया है, इसमें राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है. इधर, AAP ने आरोप लगाया है कि दिल्ली में राघव चड्ढा का नाम बैकडेट में वोटर लिस्ट में शामिल कराने की कोशिश की जा रही थी. जब चुनाव आयोग के सामने यह मामला उठाया गया, तो इस प्रक्रिया को तुरंत रोक दिया गया.

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 10% नाम गायब
पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में SIR के दौरान करीब 20.66 लाख नाम हटाए गए हैं, जो SIR से पहले के कुल वोटर्स का लगभग 9.7% है. लेकिन यहां सबसे अहम बात यह है कि यह ड्राफ्ट लिस्ट है, अंतिम मतदाता सूची नहीं. चड्ढा के पास अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए दावा और आपत्ति की प्रक्रिया का रास्ता खुला है. पंजाब में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 सितंबर 2026 है और फाइनल वोटर लिस्ट अक्टूबर में आएगी.
क्या वोटर लिस्ट से नाम कटने पर राज्यसभा सदस्यता भी चली जाएगी?
इसका जवाब है नहीं. यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी पहलू है. सामान्य तौर पर यह धारणा बन सकती है कि अगर किसी सांसद का नाम वोटर लिस्ट से हट गया तो वह सांसद भी नहीं रह सकता. लेकिन राज्यसभा के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है. रिप्रेंजेंटेशन ऑफ द पीपुल्स एक्ट, 1951 की धारा 3 के मुताबिक, राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए व्यक्ति का भारत के किसी संसदीय निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता होना जरूरी है. इसे लेकर 2003 के कानून में संशोधन किया गया था, जिसके बाद यह जरूरी नहीं रह गया कि जिस राज्य से व्यक्ति राज्यसभा सांसद है, उसी राज्य की वोटर लिस्ट में उसका नाम हो.
इसका मतलब है कि अगर पंजाब की वोटर लिस्ट से चड्ढा का नाम हट भी जाता है, लेकिन उनका नाम दिल्ली या भारत के किसी दूसरे संसदीय निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में वैध रूप से दर्ज है, तो सिर्फ पंजाब की सूची से नाम हटने के आधार पर उनकी राज्यसभा सदस्यता खत्म नहीं होगी. वहीं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 102 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत अयोग्यता की जो शर्तें तय हैं, उनमें वोटर लिस्ट में नाम न होना शामिल नहीं है. यानी पंजाब की वोटर लिस्ट से नाम कटा और राज्यसभा सदस्यता खत्म हो गई. इन दोनों को एक ही बात मानना सही नहीं होगा.

राज्यसभा की सदस्यता किन हालात में जा सकती है?
संविधान के अनुच्छेद 102 में संसद सदस्य की अयोग्यता के प्रमुख आधार दिए गए हैं. इनमें केंद्र या राज्य सरकार के अधीन अयोग्य घोषित करने वाला लाभ का पद, सक्षम अदालत द्वारा घोषित मानसिक अस्वस्थता, दिवालिया होना, विदेशी नागरिकता लेना या संसद के बनाए कानून के तहत अयोग्य होना शामिल है. इसके अलावा दल-बदल कानून यानी संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत भी सांसद अयोग्य हो सकता है. अगर कोई सांसद सदन की अनुमति के बिना 60 दिनों तक सभी बैठकों से अनुपस्थित रहता है, तो सदन उसकी सीट खाली घोषित कर सकता है.
अगर अयोग्यता का सवाल उठे तो फैसला कौन करेगा?
संविधान के अनुच्छेद 103 के तहत अगर सवाल उठता है कि संसद का कोई सदस्य अनुच्छेद 102(1) के तहत अयोग्य हो गया है या नहीं, तो मामला राष्ट्रपति के पास जाता है. राष्ट्रपति इस पर फैसला देने से पहले चुनाव आयोग की राय लेते हैं और उसी के अनुसार कार्य करते हैं. वहीं, अगर मामला दलबदल कानून के तहत है, तो दसवीं अनुसूची के तहत संबंधित सदन के सभापति/अध्यक्ष की भूमिका आती है. राज्यसभा के मामले में यह भूमिका राज्यसभा के सभापति की होती है.
तो चड्ढा के मामले में क्या स्थिति है?
सिर्फ पंजाब की SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम हटने के कारण राघव चड्ढा की राज्यसभा सदस्यता खत्म नहीं होती. तीन बातें अलग-अलग समझनी जरूरी हैं..
- उनका नाम पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है और उन्हें Shifted श्रेणी में रखा गया है.
- यह अभी ड्राफ्ट लिस्ट है. उनके पास दावा और आपत्ति दाखिल करके नाम दोबारा जुड़वाने का रास्ता है.
- राज्यसभा के लिए जरूरी शर्त यह नहीं है कि सांसद उसी राज्य का वोटर हो, जिस राज्य का वह प्रतिनिधित्व करता है. 2003 के बदलाव के बाद भारत के किसी संसदीय निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता होना पर्याप्त है.
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शुभेंदु प्रताप भूमंडल
पत्रकारिता में बीते 5 साल से सक्रिय हैं. नेशनल और इंटरनेशनल न्यूज राइटिंग का अनुभव. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से साइंस में ग्रेजुएशन, फिर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता और वीडियो प्रोडक्शन की पढ़ाई. दैनिक भास्कर डिजिटल से करियर की शुरुआत. बतौर न्यूज ब्रीफ एडिटर भास्कर डिजिटल में 800 से ज्यादा बाइलाइन स्टोरी. वीडियो स्क्रिप्टिंग का भी अनुभव. अगस्त 2025 से टीवी9 डिजिटल के साथ नई पारी का आगाज.
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