
JDU नेता श्याम रजक और गृह मंत्री अमित शाह Image Credit source: TV9
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ऐलान से NDA में हलचल मच गई है. मुंबई में बोलते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 2029 तक NDA-शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू कर दिया जाएगा. इस बयान के बाद BJP की सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) सतर्क हो गई है. पार्टी के नेता जल्द ही अमित शाह से मिलकर UCC पर अपना पक्ष रखने की योजना बना रही है.
जेडीयू के महासचिव श्याम रजक ने साफ तौर पर कहा कि किसी भी हाल में बिहार में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू नहीं होने दिया जाएगा. रजक के इस बयान से NDA के अंदर राजनीतिक मतभेद की संभावना पैदा हो गई. इसके बाद, JDU के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने घोषणा की कि वे जल्द ही UCC के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए अमित शाह से मुलाकात करेंगे.
अमित शाह से मुलाकात का समय मांगा
सूत्रों के मुताबिक, मुलाकात के लिए गृह मंत्री अमित शाह से समय मांगा जा रहा है. संजय झा जानते है कि अगर अभी कुछ नहीं किया गया तो श्याम रजक की तरह बाकी जेडीयू के नेता भी बयान देना शुरू कर देंगे जो एनडीए की सेहत के लिए ठीक नहीं रहेगा. इस बीच जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन का बयान आया जिसमें संजय झा के बयान को दोहराया गया. राजीव रंजन ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा UCC के मसले पर गृह मंत्री अमित शाह से जल्द बातचीत करेंगे.
UCC पर व्यापक विचार-विमर्श
सूत्रों के मुताबिक जेडीयू का विरोध UCC पर चर्चा से नहीं, बल्कि बिना व्यापक विचार-विमर्श के इसे लागू करने को लेकर है. नीतीश कुमार पहले ही विधि आयोग को लिखे पत्र में कह चुके हैं कि UCC को जल्दबाजी या जबरन लागू नहीं किया जाना चाहिए. JDU का रूख सभी धर्मों, धार्मिक अल्पसंख्यकों, राज्य सरकारों और दूसरे हितधारकों से व्यापक बातचीत करने वाला रहा है.
UCC पर TDP पुराने रूख पर कायम
वहीं, टीडीपी का अमित शाह के बयान पर कोई ताजा रिएक्शन तो नहीं आया पर यूसीसी पर TDP का पुराना रुख भी सावधानी भरा रहा है. पुराने रूख के मुताबिक TDP भी UCC के मसौदे पर पहले व्यापक चर्चा और बहस के बाद ही अंतिम रुख तय करने के पक्ष में रही है. हालांकि बीजेपी सूत्रों का कहना है कि सहयोगी दलों का यह रुख नया नहीं है.
सहयोगियों को साथ लेकर चलने की कोशिश
बीजेपी UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर अपने सहयोगियों को साथ लेकर चलने की कोशिश करेगी. सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी की ओर से सहयोगियों को उत्तराखंड मॉडल का हवाला दिया जा सकता है, जहां सरकार के मुताबिक व्यापक विचार-विमर्श के बाद UCC लागू किया गया. हालांकि अनुच्छेद 370 हटाने का मामला हो, CAA का मामला हो, तीन तलाक हो या वक्फ संशोधन का मुद्दा. मतभेद के बावजूद ऐसे मामलों मे बीजेपी ने एनडीए सहयोगियों से बात कर रास्ता निकाला था.
ऐसे मे बीजेपी को UCC के मसले पर भी सहयोगियों से बात करके रास्ता निकालने की उम्मीद है. अब निगाहें JDU और गृह मंत्री अमित शाह की प्रस्तावित मुलाकात पर है, जहां UCC पर सहयोगी दल की आपत्तियों और सरकार की रणनीति के बीच सहमति का रास्ता तलाशने की कोशिश होगी.

आनंद प्रकाश पांडेय
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई के बाद 2005 में टीवी पत्रकारिता में कदम रखा. वो सफर अब टीवी9 भारतवर्ष तक पहुंच गया है. राजनीतिक लोगों और राजनीतिक खबरों में रूचि है. भले ही पद एडिटर, नेशनल अफेयर्स का है पर अभी भी खुद को नौसिखिया ही मानता हूं और इसलिए सीखने का क्रम अनवरत जारी है...
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