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TMC और शिवसेना UBT के बागी सांसदों के विलय को स्पीकर की हरी झंडी
लंबी चली सियासी खींचतान के बाद लोकसभा स्पीकर ने शिवसेना यूबीटी के बागी सांसदों के अलग दल में शामिल होने को आधिकारिक मान्यता दे दी है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों को शिवसेना शिंदे गुट में विलय को औपचारिक मान्यता दे दी है। इस बाबत लोक सभा सचिवालय ने सूचना भी जारी कर दी है। वहीं, टीएमसी से अलग हुए 20 सांसदों को लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की भी स्वीकृति दे दी गई है।
लोकसभा में टीएमसी सांसदों को मिलेगी अलग पहचान
स्पीकर के फैसले के बाद टीएमसी से अलग हुए 20 सांसद अब लोकसभा में एनसीपीआई के नाम से अलग दल के रूप में बैठेंगे। इससे सदन में इन सांसदों की राजनीतिक पहचान आधिकारिक तौर पर बदल गई है। लंबे समय से इस मुद्दे पर निर्णय का इंतजार किया जा रहा था।
किरेन रिजिजू ने सर्वदली बैठक के लिए भेजा निमंत्रण
इस घटनाक्रम के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने टीएमसी के बागी सांसद और एनसीपीआई के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय को पत्र लिखकर संसद के मानसून सत्र से पहले होने वाली सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया है।
इस में कहा गया है कि संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान उठाए जाने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों और विधायी कार्यों पर चर्चा के लिए 19 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे संसद भवन एनेक्सी के मुख्य समिति कक्ष में फ्लोर लीडर्स की बैठक आयोजित की जाएगी। रिजिजू ने सुदीप बंद्योपाध्याय और पार्टी की मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) डॉ. काकोली घोष दस्तीदार से बैठक में शामिल होने का अनुरोध किया है।
मानसून सत्र से पहले बदला सियासी समीकरण
लोकसभा स्पीकर के इस फैसले को संसद के मानसून सत्र से पहले महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। इससे सदन में दोनों दलों की संसदीय स्थिति और संख्या बल को लेकर नया समीकरण सामने आएगा। साथ ही, एनसीपीआई को संसदीय गतिविधियों में एक अलग राजनीतिक दल के रूप में भागीदारी का रास्ता भी साफ हो गया है।
अब कैसी है 'पार्टी पोजिशन इन लोकसभा'लिस्ट
लोकसभा स्पीकर के इस फैसले के बाद लोकसभा सचिवालय की ओर से'पार्टी पोजिशन इन लोकसभा' सूची भी जारी की गई है। 18 जुलाई 2026 तक के लिए जारी इस ताजा लिस्ट में स्पीकर के फैसले का असर दिखाई दिया है। इस सूची के अनुसार, अब शिवसेना (एकनाथ शिंदे) के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है,जबकि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के पास अब तीन सांसद ही रह गए हैं। वहीं,तृणमूल कांग्रेस के सामने अभी भी 28 सांसद दर्ज हैं, हालांकि फुटनोट में यह साफ किया गया है कि पार्टी से अलग हुए 20 सांसदों को उनके अनुरोध पर लोकसभा में अलग बैठने की अनुमति दी गई है।
शिवसेना (यूबीटी) ने फैसले पर जताया विरोध
लोकसभा स्पीकर के फैसले पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने कड़ा विरोध जताया है। पार्टी के प्रवक्ता आनंद दुबे ने आरोप लगाया कि स्पीकर ने उनकी पार्टी के छह सांसदों को शिंदे गुट का सदस्य मानते हुए मान्यता दे दी,जबकि ये सांसद शिवसेना (यूबीटी) के टिकट पर चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे।
आनंद दुबे ने कहा कि यह फैसला देश के लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव, धनबल, जांच एजेंसियों के इस्तेमाल और विभिन्न संस्थाओं में मामलों के निपटारे के तरीके से लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हुई है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी को दूसरी बार तोड़ा गया है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों ने पहले ही लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि किसी भी निर्णय से पहले दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए, लेकिन बिना दोनों पक्षों को सुने ही फैसला सुना दिया गया। उन्होंने कहा कि अगर इस तरह संस्थाओं से समझौता कर राजनीति की जाएगी तो विपक्ष कमजोर होगा और अंततः लोकतंत्र पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा।
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शिव शुक्लाauthor
शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।
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