Updated: Friday, October 23, 2026, 17:57 [IST]
दिल्ली में शुक्रवार 23 अक्टूबर को चुनाव आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध में जुटे प्रदर्शनकारियों ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के दफ्तर की ओर मार्च निकाला। पुलिस ने अशोक रोड पर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की और चेतावनी देने के बाद कई लोगों को हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि SIR की प्रक्रिया रोकी जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें।
यह मार्च 'People Against SIR' नाम के मंच ने बुलाया था। इसमें छात्रों, किसानों और सिविल सोसायटी से जुड़े संगठनों ने हिस्सा लिया। मार्च की शुरुआत दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित बंगला साहिब गुरुद्वारे से हुई। प्रदर्शनकारियों को पटेल चौक के पास चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर जाना था। आयोजकों ने इस मार्च को लोकतंत्र और वोट देने के अधिकार को बचाने की मुहिम बताया। दिल्ली में हो रहे इस भारी विरोध प्रदर्शन की हर एक हलचल सीधे ग्राउंड ज़ीरो से वनइंडिया हिंदी आप तक पहुंचा रहा है।
पुलिस ने क्यों रोका मार्च?
ग्राउंड पर मौजूद वनइंडिया हिंदी की रिपोर्टर ने बताया प्रदर्शनकारी जब आगे बढ़े तो पुलिस ने उन्हें अशोक रोड पर रोक दिया। पुलिस की ओर से प्रदर्शन स्थल खाली करने की चेतावनी दिए जाने के बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर 'पीपुल्स पार्लियामेंट' यानी जनता की संसद आयोजित की। यह कार्यक्रम पहले से तय था। आयोजकों का कहना था कि उनका मकसद सिर्फ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि लोकतंत्र और देश को बचाने की आवाज उठाना है।
प्रदर्शन में शामिल एक व्यक्ति ने कहा, "यह जंतर-मंतर को वापस पाने की बात नहीं है। यह लोकतंत्र और देश को बचाने की लड़ाई है।" हालांकि, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के बीच पुलिस और आयोजकों के रुख को लेकर तनाव बना रहा।
बृंदा करात ने मोदी सरकार को घेरा
प्रदर्शन में CPI(M) की वरिष्ठ नेता बृंदा करात ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को ऐसा भरोसा देना चाहिए कि वह लोगों के वोट देने के अधिकार पर हमला बंद करेगी। करात ने SIR रोकने, संविधान पर कथित हमले बंद करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
उनका कहना था कि सरकार को वोट के अधिकार की रक्षा की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग भी यही रही कि SIR प्रक्रिया को खत्म किया जाए और चुनाव आयोग के नेतृत्व को लेकर उठे सवालों पर जवाब दिया जाए।
हर गली में जंतर-मंतर' अभियान क्या है?
'People Against SIR' ने 18 अक्टूबर को जारी बयान में कहा था कि लोकतंत्र को फिर से हासिल करने के लिए निकाले जाने वाले मार्च के लिए वह हर जगह पुलिस की अनुमति नहीं मांगेगा। मंच ने पुलिस, अर्धसैनिक बलों और जेल प्रशासन से शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं करने की अपील भी की थी।
इस मंच ने 'No SIR' अभियान चलाने की योजना बनाई है। इसका नारा है-'हर गली जंतर-मंतर, हर गांव जंतर-मंतर, मेरा घर जंतर-मंतर'। इस अभियान के जरिए आंदोलन को दिल्ली तक सीमित रखने के बजाय मोहल्लों और गांवों तक ले जाने की बात कही गई है।

'People Against SIR' का गठन 14 अक्टूबर को नई दिल्ली के सुरजीत भवन में हुआ था। इसमें किसानों, मजदूरों, महिलाओं, छात्रों, आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यक समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह शामिल हैं।
मंच का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया गैरकानूनी है। उसकी मांग है कि मतदाता सूचियों को 2024 से पहले वाले स्वरूप में वापस लाया जाए और इसके बाद चुनाव आयोग के मैनुअल और CAG के दिशानिर्देशों में बताए गए तरीके से सोशल ऑडिट के जरिए उन्हें अपडेट किया जाए। ये मंच की मांगें और आरोप हैं; इन्हें किसी आधिकारिक फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार पर क्यों उठ रहे सवाल?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद उस समय बढ़ा, जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान SIR से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया। आयोग का कहना है कि SIR समेत बड़े फैसले पूरे आयोग ने सर्वसम्मति से लिए थे। ऐसे में विवाद के केंद्र में यह सवाल है कि SIR से जुड़े फैसलों पर आयोग के भीतर क्या चर्चा हुई और प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्तियों की वास्तविक स्थिति क्या थी।

RTI में चुनाव आयुक्तों की चिट्ठियों को लेकर क्या खुलासा हुआ?
एक RTI आवेदन से मिली जानकारी के मुताबिक, कैबिनेट सचिवालय ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यालय को भी भेजे थे। ये पत्र वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के कथित गलत आचरण से जुड़े थे। इन्हें कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग यानी DoPT को भी भेजा गया था।
दस्तावेजों के मुताबिक 3 अगस्त को सचिवालय ने इन पत्रों पर CEC ज्ञानेश कुमार की राय लेने का प्रस्ताव रखा। 4 अगस्त के एक नोट में कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने पत्र अपनी व्यक्तिगत हैसियत से लिखे थे, न कि चुनाव आयोग के औपचारिक संचार के तौर पर।

दोनों आयुक्तों को केवल पत्र मिलने की पुष्टि भेजी गई। 5 अगस्त की तारीख वाले इन जवाबों की प्रतियां DoPT के सचिव, विभाग के स्थापना अधिकारी और मुख्य चुनाव आयुक्त के प्रधान निजी सचिव को भी भेजी गई थीं। यह जानकारी RTI के जवाब में जारी दस्तावेजों पर आधारित है।
केरलम में भी CEC के इस्तीफे की मांग
दिल्ली के साथ केरलम में भी शुक्रवार (23 अक्तूबर) को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के पद संभालने वाले दिन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) से जुड़े छात्र संगठनों ने लोक भवन तक मार्च निकाला। इस प्रदर्शन का उद्घाटन केरलम विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने किया।

पुलिस के मुताबिक, मार्च दोपहर 3 बजे शुरू हुआ। इसमें SFI, AISF, KSC(M), SSAI और AIDSO के कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने SIR विवाद को लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
दिल्ली और केरलम के इन प्रदर्शनों से साफ है कि SIR को लेकर विरोध अब अलग-अलग संगठनों और राज्यों तक पहुंच रहा है। फिलहाल प्रदर्शनकारियों की मांगें, चुनाव आयोग का पक्ष और SIR की प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल इस विवाद के तीन अहम पहलू हैं।