ग्वालियर20 मिनट पहलेलेखक: अनिल पटैरिया

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स्वर्ण रेखा में बन रहे एलिवेटेड रोड के कारण ग्वालियर और दक्षिण विधानसभा की अधिकांश सीवर लाइनें डैमेज हो गई हैं। इसी कारण 111 नालों का गंदा पानी सीधे स्वर्ण रेखा और मुरार नदी में गिर रहा है। इसका असर एसटीपी पर भी पड़ा है।

145 एमएलडी क्षमता वाले जलालपुर एसटीपी में रोज सिर्फ 70 एमएलडी सीवर पहुंच रहा है, जबकि 65 एमएलडी क्षमता वाले मुरार के एसटीपी में करीब 60 एमएलडी पानी पहुंच रहा है। दोनों नदियों में सीवर मिलने मेन लाइन साफ नहीं हो रही। इस कारण बारिश में पानी बैक मार रहा और नलों के रास्ते घरों तक पहुंच रहा है। इससे लोगों के बीमार होने का खतरा है।

इधर...निगम का दावा है कि ट्रीट किए गए 120 एमएलडी पानी को रोज रीयूज कर खेती के लिए जल संसाधन विभाग को दिया जाता है। अब शासन के निर्देश पर निगम ट्रीटेड पानी रेलवे और उद्योगों को देने की तैयारी कर रहा है।

इसके लिए टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट पीपीपी मॉडल पर लगाने की योजना है। वहीं प्रदेश के नगरीय प्रशासन विभाग ने ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, मुरैना, दतिया, गुना, उज्जैन, विदिशा, सतना, सागर, रीवा, रतलाम, खंडवा सहित 64 शहरों से सीवर के पानी के रीयूज का प्लान मांगा है। एसटीपी में सीवर के पानी को साफ करने के बाद गुणवत्ता की रोज जांच होती है।

जानिए... एसटीपी में कितना सीवर पहुंचा, उपयोग कहां

जलालपुर: 145 की क्षमता, पहुंच रहा 70 एमएलडी शहर के सबसे बड़े एसटीपी में रोज 70 एमएलडी सीवर पहुंच रहा है। इसे 6 पंप से ट्रीट किया जाता है। एलिवेटेड रोड निर्माण में सीवर लाइनें डैमेज होने और नालों का सीवर सीधे स्वर्ण रेखा में गिरने से प्लांट तक पानी कम पहुंच रहा है।

लाल टिपारा: 65 क्षमता, 60 एमएलडी सीवर पहुंच रहा यहां 4 पंप से रोज करीब 60 एमएलडी सीवर ट्रीट हो रहा है। मुरार नदी में नाले सीधे गिरने से नदी गंदी हो रही है। पूरा सीवर प्लांट तक नहीं पहुंच पा रहा है। नगर निगम ट्रीटेड पानी को खेती के लिए जल संसाधन विभाग को दे रहा है।

शताब्दीपुरम: क्षमता 8, दावा 16 एमएलडी आने का प्लांट नियमित नहीं चलता, जबकि जिम्मेदार 16 एमएलडी सीवर आने का दावा करते हैं। 2 पंप से सिर्फ 8 एमएलडी ट्रीट होता है। ट्रीटेड पानी का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। यह पानी सीधे एयरफोर्स के नाले में बह जाता है।

ललियापुरा: क्षमता 4 एमएलडी, पहुंच रहा 0.5 अमृत प्रोजेक्ट-1 में बने इस प्लांट के आसपास पर्याप्त आबादी नहीं है। कोठी गांव और एक-दो कॉलोनियों से सिर्फ 0.5 एमएलडी सीवर आता है, यानी क्षमता का करीब आठवां हिस्सा। ट्रीटेड पानी के उपयोग की भी ठोस व्यवस्था नहीं है।

बैजाताल: क्षमता 1 MLD, नौकायन में उपयोग प्लांट स्वर्ण रेखा में पानी भरकर नौकायन के लिए लगाया गया था। पर्याप्त पानी नहीं मिला तो ट्रीटेड पानी बैजाताल में डालना शुरू किया। पहले पंप से टैंकरों में पानी भरकर पेड़ों तक पहुंचाया जाता था, अब वह पंप भी हटा दिया गया है।

निगम को पानी लेने और देने में हर साल 2 करोड़ की बचत नगर निगम की कार्यपालन यंत्री शालिनी सिंह के मुताबिक, निगम तिघरा बांध से जल संसाधन विभाग का पानी लेता है। इसके लिए 56 पैसे प्रति क्यूबिक मीटर की दर से भुगतान होता है। इसी दर पर निगम ट्रीटेड पानी जल संसाधन विभाग को देता है। निगम को सालाना 2 करोड़ रुपए की बचत होती है। गर्मी में पेड़-पौधों की सिंचाई के लिए भी ट्रीटेड पानी दिया जाता है

रीयूज प्लान: डिमांड पर होगी ट्रीटेड पानी की सप्लाई शासन के निर्देश पर निगम नया रीयूज प्लान तैयार कर रहा है। टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट पीपीपी मॉडल पर लगाने की तैयारी है। रेलवे, एयरफोर्स, उद्योग और टेलीकॉम कंपनियों से पहले पानी की जरूरत पूछी जाएगी। मांग के अनुसार ट्रीटेड पानी की सप्लाई की जाएगी।

चिंता: 86 किमी क्षेत्र की गंदगी दोनों नदियों को कर रही मैला स्वर्ण रेखा में 84 और मुरार नदी में 27 नाले सीधे गिर रहे हैं। दोनों नदियों में अब सिर्फ बारिश के दिनों में नहीं, बल्कि 365 दिन सीवर बह रहा है। मुरार में करीब 60 किमी और स्वर्ण रेखा में करीब 26 किमी क्षेत्र के नालों की गंदगी नदी तक पहुंच रही है।

स्वर्ण रेखा: इतने नालों का गंदा पानी शहर के बीच बह रहा नदी गेट, छप्परवाला पुल, विनय नगर, शर्मा फार्म हाउस, इंद्रा नगर, राजा मंडी, मद्दी मोहल्ला, हजीरा ब्रिज, रमटापुरा, तानसेन नगर, गायत्री नगर, खेड़ापति, रवि नगर, लक्ष्मीबाई पुल, शिंदे की छावनी, जिंसी, सूबे की गोठ, न्यू शांति नगर और जटार साहब।

मुरार नदी: ये नाले नदी में फैला रहे गंदगी कालपी ब्रिज, मुरार मुक्तिधाम, कृष्णा नगर, मुरार रपटा के दो नाले और नदी पार टाल के पास का नाला नदी में मिल रहा है। इससे पूरी नदी गंदी है।

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