नई दिल्ली, 3 अगस्त 2026: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने भारत में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंत्रालय ने Central Motor Vehicles Rules 1989 amendments का प्रस्ताव देते हुए एक मसौदा अधिसूचना जारी की है, जिसका उद्देश्य 'दोपहिया रोड एम्बुलेंस' के लिए एक सुव्यवस्थित विनियामक ढांचा (regulatory framework) स्थापित करना है। वर्तमान में, इन वाहनों को केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत एक अलग श्रेणी के रूप में विनियमित नहीं किया जाता है, जिसके कारण इनके निर्माण, सुरक्षा और पंजीकरण के लिए कोई राष्ट्रीय मानक उपलब्ध नहीं थे। 

Emergency medical care in rural and remote locations and last mile access

यह पहल विशेष रूप से emergency medical care in rural and remote locations और पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार करेगी। दोपहिया एम्बुलेंस उन संकरी गलियों और दुर्गम इलाकों में 'लास्ट-माइल एक्सेस' प्रदान करने में सक्षम हैं जहाँ पारंपरिक चार पहिया एम्बुलेंस नहीं पहुँच पातीं। मंत्रालय का मानना है कि यह नया ढांचा न केवल तेजी से आपातकालीन प्रतिक्रिया (rapid emergency response) सुनिश्चित करेगा, बल्कि उन क्षेत्रों में भी जीवन रक्षक सहायता पहुँचाएगा जहाँ गतिशीलता की चुनौतियाँ अधिक हैं। 

AIS-209 Part 1 2026 construction and functional requirements for ambulances

प्रस्तावित संशोधनों के तहत, अब इन एम्बुलेंसों को AIS-209 (Part 1): 2026 construction and functional requirements के कड़े मानकों का पालन करना होगा। यह मानक सुनिश्चित करता है कि वाहन की स्थिरता (vehicle stability), ब्रेकिंग परफॉरमेंस, रियर विजिबिलिटी और पार्किंग ब्रेक जैसे सुरक्षा पहलू अंतरराष्ट्रीय स्तर के हों। इसके अलावा, मरीज़ को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाले 'पेशेंट-कन्वेयंस सिस्टम' (patient-conveyance system) और कपलिंग अखंडता की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है ताकि परिवहन के दौरान किसी भी दुर्घटना से बचा जा सके। 

Two-wheeled road ambulance safety standards and patient handling systems

नए नियमों में मरीज़ों की सुरक्षा के लिए patient-handling systems और पर्यावरणीय जोखिमों (environmental exposure) से बचाव के प्रावधान भी शामिल हैं। अधिसूचना के अनुसार, L2 श्रेणी की वे दोपहिया एम्बुलेंस जो 1 अक्टूबर 2027 को या उसके बाद निर्मित होंगी, उन्हें इन सुरक्षा मानकों को पूरा करना अनिवार्य होगा। इसमें आपातकालीन लाइटों (emergency top lights) के लिए भी AIS-209 के अनुरूप होना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, इन वाहनों में अग्नि शामक यंत्र (fire extinguisher) की उपलब्धता और वैधता भी सुनिश्चित की जाएगी। 

Two-wheeled road ambulance fitness inspection rules and registration

विनियामक स्पष्टता के लिए, इन एम्बुलेंसों को 'परिवहन वाहनों' (transport vehicles) की श्रेणी में रखा जाएगा। इसका मतलब है कि इन्हें नियमित fitness inspection से गुजरना होगा और हर दो साल में अपने फिटनेस प्रमाणपत्र (certificate of fitness) का नवीनीकरण (renewal) कराना होगा। फिटनेस जांच के दौरान टायर, रिम, पेशेंट स्ट्रेचर, लॉकिंग मैकेनिज्म और पेशेंट-रिस्ट्रेंट सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण अंगों की बारीकी से जांच की जाएगी। इन एम्बुलेंसों के संचालन का क्षेत्र संबंधित राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित किया जाएगा। 

Future of rapid emergency response and medical care mobility

अंततः, यह नया फ्रेमवर्क दोपहिया एम्बुलेंस के डिजाइन और संचालन में अधिक जवाबदेही और सुरक्षा लाएगा। मंत्रालय ने इस मसौदे पर आम जनता और हितधारकों से सुझाव मांगे हैं, जिन पर अधिसूचना जारी होने के 30 दिनों के बाद विचार किया जाएगा। यह कदम भारत की last-mile access to medical care की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकता है, जिससे समय पर इलाज मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।