Time Updated: Friday, September 18, 2026, 14:42 [IST]

Nithari Kand Surendra Koli Death: नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड में करीब दो दशक तक कानूनी लड़ाई लड़ने वाले सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत हो गई। रिपोर्टों के मुताबिक, 18 सितंबर 2026 को उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में एक चाय की दुकान के अंदर उसका शव फंदे से लटका मिला। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और जांच शुरू कर दी है।

कोली कुछ समय से हरिद्वार में रह रहा था और कथित तौर पर चाय की दुकान चला रहा था। पुलिस के मुताबिक, मौके से कोई नोट नहीं मिला है। ऐसे में उसने जान क्यों की, इसकी वजह अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है। सबसे अहम बात यह है कि कोली की मौत उस समय हुई, जब निठारी कांड से जुड़े सभी मामलों में उसे कानूनी तौर पर बरी किया जा चुका था। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी लंबित मामले में भी उसकी दोषसिद्धि रद्द कर तत्काल रिहाई का आदेश दिया था। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर क्यों बरी हुआ? कैसे? क्यों ने दी जान? पूरी टाइमलाइन के साथ...

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Surendra Koli Haridwar Connection: हरिद्वार में क्या हुआ?

सप्त ऋषि पुलिस के मुताबिक, सुरेंद्र कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था। हरिद्वार से 4 किलोमीटर दूर भूपतवाला के सप्त सरोवर रोड स्थित लालमाता मंदिर के सामने वह चाय का खोखा चला रहा था। शुक्रवार (18 सितंबर) सुबह दुकान के अंदर उसका शव फंदे से लटका मिला। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने आसपास के लोगों से भी पूछताछ शुरू कर दी है।

फिलहाल, पुलिस ने मौत के पीछे किसी एक वजह की पुष्टि नहीं की है। सुसाइड नोट नहीं मिलने के कारण यह कहना जल्दबाजी होगी कि उसने किस वजह से यह कदम उठाया।

Who Was Surendra Koli: कौन था सुरेंद्र कोली?

सुरेंद्र कोली मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण क्षेत्र के मंगरूखाल गांव का रहने वाला था। वह नोएडा के सेक्टर-31 स्थित D-5 मकान में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंधेर के घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था। साल 2006 के दौरान निठारी इलाके से कई बच्चों और युवतियों के गायब होने की शिकायतें सामने आई थीं। 29 दिसंबर 2006 को D-5 के पीछे नाले और आसपास के इलाके से मानव अवशेष मिलने के बाद यह मामला देशभर में चर्चा में आया। बाद में जांच CBI को सौंप दी गई।

निठारी कांड में कोली पर क्या आरोप लगे थे?

निठारी से जुड़े अलग-अलग मामलों में कोली पर हत्या, अपहरण, दुष्कर्म और सबूत मिटाने समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए। उसके खिलाफ अलग-अलग मुकदमे चले और कुछ मामलों में ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी ठहराते हुए मौत की सजा भी सुनाई थी।

2009 में एक मामले में उसे मौत की सजा सुनाई गई। 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने उस दोषसिद्धि और मौत की सजा को बरकरार रखा था। बाद में 2015 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दया याचिका के निपटारे में हुई देरी को देखते हुए मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।

फिर ऐसा क्या हुआ कि कोली जेल से बाहर आ गया?

यह निठारी केस की सबसे बड़ी कानूनी पलटी थी। 16 अक्टूबर 2023 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निठारी से जुड़े 12 मामलों में कोली को बरी कर दिया। अदालत ने अभियोजन के साक्ष्यों, कथित स्वीकारोक्ति और बरामदगी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। अदालत के मुताबिक अभियोजन पक्ष अपराध को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं कर सका। इसके बाद राज्य की अपीलें सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। 30 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने 12 मामलों में बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा। लेकिन उस समय भी कोली एक आखिरी मामले में दोषसिद्धि के कारण जेल में था।

11 नवंबर 2025 को पूरी तरह बरी हुआ

निठारी से जुड़े आखिरी लंबित मामले में सुरेंद्र कोली की दोषसिद्धि को सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर 2025 को रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी क्यूरेटिव पिटीशन मंजूर करते हुए पहले की दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया और आदेश दिया कि यदि किसी अन्य मामले में उसकी जरूरत नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए। इसके साथ ही निठारी से जुड़े उसके खिलाफ लंबित सभी आपराधिक मामलों का कानूनी अंत हो गया।

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सुप्रीम कोर्ट ने आखिर बरी क्यों किया?

सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले में साक्ष्यों और जांच की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल सामने आए। अदालत ने कथित इकबालिया बयान, बरामदगी की प्रक्रिया, फॉरेंसिक साक्ष्यों और जांच के तरीके में कई कमियां दर्ज कीं। कोर्ट ने कहा कि जिस साक्ष्य के आधार पर दूसरे मामलों में बरी किया गया, उसी साक्ष्य के आधार पर आखिरी मामले में दोषसिद्धि कायम रखना उचित नहीं था। अदालत ने यह भी कहा कि गंभीर अपराधों में भी केवल संदेह के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती। अपराध को कानूनी मानकों के मुताबिक संदेह से परे साबित करना जरूरी है।