Published: Tuesday, September 22, 2026, 21:39 [IST]
Trump Threatens Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित किया। करीब 7 महीने से चल रहे अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच ट्रम्प के भाषण का सबसे बड़ा संदेश तेहरान के लिए था। उन्होंने कहा कि अमेरिका के सामने अब एक बड़ा फैसला है। ईरान के साथ समझौता करना या उसके शासन का 'सफाया' करना। ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान को दोबारा अमेरिका या दूसरे देशों को नुकसान पहुंचाने का मौका नहीं दिया जा सकता।
ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाया है और उसका मकसद ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था। साथ ही उन्होंने दूसरे देशों से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की अपील की। आपको बता दें कि, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 23 सितंबर को अमेरिका पहुंच रहे हैं। ट्रंप उनका स्वागत करेंगे। 24 सितंबर 2026 को व्हाइट हाउस, वॉशिंगटन डीसी में ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात होगी। आइए समझते हैं ट्रम्प के UN भाषण की 10 बड़ी बातें...
1. ईरान को लेकर ट्रम्प की सबसे बड़ी चेतावनी, 'समझौता या सफाया'
ट्रम्प ने कहा कि उनके सामने ईरान को लेकर एक बड़ा फैसला है। उनके मुताबिक, एक रास्ता समझौते का है और दूसरा ईरान के शासन को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ने का। उन्होंने संकेत दिया कि अगर तेहरान समझौते के लिए तैयार नहीं होता तो अमेरिका आगे सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ट्रम्प ने कहा कि ऐसा जल्द किया जाना चाहिए, ताकि ईरान को भविष्य में दूसरे देशों या लोगों को नुकसान पहुंचाने का मौका न मिले।
2. ट्रम्प का दावा, 'ईरान को परमाणु हथियार नहीं लेने देंगे'
ट्रम्प ने अपने भाषण में अमेरिका-ईरान संघर्ष को सही ठहराते हुए कहा कि उनकी कार्रवाई का एक प्रमुख उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी और सहयोगी सैन्य कार्रवाई से ईरान की सैन्य संरचना को भारी नुकसान हुआ है। ट्रम्प ने कहा कि अगर दुनिया एकजुट होकर ईरान पर दबाव बनाए रखे तो वह मध्य पूर्व में लंबे समय से चले आ रहे ईरानी प्रभाव और आतंकवाद के खतरे को खत्म कर सकती है।
3. दूसरे नेताओं पर निशाना, 'वे शांति की बात करते रहे, मैंने कार्रवाई की'
ट्रम्प ने खुद को ऐसे नेता के रूप में पेश किया जिसने केवल शांति की बातें नहीं कीं, बल्कि सैन्य और कूटनीतिक कार्रवाई भी की। उनका तर्क था कि दूसरे नेता खतरों को नजरअंदाज करते रहे, जबकि उनके प्रशासन ने उनका सामना किया।
4. ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की अपील
ट्रम्प ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर सभी देश मिलकर तेहरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करते हैं तो ईरान पर दबाव बढ़ेगा। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ऐसी रणनीति से वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट आ सकती है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है।
5. होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का दावा
ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा कर रही है और इस रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल गुजर रहा है। अमेरिकी प्रशासन पहले भी दावा कर चुका है कि उसकी सेनाएं स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए हुए हैं और बड़ी संख्या में व्यावसायिक जहाज अमेरिकी सुरक्षा में इस रास्ते से गुजर चुके हैं। अगस्त में व्हाइट हाउस ने लगभग 1,500 जहाजों और करीब 750 मिलियन बैरल कच्चे तेल के अमेरिकी सुरक्षा में गुजरने का दावा किया था।
6. AI को 'Artificial Intelligence' नहीं, 'Super Intelligence' कहने की बात
ट्रम्प ने अपने भाषण में AI को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब Artificial Intelligence के लिए 'Super Intelligence' शब्द का इस्तेमाल करेगा। उन्होंने AI को भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक बताते हुए कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र में विकास को रोकने वाले ज्यादा नियम नहीं लगाएगा। ट्रम्प का जोर AI की रफ्तार और अमेरिकी तकनीकी बढ़त बनाए रखने पर रहा।
7. ग्रीनलैंड में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी बढ़ेगी
ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को लेकर डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ हुए सुरक्षा समझौते का भी जिक्र किया। इस समझौते के तहत ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की योजना है। रिपोर्टों के मुताबिक, मौजूदा Pituffik Space Base के अलावा दो अन्य स्थानों पर अमेरिकी सैन्य सुविधाओं के विस्तार की योजना है। ट्रम्प प्रशासन इसे आर्कटिक और पश्चिमी देशों की सुरक्षा से जोड़ रहा है। ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है। इस मुद्दे पर अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच पहले काफी राजनयिक तनाव भी रहा है। नया समझौता उसी विवाद को सुरक्षा सहयोग के ढांचे में आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
8. ICC और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर ट्रम्प का हमला
ट्रम्प ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने ICC को ऐसी संस्था के तौर पर पेश किया जिस पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं है और अमेरिकी संप्रभुता के खिलाफ इसकी भूमिका पर आपत्ति जताई। अमेरिका लंबे समय से ICC के अधिकार क्षेत्र और अमेरिकी नागरिकों पर उसके संभावित अधिकार को स्वीकार नहीं करता रहा है।
9. वेनेजुएला और क्यूबा को लेकर भी कड़ा संदेश
ट्रम्प ने वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाए जाने को भी अपने भाषण में अमेरिकी शक्ति के उदाहरण के तौर पर पेश किया। जनवरी 2026 में अमेरिकी कार्रवाई के बाद मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका ले जाया गया था। संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेजों में भी 3 जनवरी की अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और मादुरो को हिरासत में लिए जाने का जिक्र है। ट्रम्प ने क्यूबा की सरकार पर भी निशाना साधा और उसके भविष्य को लेकर कड़ा बयान दिया। उनके इस बयान के दौरान क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल के हॉल से बाहर जाने की खबरें सामने आईं।
10. UN और शिपिंग कार्बन नियमों पर भी ट्रम्प का निशाना
ट्रम्प ने संयुक्त राष्ट्र की फंडिंग और कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए। अमेरिका की ओर से UN फंडिंग में कटौती और संगठन की वित्तीय समस्याओं को लेकर पहले से विवाद चल रहा है। UN के नियमित बजट में कटौती और स्टाफ कम करने की योजनाओं का भी उल्लेख सार्वजनिक दस्तावेजों में हुआ है। ट्रम्प ने शिपिंग उद्योग पर प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय उत्सर्जन-आधारित शुल्क व्यवस्था का भी विरोध किया।