सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) का कोर क्षेत्र आज (गुरुवार) से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। मानसून सीजन के चलते 1 जुलाई से 30 सितंबर तक 92 दिन बंद रहने के बाद 1 अक्टूबर की सुबह मढ़ई और चूरना समेत प्रमुख गेटों से पर्यटकों को प्रवेश दिया गया। मढ़ई गेट पर स

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पहले दिन जंगल सफारी के लिए सभी 20 जिप्सियों की बुकिंग फुल रही। कुल 154 पर्यटकों ने ऑनलाइन बुकिंग कराई थी। सुबह पर्यटक जिप्सियों से जंगल सफारी के लिए रवाना हुए। मढ़ई गेट पर एसटीआर की डिप्टी डायरेक्टर ऋषिभा नेताम, सहायक संचालक शिव प्रसाद मैथानी, रेंजर राहुल उपाध्याय और विलास डोंगरे ने पर्यटकों का पुष्पगुच्छ, तिलक और मिठाई खिलाकर स्वागत किया।

मढ़ई, चूरना, पनारपानी गेट पर स्वागत मढ़ई के अलावा चूरना गेट पर रेंजर बलवंत और पनारपानी गेट पर सहायक संचालक संजीव शर्मा, रेंजर विवेक तिवारी और भूपेश चौरसिया ने पर्यटकों का स्वागत किया।

पनारपानी-नीमघान गेट पर पर्यटकों से फीता कटवाया गया। इको विकास समिति बारीआम की अध्यक्ष सरजू बाई ने हरी झंडी दिखाकर सफारी वाहनों को रवाना किया।

मढ़ई गेट पर सतपुड़ा साथी की ग्रामीण बेटियों ने फीता काटकर गेट खोला।

मढ़ई गेट पर सतपुड़ा साथी की ग्रामीण बेटियों ने फीता काटकर गेट खोला।

आठ महीने के लिए खुला कोर क्षेत्र एसटीआर क्षेत्र संचालक राखी नंदा ने बताया कि मानसून सीजन के चलते कोर क्षेत्र 92 दिन तक बंद था। गुरुवार से करीब आठ महीने के लिए इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है।

अब पर्यटक जंगल सफारी के दौरान सतपुड़ा की वादियों, पक्षियों और विभिन्न वन्यजीवों का दीदार कर सकेंगे। गेट खुलने से पहले सफारी और पर्यटकों की सुरक्षा से जुड़ी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं।

एसटीआर प्रबंधन ने ‘नन्हीं की आवाज’ साइकिल अभियान की भी शुरुआत की।

एसटीआर प्रबंधन ने ‘नन्हीं की आवाज’ साइकिल अभियान की भी शुरुआत की।

‘नन्हीं की आवाज’ साइकिल से करेंगे जागरूक कोर क्षेत्र खुलने के साथ ही एसटीआर प्रबंधन ने ‘नन्हीं की आवाज’ साइकिल अभियान की भी शुरुआत की। डिप्टी डायरेक्टर ऋषिभा नेताम ने तीन साइकिलों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान रेंजर विलास डोंगरे मौजूद रहे।

ये साइकिलें एसटीआर के बफर क्षेत्र से लगे गांवों में जाएंगी। ग्रामीणों को जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा, जंगल में आग नहीं लगाने और वन्यजीव दिखाई देने पर वन विभाग को सूचना देने के लिए जागरूक किया जाएगा।

साइकिलों पर ‘नन्हीं की आवाज, सतपुड़ा साथी बनकर वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा करें’ स्लोगन लिखा गया है।

शुरुआत में सीमित बीटों में होगी सफारी कोर क्षेत्र में कुल 186 बीट हैं, लेकिन शुरुआत में पर्यटकों को सभी बीटों में नहीं ले जाया जाएगा। सड़कों की स्थिति और बारिश के बाद की परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल सीमित बीटों में ही सफारी कराई जाएगी।

मढ़ई और चूरना क्षेत्र में जिप्सी सफारी के साथ नाव से जल सफारी की भी व्यवस्था रहेगी। हालांकि क्रूज और सोलर बोट की सेवा फिलहाल शुरू नहीं हुई है।

STR में देश-विदेश से पर्यटक सतपुड़ा पहुंचते हैं।

STR में देश-विदेश से पर्यटक सतपुड़ा पहुंचते हैं।

जिप्सी की अधिकतम रफ्तार 20 किमी प्रति घंटा एसटीआर में इस बार जिप्सी की अधिकतम रफ्तार 20 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। पहले अच्छी और सीधी सड़कों पर जिप्सियां इससे अधिक गति से चलती थीं, लेकिन अब निर्धारित गति सीमा का पालन करना होगा।

सोलर बोट खराब, दूसरी नाव से कराई जा रही नदी पार ग्राम सारंगपुर-मढ़ई क्षेत्र में कोर गेट तक पहुंचने के लिए फिलहाल पर्यटकों को सोलर बोट की जगह दूसरी नाव से नदी पार कराई जा रही है। पर्यटकों को जल सफारी के दौरान जलीय जीवों का दीदार भी कराया गया।

सोलर बोट में तकनीकी खराबी होने के कारण फिलहाल इसका संचालन शुरू नहीं हो पाया है। सुधार कार्य पूरा होने के बाद इसके शुरू होने की संभावना है।

एसटीआर में 80 से अधिक बाघ सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 80 से अधिक बाघ बताए गए हैं। इसके अलावा करीब 233 बारहसिंगा, बायसन, तेंदुए, मोर सहित कई अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं। इन्हें देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक सतपुड़ा पहुंचते हैं।

बारिश के बाद तवा बांध का बैकवॉटर भी कई क्षेत्रों में मौजूद है। ऐसे में पर्यटकों को किन-किन बीटों में सफारी कराई जाएगी, यह सड़कों और जलस्तर की स्थिति के आधार पर तय किया जा रहा है।

पनारपानी नीमघान गेट पर पर्यटकों से फीता कटवाया गया।

पनारपानी नीमघान गेट पर पर्यटकों से फीता कटवाया गया।