SPO जवान की पत्नी मीना की हत्याकांड में झज्जर कोर्ट ने आरोपी की याचिका खारिज कर दी है।

झज्जर पुलिस के एसपीओ जवान की पत्नी की हत्या और घर से कैश व सोने के आभूषण लूटने के मामले में आरोपी राहुल उर्फ सिलेंदर को कोर्ट से चौथी बार भी राहत नहीं मिली। झज्जर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुखप्रीत सिंह की कोर्ट ने आरोपी की चौथी नियमित जमानत याचिका

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मामला 26 मई 2023 का है। पुलिस में एसपीओ के पद पर तैनात नरेंद्र की पत्नी मीना की घर में हत्या कर दी गई थी। वारदात के दौरान नरेंद्र ड्यूटी पर गए हुए थे। दोपहर करीब 12:45 बजे सूचना मिलने पर जब वह घर पहुंचे तो उनकी पत्नी की लाश रसोई में खून से लथपथ पड़ी थी। मीना के सिर, गर्दन और माथे पर गंभीर चोटों के निशान थे।

कैश और ज्वेलरी भी मिली थी गायब

घर की अलमारी खंगाली गई थी। वहां से 25 हजार रुपए कैश, सोने की तीन अंगूठियां, दो चेन और बालियां गायब मिलीं। नरेंद्र की शिकायत पर थाना आसौदा में 26 मई 2023 को हत्या, लूट, घर में घुसकर अपराध करने और साक्ष्य मिटाने समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया था।

मामला 26 मई 2023 का है। पुलिस में एसपीओ के पद पर तैनात नरेंद्र की पत्नी मीना की घर में हत्या कर दी गई थी।

मामला 26 मई 2023 का है। पुलिस में एसपीओ के पद पर तैनात नरेंद्र की पत्नी मीना की घर में हत्या कर दी गई थी।

खून के नमूनों ने बढ़ाई आरोपी की मुश्किल

पुलिस ने जांच के दौरान राहुल उर्फ सिलेंदर निवासी गांव छारा को 28 मई 2023 को गिरफ्तार किया था। कोर्ट में पेश साक्ष्यों के अनुसार, आरोपी के कपड़ों और वारदात में इस्तेमाल बताई गई लोहे की रॉड सहित अन्य बरामद वस्तुओं पर इंसानी खून मिला। फॉरेंसिक जांच में इन पर मिले खून का ब्लड ग्रुप ‘B’ पाया गया, जो मृतका के रक्त के नमूने से मेल खाता था।

कोर्ट के सामने यह तथ्य भी रखा गया कि आरोपी की निशानदेही पर मृतका के लूटे गए सोने के आभूषण विभिन्न स्थानों से बरामद किए गए। साथ ही, आरोपी को घटना से ठीक पहले मृतका के घर में जाते हुए देखे जाने का साक्ष्य भी रिकॉर्ड पर था।

बचाव पक्ष ने उठाया चश्मदीद नहीं होने का तर्क

चौथी जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता सौरभ फोगाट ने तर्क दिया कि आरोपी एफआईआर में नामजद नहीं था और घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह भी नहीं है। उन्होंने यह भी दलील दी कि राहुल 28 मई 2023 से जेल में बंद है और लंबी न्यायिक हिरासत को देखते हुए उसे जमानत दी जानी चाहिए।

वहीं, राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक पारुल ने जमानत का विरोध किया। सरकारी पक्ष ने हत्या और लूट जैसे गंभीर अपराध में फॉरेंसिक साक्ष्यों तथा बरामदगी को महत्वपूर्ण बताते हुए आरोपी को राहत नहीं देने की मांग की।

3 बार पहले भी खारिज हो चुकी जमानत

कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, राहुल की पहली जमानत याचिका 30 अक्टूबर 2024, दूसरी 24 जुलाई 2025 और तीसरी 24 फरवरी 2026 को खारिज हो चुकी थी। चौथी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि पिछली याचिका खारिज होने के बाद परिस्थितियों में ऐसा कोई नया बदलाव सामने नहीं आया, जिसके आधार पर आरोपी को जमानत दी जा सके।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुखप्रीत सिंह ने मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों को देखते हुए कहा कि केवल हिरासत की अवधि बढ़ने को जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता। इसी के साथ कोर्ट ने आरोपी राहुल उर्फ सिलेंदर की चौथी नियमित जमानत याचिका भी खारिज कर दी।