Surya Grahan 2026: अगस्त 2026 को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. सबसे खास बात यह है कि इसी दिन हरियाली अमावस्या का पावन पर्व भी मनाया जाएगा. धार्मिक और वैदिक ज्योतिषशास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल के समय ब्रह्मांड में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव काफी हद तक बढ़ जाता है. इसका सीधा असर मानव जीवन के साथ-साथ पूरी दुनिया की गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है. इसी वजह से ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, खान-पान और अन्य धार्मिक कार्यों से जुड़े कई सख्त नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है. विशेष तौर पर गर्भवती महिलाओं को इस दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने और घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है. ऐसे में हर किसी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह ग्रहण भारत में दिखेगा और क्या इसका सूतक काल यहां लागू होगा.

सूर्य ग्रहण का सटीक समय और अवधि

12 अगस्त को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार रात के समय शुरू होगा. इसका समय रात को 9 बजकर 04 मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानी 13 अगस्त की सुबह 04 बजकर 25 मिनट तक रहेगा. चूंकि इस ग्रहण की शुरुआत से लेकर इसकी समाप्ति तक का पूरा समय भारत में रात का रहेगा, इसलिए यह भारत के किसी भी हिस्से से दिखाई नहीं देगा.

क्या भारत में मान्य होगा सूतक काल?

ज्योतिषविदों और धर्मशास्त्र के जानकारों के अनुसार, यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा. हालांकि, रात के समय लगने के कारण यह भारत में पूरी तरह अदृश्य रहेगा. शास्त्रों का नियम है कि जो ग्रहण जहां दिखाई नहीं देता, वहां उसका सूतक काल और उससे जुड़े धार्मिक नियम मान्य नहीं होते हैं. इसलिए भारत में रहने वाले लोगों को सूतक काल के नियमों को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है. इस दिन सभी मंदिर खुले रहेंगे और दैनिक पूजा-पाठ बिना किसी बाधा के जारी रहेगी.

दुनिया के किन हिस्सों में दिखाई देगा यह ग्रहण?

यह खगोलीय घटना दुनिया के कई अन्य देशों में स्पष्ट रूप से देखी जा सकेगी. सबसे पहले यह पूर्ण सूर्य ग्रहण उत्तरी रूस के इलाकों में नजर आएगा. इसके बाद यह स्पेन, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और पुर्तगाल के उत्तर-पूर्वी हिस्सों से होकर गुजरेगा. इसके अलावा यूरोप के ज्यादातर देशों, कनाडा, अमेरिका के उत्तरी हिस्सों और उत्तर-पश्चिम अफ्रीका में आंशिक सूर्य ग्रहण देखने को मिलेगा. अलग-अलग स्थानों पर ग्रहण के दिखाई देने का समय भी भिन्न रहेगा.

कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र पर ग्रहण का प्रभाव

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगने जा रहा है. सूर्य को नवग्रहों का राजा और आत्मा का कारक माना जाता है. ऐसे में कर्क राशि में ग्रहण लगने से सभी 12 राशियों के जातकों के जीवन में उथल-पुथल देखने को मिल सकती है. कुछ राशियों के लिए यह समय करियर और धन के मामले में अपार सफलता लेकर आएगा, तो वहीं कुछ राशि के जातकों को पारिवारिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.

ग्रहण काल में क्या करें और क्या न करें

भले ही भारत में सूतक काल मान्य न हो, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण की अवधि में कुछ बातों का ध्यान रखना हमेशा शुभ माना जाता है. ग्रहण के समय भोजन पकाने और खाने से परहेज करना चाहिए. यदि आप किसी ऐसे देश में हैं जहां ग्रहण दिखाई दे रहा है, तो नग्न आंखों से आसमान में देखने की गलती बिल्कुल न करें.

इसके अलावा ग्रहण के दौरान किसी भी नुकीली वस्तु जैसे कैंची, सूई या चाकू का प्रयोग करने से बचें. घर में शांति बनाए रखें और भगवान के नाम का जाप करें. ग्रहण खत्म होने के बाद पूरे घर में गंगाजल छिड़ककर मंदिर की सफाई करें और देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्नान कराएं. अंत में अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को दान-पुण्य अवश्य करें.

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डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है. इनकी सटीकता और पूर्णता की पुष्टि की जिम्मेदारी न्यूज नेशन की नहीं है. पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.