प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर किसानों के साथ कथित फर्जीवाड़े के मामले में अब जांच का दायरा बढ़ गया है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की टीम गुरुवार को नागौर पहुंची है।
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SOG के DIG भुवन भूषण यादव नागौर पहुंचकर जांच की जानकारी ली। इसके बाद पुलिस की अलग-अलग टीमों ने संदिग्धों से पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं नागौर पुलिस अधीक्षक आसाराम चौधरी ने SIT टीम का गठन किया है।
इस मामले में पांचौड़ी थाना पुलिस ने बुधवार को अब तक 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें सियाराम (29), उसके भाई रविंद्र (24), तरुण (24) और सुखवीर (27) शामिल हैं। पुलिस के अनुसार आरोपियों से पूछताछ में फसल बीमा के नाम पर किसानों के साथ की जा रही धोखाधड़ी के नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं।

शुक्रवार को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की टीम नागौर पहुंची।
किसानों के खेतों पर दूसरे के नाम से कराया बीमा
जांच में सामने आया है कि गिरोह पिछले करीब 4 साल से किसानों के खेतों और खसरा नंबरों की जानकारी जुटाकर उनके नाम से फर्जी फसल बीमा करवा रहा था। आरोप है कि बीमा क्लेम की राशि आने के बाद किसानों के खातों में ट्रांसफर कर रकम हड़प ली जाती थी।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने किसानों के नाम पर नकली कागजात तैयार किए। जांच के दौरान किसानों के खेतों के खसरा नंबर, फर्जी बीमा फॉर्म, आधार कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य पहचान दस्तावेज बरामद किए गए हैं। आरोपियों के कब्जे से करीब 3 लाख रुपए नकद और वारदात में इस्तेमाल स्कॉर्पियो भी जब्त की गई है।

जांच के लिए SOG टीम सदर थाने पहुंची।
10 से 12 लोगों के नेटवर्क से जुड़े होने का शक
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी फसल बीमा कराने वाले गिरोह में करीब 10 से 12 लोग शामिल हो सकते हैं। इनमें स्टांप वेंडर, नोटरी करने वाले, बीमा कंपनी से जुड़े कर्मचारी, तहसील और जिला स्तर के कर्मचारी और एजेंट की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
आरोपी किसानों के खसरा नंबर और निजी जानकारी जुटाकर संबंधित खेत का फर्जी बीमा कराने के लिए क्रॉप इंश्योरेंस एप का गलत इस्तेमाल करते थे। इसके बाद किसानों के नाम से तैयार दस्तावेजों के आधार पर फसल बीमा क्लेम लिया जाता था।
SIT का गठन, जांच के लिए टीम गठित
नागौर SP आसाराम चौधरी ने फसल बीमा फर्जीवाड़े की जांच को और प्रभावी बनाने के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। SIT अब इस पूरे मामले की जांच को आगे बढ़ाएगी और फर्जी बीमा से लेकर क्लेम की राशि तक पहुंचने वाले नेटवर्क खंगालेगी। टीम आरोपियों से पूछताछ के साथ किसानों के दस्तावेज, खसरा नंबर, बीमा पॉलिसी और क्लेम रिकॉर्ड की जांच करेगी। साथ ही तीन-चार साल में हुए बीमा और क्लेम की भी पड़ताल की जा रही है।
तीन तहसीलों के दस्तावेज खंगाल रही पुलिस
पुलिस और SOG की टीमें नागौर, खींवसर, लाडनूं सहित अन्य तहसीलों में किए गए फसल बीमा और क्लेम से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। पिछले तीन से चार साल में जारी हुई फसल बीमा पॉलिसियों और उनके क्लेम का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि फर्जीवाड़े का नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है और इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं।

पूछताछ के लिए जाती हुई टीम।
चार अलग-अलग मामले दर्ज
फसल बीमा फर्जीवाड़े को लेकर पांचौड़ी थाने में चार अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के आधार पर मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
SOG की एंट्री के बाद जांच एजेंसियों का फोकस केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि फर्जी बीमा कराने से लेकर क्लेम की रकम तक पहुंचने वाले पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि कितने किसानों के नाम पर फर्जी बीमा और क्लेम किए गए तथा इस नेटवर्क से कुल कितनी रकम का फर्जीवाड़ा हुआ।
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