दिल्ली के सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद सोनू सूद ने छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से कैंपस के पास सस्ते और सुरक्षित हॉस्टल बनाने की अपील की।

Sonu Sood

सोनू सूद

  • Published: 08 Sep 2026, 04:05 PM IST
  • Last Updated: 08 Sep 2026, 04:05 PM IST

Sonu Sood: दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी बिल्डिंग गिरने की घटना ने छात्रों की सुरक्षा और उनके रहने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद अभिनेता सोनू सूद ने सरकार से छात्रों के लिए सुरक्षित और सस्ते हॉस्टल बनाने की अपील की है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास हुई इस घटना में कई लोगों की जान गई। बिल्डिंग में पीजी चल रहा था और हादसे के समय वहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। सोनू सूद ने कहा कि दूसरे शहरों में पढ़ने जाने वाले छात्रों को सुरक्षित रहने की जगह देना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

31 में से सिर्फ 1 छात्र को हॉस्टल
सोनू सूद ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर दिल्ली में हॉस्टल की कमी का आंकड़ा बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में करीब 7 लाख छात्र पढ़ते हैं, जबकि हॉस्टल में सिर्फ 30 हजार सीटें उपलब्ध हैं। यानी करीब 31 छात्रों में से सिर्फ एक छात्र को ही हॉस्टल मिल पाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में छात्रों को निजी पीजी या किराए के कमरों में रहना पड़ता है।

खाली सरकारी जमीन पर बनें हॉस्टल

Every year, lakhs of students leave their homes to chase a dream in another city. But are we giving them a safe place to live?
In Delhi, around 7 lakh students are enrolled, while hostel capacity is barely 30,000 — just 1 in 31 gets a hostel.
Why not identify vacant government…

— sonu sood (@SonuSood) September 8, 2026

सोनू सूद ने सरकार को सुझाव दिया कि यूनिवर्सिटी के आसपास खाली पड़ी सरकारी जमीन की पहचान की जाए। इन जगहों पर छात्रों के लिए सुरक्षित और कम कीमत वाले हॉस्टल बनाए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटी को कैंपस में अतिरिक्त हॉस्टल बनाने के लिए निर्माण की अनुमति दी जा सकती है। इससे छात्रों को सुरक्षित रहने की जगह मिलेगी और उनके परिवारों की चिंता भी कम होगी।

छोटा बदलाव बचा सकता है जिंदगी
सोनू ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से छात्रों के साथ-साथ उनके माता-पिता को भी राहत मिलेगी। वहीं, यूनिवर्सिटी और सरकार के लिए भी यह कमाई का जरिया बन सकता है। उन्होंने कहा कि नीति में किया गया छोटा सा बदलाव किसी छात्र की जिंदगी और उसके बड़े सपने को बचा सकता है।

पीजी में रहने को मजबूर छात्र
दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई कॉलेजों में हॉस्टल की सीमित सीटों के कारण बाहर से आने वाले छात्रों को निजी पीजी का सहारा लेना पड़ता है। मांग ज्यादा होने के कारण राजधानी में पीजी का कारोबार भी तेजी से बढ़ा है। सत्य निकेतन की घटना के बाद अब इन पीजी में सुरक्षा व्यवस्था और इमारतों की जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

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