TET Chhattisgarh Teachers Demands: पूरे देश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर बवाल मचा हुआ है। शिक्षकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

 सुप्रीम कोर्ट द्वारा टीईटी पास करने की समय सीमा 31 अगस्त 2028 तय कर दी है यानी सभी शिक्षकों को अगले दो साल में यह परीक्षा हर हाल में पास करनी होगी।

इस सुप्रीम फैसले के बाद छत्तीसगढ़ के शिक्षक संघों ने साय सरकार से विभागीय स्तर पर टीईटी कराने की मांग और तेज कर दी है।

विभागीय स्तर पर TET कराने की मांग

शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि जब एमपी समेत देश के पांच राज्यों में टीईटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पक्ष रख रही हैं तो छत्तीसगढ़ की ओर से ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा है। टीईटी को लेकर शिक्षक चिंतित हैं।

छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे, प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी और प्रमुख महामंत्री सतीश ब्यौहरे ने सरकार से टीईटी मामले में हस्तक्षेप करने और विभागीय स्तर पर ही टीईटी कराने की मांग की है।

25-30 साल की सेवा वाले टीचर को राहत दी जाए

दुबे ने बताया कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए भर्ती नियमों में टीईटी अनिवार्य नहीं था इसलिए राज्य सरकार ने 25-30 साल से सेवारत शिक्षकों पर ध्यान नहीं दिया। उनका कहना है कि ऐसे शिक्षकों को टीईटी जैसी परीक्षा से राहत दी जानी चाहिए।

डीपीआई यह परीक्षा क्यों नहीं करा सकता ?

छग टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि मध्य प्रदेश में जब सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की जा सकती है तो छत्तीसगढ़ में डीपीआई क्यों नहीं यह परीक्षा अपने स्तर पर करा सकता है।

शिक्षक संगठनों ने यह भी मांग की

शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार से अन्य राज्यों की तरह त्वरित विभागीय टीईटी परीक्षा आयोजित करने, प्रभावित शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण देने और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है।

MP-CG में दो लाख शिक्षक होंगे प्रभावित

टीईटी की अनिवार्यता से छत्तीसगढ़ में 80 हजार और मध्यप्रदेश में एक लाख से ज्यादा शिक्षक सीधे तौर पर प्रभावित होने वाले हैं। दोनों प्रदेशों के शिक्षक संगठनों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका को लेकर सरकार की तरफ से सहयोग नहीं मिल रहा है। छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि संसद में भी विषय पर चर्चा होना थी। जिसमें सरकार के शिक्षा मंत्री की तरफ से कोई ऐसा सुझाव नहीं रखा गया जिससे शिक्षकों को राहत मिल सके।

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शिक्षकों में आक्रोश, आंदोलन की तैयारी

दुबे का कहना है कि टीईटी 2010 से लागू हुई है, ऐसे में इससे पहले के नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करना चाहिए। राज्य सरकार इस मामले में कोई मदद नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। टीईटी को शिक्षकों में काफी आक्रोश है। शिक्षक लामबंद हो रहे हैं। आंदोलन की रणनीति बनाई जा रही है। इसके लिए जल्द शिक्षक संघ बैठक करने वाले हैं।

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