पटना2 घंटे पहले

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पुलिसकर्मियों, वकीलों और फर्जी दावेदारों की मिलीभगत से बीमित वाहनों को प्लांट कर करोड़ों रुपए का क्लेम हड़पने वाले गिरोह पर नकेल कसने के लिए सीआईडी के अधीन एसआईटी का गठन कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख और 23 सितंबर की डेडलाइन से ठीक पहले पुलिस मुख्यालय ने यह कदम उठाया।

सुप्रीम कोर्ट ने 17 अगस्त को राज्यों को एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था-फर्जी क्लेम के वित्तीय बोझ की मार आम वाहन मालिकों को ज्यादा प्रीमियम भरकर उठानी पड़ रही है। अब बीमा कंपनियों की ओर से भेजी जाने वाली फर्जी दावों की शिकायतों की सीधी जांच यह एसआईटी करेगी।

रडार पर फर्जीवाड़े के तीन बड़े खेल

1. केस डायरी में गाड़ी बदलना : गैर-बीमित वाहन (ट्रैक्टर/डंपर) से हुए हादसे में जांच अधिकारी से सांठगांठ कर बीमित गाड़ी का नंबर चढ़ा देना। जैसे-धनरूआ थाने में ट्रैक्टर बीआर01जीसी3106 को बदलकर बीआर01जीई3106 किया गया।

2. मर्डर को एक्सीडेंट दिखाना : लाठी-डंडे से पीटकर की गई हत्या को दूसरे थाने की मिलीभगत से सड़क हादसा बता देना। जैसे-रामकृष्णानगर थाने के विनीत कुमार हत्याकांड (केस 316/2020) को दीदारगंज थाने में पिकअप की टक्कर दिखाकर 20 लाख का क्लेम ठोका गया।

3. कागजों पर जिंदा को मुर्दा बनाना : जिंदा लोगों का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर क्लेम निकाला जाता है। पटना के कोतवाली और गांधी मैदान थानों में दर्ज मामलों में मैग्मा और श्रीराम जनरल इंश्योरेंस से 69.25 लाख इसी तरह हड़पे गए। इसमें मधुबनी की परमानेंट लोक अदालत के फर्जी सुलहनामे लगाए गए, जो 2012 से काम ही नहीं कर रही थी।

भास्कर एक्सपर्ट

पुष्कर आनंद, विशेषज्ञ, वाहन बीमा मामला

अब सिर्फ चार्जशीट पर नहीं मिलेगा क्लेम

हादसों के बाद पुलिस केस और चार्जशीट के आधार पर फर्जी गाड़ी प्लांट कर क्लेम लेने का खेल चलता रहा है। अब सिर्फ एफआईआर या चार्जशीट काफी नहीं होगी। बीमा कंपनी की शिकायत पर एसआईटी जांच की रिपोर्ट के बाद ही क्लेम मान्य होगा।

ट्रैफिक पुलिस की मनमानी पर रोक

  • ड्राफ्ट चालान बंद : मोबाइल में फोटो खींचकर ड्राफ्ट में रखने की मनमानी बंद होगी। अब डिजिटल साक्ष्य के साथ मौके पर ही चालान कटेगा।
  • 24 घंटे में छोड़ना होगा वाहन : हादसे में जब्त वाहन औपचारिक जांच के बाद 24 घंटे में छोड़ना अनिवार्य है। गाड़ी न छूटने या उत्पीड़न पर पुलिस मुख्यालय के हेल्पलाइन नंबर 9031829356 पर कॉल या वाट्सएप करें।

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