जयपुर की माणक चौक थाना पुलिस ने साइबर ठगी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर म्यूल अकाउंट के जरिए ठगी की रकम का लेन-देन करने का आरोप है।

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पुलिस के अनुसार, आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर आम लोगों से गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल करता था और SMS, OTP व फिशिंग लिंक के जरिए साइबर ठगी को अंजाम देता था।

मामले में पुलिस ने करीब 48 घंटे की तकनीकी निगरानी और जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान महेश बबरवाल (24) निवासी खाटूक क्षेत्र, जयपुर के रूप में हुई है। मामले में आरोपी से पूछताछ कर साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।

म्यूल अकाउंट और हॉटस्पॉट पर विशेष अभियान

डीसीपी नॉर्थ करण शर्मा ने बताया कि राज्य में साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए संदिग्ध बैंक खातों यानी म्यूल अकाउंट और हॉटस्पॉट पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत माणक चौक थाना पुलिस ने संदिग्ध खाते की जांच कर साइबर ठगी के नेटवर्क तक पहुंच बनाई।

म्यूल अकाउंट में जमा हो रही थी ठगी की रकम

पुलिस के अनुसार, 18 सितंबर को माणक चौक थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। जांच में सामने आया कि पंजाब नेशनल बैंक की जयपुर स्थित जवाहर बाजार शाखा के एक खाते का इस्तेमाल साइबर अपराधों में म्यूल अकाउंट के रूप में किया जा रहा था। खाते के संबंध में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर राजस्थान, बिहार और गुजरात से जुड़ी चार साइबर शिकायतें मिलीं।

इन शिकायतों में ठगी की रकम पहले इस खाते में जमा कराई गई और बाद में अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर निकाली गई। पुलिस ने बैंक स्टेटमेंट और KYC दस्तावेज हासिल कर लेन-देन की कड़ियों का विश्लेषण किया।

म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी में शामिल आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया। (ब्राउन टीशर्ट में आरोपी)

म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी में शामिल आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया। (ब्राउन टीशर्ट में आरोपी)

फर्जी सिम और मोबाइल नंबर से बचने की कोशिश

माणक चौक थानाधिकारी राकेश ख्यालिया ने बताया कि पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए KYC दस्तावेजों में दूसरे स्थान और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया था। पुराने रिकॉर्ड में दर्ज मोबाइल नंबर को भी निष्क्रिय कर दिया गया था। पुलिस टीम ने आरोपी के डिजिटल फुटप्रिंट, नेटवर्क गतिविधियों और IP/टावर लोकेशन का विश्लेषण किया।

तकनीकी निगरानी के आधार पर आरोपी के वर्तमान मोबाइल नंबर और रियल टाइम लोकेशन की पहचान की गई। इसके बाद पुलिस टीम ने करीब दो दिन तक तकनीकी सर्विलांस करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में साइबर ठगी का तरीका सामने आया

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर साइबर ठगी करने की बात स्वीकार की है। आरोपी लोगों से गोपनीय जानकारी हासिल करने के लिए फर्जी SMS, OTP और फिशिंग लिंक का इस्तेमाल करता था। इसके जरिए पीड़ितों के बैंक खातों से रकम म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर कराई जाती थी।

इसके बाद ठगी की रकम को तुरंत निकालकर अन्य माध्यमों से इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस के अनुसार, आरोपी पुलिस से बचने और अपनी पहचान छिपाने के लिए लगातार सिम कार्ड बदलता रहता था।

गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश

फिलहाल गिरफ्तार आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के आधार पर साइबर ठगी में शामिल गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी के साथ-साथ दूसरे मामलों के खुलासे की संभावना है।