Time Updated: Wednesday, August 12, 2026, 19:00 [IST]

Tatkal Ticket Scam: तत्काल टिकटों की कथित अनधिकृत बिक्री और टिकट दलाली पर रेलवे ने बड़ी कार्रवाई की है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार (12 अगस्त) को लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि वर्ष 2023 से जून 2026 तक भारतीय रेलवे में तत्काल टिकटों की अवैध बिक्री और दलाली से जुड़े मामलों में 65 रेलवे कर्मचारियों और 13,580 दलालों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें पश्चिम रेलवे के 9 रेलवे कर्मचारी भी शामिल हैं।

यह जानकारी निर्दलीय सांसद पटेल उमेशभाई बाबूभाई के सवाल के जवाब में दी गई। सांसद ने तत्काल टिकटों की बिक्री में रेलवे कर्मचारियों और दलालों के बीच कथित मिलीभगत को लेकर सरकार से जानकारी मांगी थी। उन्होंने खास तौर पर पश्चिम रेलवे में तत्काल टिकट दलालों के खिलाफ लगातार मिल रही शिकायतों का मुद्दा उठाया था।

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Tatkal Ticket में मिलीभगत पर क्या बोली सरकार?

सांसद ने सरकार से पूछा था कि क्या पिछले तीन वर्षों के दौरान रेलवे कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल टिकटों की अनधिकृत बिक्री से जुड़े मामलों में कोई कार्रवाई की गई है। इसके जवाब में रेल मंत्री ने रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 143 का हवाला दिया। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे टिकटों की अनधिकृत खरीद-फरोख्त या दलाली में शामिल लोगों के खिलाफ इसी कानून के तहत कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि 2023 से 2025 और जून 2026 तक भारतीय रेलवे में कुल 65 रेलवे कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया।

इनमें से 9 कर्मचारी पश्चिम रेलवे में गिरफ्तार किए गए। इसके अलावा इसी अवधि में रेलवे ने 13,580 टिकट दलालों को गिरफ्तार किया। रेलवे अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है।

सरकार के आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब तत्काल टिकटों की बुकिंग को लेकर यात्रियों की शिकायतें लगातार चर्चा में रहती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मियों की छुट्टियों और अन्य व्यस्त सीजन में तत्काल कोटे की सीटें बहुत तेजी से भर जाती हैं। ऐसे में टिकटों की उपलब्धता और उनकी कथित अवैध बिक्री को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

क्या रेलवे कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत हुई?

लोकसभा में पूछे गए सवाल में रेलवे कर्मचारियों और टिकट दलालों के बीच कथित सांठगांठ का मुद्दा उठाया गया था। हालांकि, रेल मंत्री के जवाब में यह नहीं कहा गया कि गिरफ्तार किए गए सभी 65 कर्मचारी दलालों के साथ मिलीभगत में शामिल थे। इसलिए 65 कर्मचारियों की गिरफ्तारी को सीधे तौर पर 'दलालों के साथ मिलीभगत साबित' होने के रूप में देखना सही नहीं होगा।

सरकार ने केवल यह बताया है कि संबंधित अवधि में रेलवे कर्मचारियों समेत आरोपियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की गई और 65 रेलवे कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। किस मामले में किस कर्मचारी की क्या भूमिका थी और किन मामलों में अदालत ने दोष साबित किया, इसकी अलग-अलग जानकारी इस जवाब में नहीं दी गई है।

रेलवे ने दलालों पर कैसे कसा शिकंजा?

रेल मंत्री ने कहा कि आरक्षण प्रणाली के दुरुपयोग को रोकने के लिए रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF नियमित तौर पर जांच और अभियान चलाता है। इसका उद्देश्य उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना है जो गलत तरीके से रेलवे की आरक्षण व्यवस्था का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। रेलवे की ओर से समय-समय पर टिकट दलालों के खिलाफ अभियान चलाए जाते हैं। इन अभियानों में संदिग्ध टिकट बुकिंग गतिविधियों की जांच, अवैध टिकटों की पहचान और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शामिल होती है।

तत्काल टिकटों की मांग अधिक होने के कारण दलाली पर रोक लगाना रेलवे के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। तत्काल कोटा मूल रूप से उन यात्रियों के लिए बनाया गया है जिन्हें कम समय में यात्रा करनी होती है। ऐसे में यदि सीटें संगठित तरीके से पहले ही बुक कर ली जाएं और बाद में ऊंची कीमत पर बेची जाएं तो वास्तविक यात्रियों के लिए टिकट हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

रेलवे एक्ट की धारा 143 क्या कहती है?

रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 143 रेलवे टिकटों की अनधिकृत खरीद और बिक्री से संबंधित है। इसके तहत बिना अधिकृत अनुमति के रेलवे टिकटों की खरीद-बिक्री या इस तरह के कारोबार में शामिल होने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। रेल मंत्री ने इसी प्रावधान का उल्लेख करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है। इसका मकसद रेलवे टिकटों की दलाली पर अंकुश लगाना और आरक्षण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाए रखना है।

पश्चिम रेलवे में कितने एस्केलेटर और लिफ्ट?

सांसद पटेल उमेशभाई बाबूभाई ने केवल टिकट दलाली का मुद्दा नहीं उठाया था। उन्होंने पश्चिम रेलवे के कई स्टेशनों पर यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं से जुड़ा सवाल भी पूछा। उन्होंने लिफ्ट, एस्केलेटर और फुट ओवरब्रिज यानी FOB के लंबे समय तक काम नहीं करने का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि क्या कुछ स्टेशनों पर इन्हें रिकॉर्ड में चालू दिखाया जाता है, जबकि वे वास्तव में लंबे समय से बंद हैं। इसके जवाब में रेल मंत्री ने पश्चिम रेलवे में उपलब्ध सुविधाओं का आंकड़ा भी लोकसभा में रखा। अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, पश्चिम रेलवे के 46 रेलवे स्टेशनों पर 191 एस्केलेटर और 86 रेलवे स्टेशनों पर 240 लिफ्ट लगाई गई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम रेलवे के किसी भी स्टेशन पर लिफ्ट, एस्केलेटर या फुट ओवरब्रिज स्थायी रूप से बंद नहीं है।

(PTI के इनपुट के साथ)