टीवी9 भारतवर्ष के 'भारतवर्ष के टॉपर' एजुकेशन समिट में भारतीय शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों पर चर्चा हुई. विशेषज्ञों ने छात्रों पर बढ़ते दबाव, पुराने पाठ्यक्रम और सीमित करियर विकल्पों पर चिंता जताई. वहीं मानसिक स्वास्थ्य और नए करियर अवसरों को लेकर भी बात की गई.

TV9 भारतवर्ष एजुकेशन समिट
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TV9 भारतवर्ष ने सोमवार को अपने एजुकेशन समिट भारतवर्ष के टॉपर का आयोजन किया. कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था और उसमें सुधार के साथ ही छात्रों के बारे में बात की गई. कार्यक्रम में शिक्षक अभिनव शर्मा, एजुकेशन कंसल्टेंट जितिन चावला, साइकेट्रिस्ट डॉक्टर संदीप वोहरा ने शिरकत की.
इस मौके पर शिक्षक अभिनव शर्मा ने बच्चों में बढ़ते प्रेशर के बारे में बात की.उन्होंने कहा कि हर बच्चा रेंक के पीछे भागता है. बच्चों को शुरू से ही यही कहा जाता है कि उन्हें सबसे ज्यादा नंबर लाना है उन्हें टॉप करना है. उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही बच्चों पर किताबों का प्रेशर रहता है. जबकी दूसरी जगहों के एजुकेशन सिस्टम में ऐसा नहीं. उन्होंने कहा कि दूसरी जगहों पर बच्चे पर निर्भर करता है. वहां परीक्षा देने के लिए भी बच्चे को 7 से 8 दिन मिलते हैं. जिस दिन उसका मूड ठीक होगा वो परीक्षा दे सकता है.
‘एजुकेशन सिस्टम अपडेट नहीं हुआ’
उन्होंने कहा कि भारत का एजुकेशन सिस्टम उतना अपडेट नहीं हुआ जितना उसे होना चाहिए. उन्होंने कहा कि जिन किताबों को उन्होंने पढ़ा वहीं किताबें उनके पिता ने भी पढ़ीं. शिक्षक अभिनव शर्मा ने कहा कि पेरेंट्स बच्चों का फॉलोअप नहीं लेते बस बता देते हैं कि उन्हें अच्छे नंबर लाने हैं
उन्होंने कहा कि देश में कोचिंग का चलन इसलिए बढ़ा क्योंकि भारत की शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर होती रही. उन्होंने कहा कि स्कूलों में बच्चों को वैसी एजुकेशन नहीं मिल पाई जैसी मिलनी चाहिए थी. उन्होंने कहा कि 12वीं के बच्चे को स्कूल में जो पढ़ाया जाता है वो नीट की परीक्षा में नहीं पूछा जाता ऐसा क्यों होता है. उन्होंने कहा कि बच्चे को शुरुआत में ही बोल दिया जाता है कि उसे डॉक्टर और इंजीनियर बनना है जबकि उसके बेसिक एजुकेशन सिस्टम को डेवलप ही नहीं किया जाता.
‘करियर ऑप्शन के बारे में नहीं जानकारी’
वहीं एजुकेशन कंसल्टेंट जितिन चावला ने कहा कि देश में कई ऐसे स्कूल हैं जो अब काफी बदल गए हैं. जहां के बच्चे अपने स्टार्टअप कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत में अभिभावक बच्चों के लिए सिर्फ 14 करियर ऑप्शन ही सोचते हैं जबकि और भी कई ऑप्शन हैं. उन्होंने कहा दुनिया में 78 हजार से ज्यादा करियर ऑप्शन हैं. उन्होंने कहा कि कई ऐसे कोर्स हैं जिनके बारे में लोगों को पता नहीं है.
‘बच्चों की मेंटल हेल्थ पर फोकस करना जरूरी’
इधर साइकेट्रिस्ट डॉक्टर संदीप वोहरा ने कहा कि जैसे ही बच्चा 9वीं क्लास में जाता है बच्चों और अभिभावकों पर प्रेशर बढ़ जाता है. उन्होंने बताया कि उनके पास 5वीं और 6वीं क्लास के बच्चे भी कंसल्टेंटिंग के लिए आते हैं. उन्होंने कहा कि बच्चों पर पेरेंट्स का प्रेशर सबसे ज्यादा है. उन्होंने कहा कि आद बच्चों की मेंटल हेल्थ पर फोकस करना बेहद जरूरी है.

जूही उरूषा खान
जूही उरूषा खान पिछले 12 साल से पत्रकारिता से जुड़ी हुई हैं. भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से फिल्म जर्नलिज्म की पढ़ाई की. इसके बाद दिल्ली आकर BAG में एंटरटेनमेंट बीट पर इंटर्नशिप की. बाद में CNEB न्यूज चैनल में एंटरटेनमेंट बीट में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया, साथ ही प्रोग्रामिंग को भी देखा.<p></p>CNEB के बाद VOICE OF INDIA में एंटरटेनमेंट बीट पर बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर काम करना शुरू किया. यहां से फिर जनसंदेश न्यूज चैनल के साथ जुड़ीं और प्रोग्रामिंग में काम किया. इसके बाद 4 REAL NEWS चैनल में करीब चार साल न्यूज के साथ ही प्रोग्रामिंग और धार्मिक शोज पर काम किया.<p></p>यहां से राज्यसभा टीवी का रुख किया और प्रोग्रामिंग में काम किया. इसके साथ ही एंकरिंग करना भी शुरू की. इसके बाद सूर्या समाचार में प्रोग्रामिंग में एंटरटेनमेंट बीट पर बतौर प्रोड्यूसर काम किया.<p></p>जी बिहार झारखंड में भी काम करने का अनुभव है. फिलहाल टीवी9 भारतवर्ष से जुड़ी हुई हैं.
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