नई दिल्ली: Subsidy on Urea: भारत में यूरिया और दूसरे उर्वरकों की कीमत व सप्लाई को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। इसी बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत बढ़ने के बावजूद सरकार किसानों को सस्ती खाद (Subsidy on Urea) उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि एक बोरी यूरिया पर सरकार करीब 2,700 रुपये तक की सब्सिडी दे रही है। सरकार का मकसद बढ़ती लागत का असर किसानों पर पड़ने नहीं देना है।

महंगी आयात लागत का बोझ सरकार ने उठाया

वित्त मंत्री के मुताबिक, कोरोना महामारी और पश्चिम एशिया में तनाव जैसी परिस्थितियों के कारण यूरिया की आयात लागत कई बार करीब 3,000 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गई थी। इसके बावजूद किसानों को महंगी खाद खरीदने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ा। सरकार ने कीमत का बड़ा हिस्सा खुद वहन किया, ताकि किसानों को खेती के लिए जरूरी यूरिया कम कीमत (Subsidy on Urea) पर मिलता रहे। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

कैसे मिलती है यूरिया पर सब्सिडी?

यूरिया सब्सिडी के तहत सरकार इसकी वास्तविक लागत और किसान से ली जाने वाली कीमत के बीच का अंतर खुद वहन करती है। यह सहायता उर्वरक कंपनियों और आयातकों को दी जाती है। मौजूदा व्यवस्था में 45 किलो यूरिया की बोरी का एमआरपी 242 रुपये निर्धारित है। इसमें नीम कोटिंग शुल्क और लागू टैक्स शामिल नहीं होते। इस व्यवस्था के कारण वैश्विक बाजार में कीमत बढ़ने पर भी किसानों को अपेक्षाकृत सस्ती यूरिया मिलती है।

PM किसान और KCC पर भी फोकस

सरकार केवल खाद पर सब्सिडी (Subsidy on Urea) देने तक सीमित नहीं है। किसानों को आर्थिक सहायता और खेती के लिए जरूरी वित्त उपलब्ध कराने के लिए PM किसान सम्मान निधि और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जैसी योजनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि जरूरी कृषि सब्सिडी में कमी न आए। इससे खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

आंध्र प्रदेश में खेती को बढ़ावा देने की तैयारी

आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कृषि और बागवानी क्षेत्र से जुड़ी कई पहलों पर भी चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कृषि क्षेत्र में निवेश और सुविधाएं बढ़ाने पर काम कर रही हैं। नई परियोजनाओं और सरकारी सहयोग से खेती और बागवानी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

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